भारत ने अगले 15 वर्षों के लिए रक्षा क्षेत्र का विस्तृत रोडमैप तैयार किया है, जिसमें नौसेना, वायुसेना और थलसेना की क्षमताओं को और अधिक सशक्त करने पर जोर दिया गया है। इस योजना का सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय नौसेना के लिए तीसरे विमानवाहक पोत का निर्माण है, जो परमाणु ऊर्जा से संचालित होगा। यह भारत का पहला परमाणु सक्षम विमानवाहक पोत होगा, जिससे नौसेना को लंबी दूरी तक संचालित होने और गुप्त अभियानों को अंजाम देने की क्षमता मिलेगी। वर्तमान में भारत दो विमानवाहक पोत संचालित करता है – एक रूसी निर्मित और दूसरा स्वदेशी।
सरकार की योजना है कि इस नए विमानवाहक पोत पर स्वदेशी लड़ाकू विमानों की तैनाती की जाए। यह कदम न केवल नौसेना की ताकत में वृद्धि करेगा, बल्कि भारत को सामरिक दृष्टि से चीन और पाकिस्तान जैसे प्रतिद्वंद्वियों के सामने और अधिक मजबूत बनाएगा। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घरेलू रक्षा कंपनियों को प्रमुखता दी जाएगी, ताकि रूस, अमेरिका और फ्रांस जैसे विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम की जा सके।
रक्षा मंत्रालय के रोडमैप में दो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम (EMALS) खरीदने की भी योजना है। यह तकनीक पारंपरिक स्टीम कैटापल्ट की जगह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फोर्स का उपयोग करके विमानवाहक पोत से विमानों को लॉन्च करने में सक्षम है। इसके अलावा, ड्रोन्स के उपयोग और उत्पादन पर भी विशेष जोर दिया जाएगा, जिससे निगरानी और सामरिक क्षमताएं और बढ़ेंगी।
भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025 में रक्षा क्षेत्र के लिए लगभग 6.81 लाख करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका, चीन और रूस के बाद भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा रक्षा खर्च करने वाला देश है।
इसके साथ ही नई पीढ़ी के दोहरे इंजन वाले डेक-आधारित लड़ाकू विमान और हल्के लड़ाकू विमान विकसित करने की भी योजना बनाई गई है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) इन विमानों को नौसेना की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करेगा।
स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में भारत की रक्षा क्षमताएं तकनीकी रूप से अधिक उन्नत और आत्मनिर्भर होंगी। यह रोडमैप न केवल भारत की समुद्री शक्ति को बढ़ाएगा बल्कि देश को वैश्विक रक्षा शक्ति के रूप में स्थापित करने में भी सहायक होगा।