भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर दोनों पक्षों के बीच ताजा टकराव से तनाव उत्पन्न हो गया है। इसी टकराव को लेकर सरकार ने ना सिर्फ कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए है बल्कि सैन्य विकल्प तलाशने भी शुरू कर दिए है।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आज एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, एनएसए अजीत डोभाल, सीडीएस बिपिन रावत और सेना प्रमुख नरवने समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
इस बैठक के कई अहम मायने निकाले जा रहे है और माना जा रहा है कि इस बैठक में कई गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई। दरअसल चीनी सेना ने 29 और 30 अगस्त की दरम्यानी रात पूर्वी लद्दाख में उकसावे की कार्रवाई करते हुए पैंगोंग झील के दक्षिण में हमला करने की कोशिश की है।
भारतीय सेना ने उनके इस हमले का माकूल जवाब दिया और उन्हें खदेड़ दिया था। हालांकि चीनी सेना ने भी हथियारों की तैनाती कर दी है जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया है और उसी के मद्देनज़र यह बैठक हुई है।
भारतीय वायुसेना ने पिछले तीन महीनों में अपने सभी महत्वपूर्ण युद्धक विमानों जैसे सुखोई 30 एमकेआई, जगुआर और मिराज 2000 विमान पूर्वी लद्दाख में प्रमुख सीमावर्ती हवाई ठिकानों और एलएसी के पास तैनात किए हैं।