भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों में एक और बड़ा कदम उठने जा रहा है। दोनों देशों के बीच करीब चार अरब डॉलर के सौदे पर बातचीत जल्द शुरू होगी, जिसके तहत भारत को अमेरिकी कंपनी बोइंग से नए P-8I समुद्री गश्ती विमान मिलेंगे। बोइंग और अमेरिकी अधिकारियों का दल भारत आने वाला है। फिलहाल भारतीय नौसेना के पास पहले से 12 P-8I विमान मौजूद हैं और नए विमानों के जुड़ने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निगरानी और आक्रामक क्षमता और मजबूत होगी।
हाल ही में अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को हल्के लड़ाकू विमान तेजस के लिए तीसरा इंजन सौंपा था। यह सौदा और अब P-8I डील इस बात का संकेत हैं कि टैरिफ वॉर के कारण रिश्तों में आई तल्खी के बाद अब भारत-अमेरिका के रक्षा संबंधों में नई गर्माहट आई है।
रणनीतिक दृष्टि से P-8I विमान भारत के लिए बेहद अहम हैं। यह विमान समुद्र की गहराई में छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजकर उन्हें निशाना बना सकता है। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों के बीच भारत को इन विमानों की खास जरूरत है। P-8I एक बार में 8,300 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है और लंबी अवधि तक निगरानी मिशन पर तैनात रह सकता है। इसमें अत्याधुनिक टॉरपीडो, हार्पून एंटी-शिप मिसाइलें और मल्टी-मिशन सर्फेस सर्च राडार लगे हैं।
भारत इन विमानों का इस्तेमाल न केवल समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में चीनी गतिविधियों की स्पष्ट तस्वीरें लेने और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए भी करता रहा है। नए सौदे से भारतीय नौसेना की क्षमता और बढ़ेगी और यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने में भारत के लिए अहम साबित होगा।