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Loksabha Election: सीएम मोहन यादव ने जीतू पटवारी के बहाने कांग्रेस पर साधा निशाना

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जीतू पटवारी के बयान को लेकर प्रियंका गांधी को भी आड़े हाथ लिया। सीएम मोहन यादव ने कहा कि अब कहां हैं प्रियंका गांधी?

By: RNI Hindi Desk 
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Loksabha Election: सीएम मोहन यादव ने जीतू पटवारी के बहाने कांग्रेस पर साधा निशाना

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव इन दिनों लोकसभा चुनाव को पार्टी के प्रचार प्रसार में लगे हुए हैं। मोहन यादव लोकसभा संसदीय क्षेत्र के बीजेपी प्रत्याशी संध्या राय के पक्ष में चुनावी सभा को संबोधित करने के लिए भिण्ड के भांडेर विधानसभा पहुंचे। यहां उन्होंने जमकर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी के बयान को लेकर जमकर हमला किया।जीतू पटवारी को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। कांग्रेस को उन पर कार्रवाई करनी चाहिए। मैं उनके बयान और व्यवहार की निंदा करता हूं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पूरी कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि महिलाओं का अपमान करना कांग्रेस का चरित्र है। सीएम ने जीतू पटवारी के बयान को लेकर प्रियंका गांधी को भी आड़े हाथ लिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ कहने वाली प्रियंका गांधी आज कहा हैं।

जीतू पटवारी के बयान पर प्रियंका गांधी को घेरा

सबसे पहले सीएम मोहन यादव ने जीतू पटवारी पर निशाना साधा। सीएम मोहन यादव ने इमरती देवी को लेकर जीतू पटवारी के बयान की निंदा करते हुए कहा कि मुझे यह सुनकर दुख होता है कि कांग्रेस के नेता महिलाओं के बारे में कैसे बात करते हैं। ये उनके लिए डूब मरने के बराबर है। इसके बाद उन्होंने प्रियंका गांधी को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि अब, प्रियंका गांधी कहां हैं जो ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ की बात कहती हैं? सीएम मोहन यादव ने आगे कहा कि प्रियंका गांधी से इमरती देवी को लेकर प्रदेश अध्यक्ष के बयान के बारे में पूछा जाना चाहिए।

सीएम ने  कहा कि इस बार के चुनाव कांग्रेस के पापों को सबक सिखाने का चुनाव है। कांग्रेस पार्टी ने 70 सालों तक पाप किए। इनके माथे पर कई कलंक हैं। कांग्रेस ने आजादी के बाद से 70 सालों तक देश में शासन चलाया, लेकिन वे देश की समस्याओं को खत्म नहीं कर पाए। भगवान श्रीराम खुले आसमान के नीचे विराजमान रहे, लेकिन कांग्रेस ने श्रीराम मंदिर को लेकर हमेशा से देश के हिन्दू और मुसलमानों को लड़ाने का काम किया है।

कांग्रेस हमेशा से श्रीराम मंदिर निर्माण में अड़ंगे लगाती रही और जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्रीराम मंदिर निर्माण करवाया तो वे श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का निमंत्रण ठुकरा दिया और अब प्रदेश की जनता ही कांग्रेस को ठुकराएगी। कांग्रेस और उसके घमंडिया गठबंधन के लोग भी शामिल नहीं हुए।

उन्होंने कहा कि इस देश के नागरिकों का 2014 में पहला वोट पड़ा तो देश से आतंकवाद खत्म हो गया, मोदी ने पाकिस्तान को उसकी औकात दिखाई। पहले देश में कई बम धमाके होते थे। लेकिन जब से मोदी सरकार बनी है, तब से देश से आतंकवाद खत्म हो गया है। राम मंदिर को लेकर भी उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि राम मंदिर बनने से कांग्रेस वालों का वोट बैंक छिन गया है।

दूसरा वोट पड़ा तो भगवान श्रीराम गर्भगृह में मुस्कुरा रहे हैं। भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है और अब तीसरी बार वोट पड़ेगा तो भारत दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश बनेगा। अबकी बार तीसरी बार सरकार बनाना है, क्योंकि भारत को शक्तिशाली बनाना है, सनातन धर्म की जय-जयकार पूरी दुनिया में करवाना है, दुनिया में मानवता की पुनर्स्थापना और भारत का मान-सम्मान बढ़ाना है। इसके लिए भाजपा को जीतना जरूरी है। अबकी बार-400 पार लाना है। अब 2024 में मोदी सरकार बनते ही मथुरा का नंबर आने वाला है। हमें सबको मिलकर श्री कृष्ण को मुस्कुराते हुए देखना है।

कुर्सी के लिए देश का बंटवारा किया

भिण्ड के मंच से सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस पर सत्ता के लिए देश का बंटवारा करने का भी आरोप लगाया। सीएम ने कहा- “मैं आज इस बात के लिए आनंदित हूं, हमारे सिंधी, बंगाली और सिख समाज के भाई-बहनों केवल धर्म की रक्षा के लिए, भगवान राम कृष्ण की संस्कृति को बचाने के लिए, हिंदू धर्म की चुटिया कटे नहीं, इसलिए सब छोड़कर आए। उन्होंने धर्म बचाने के लिए देश छोड़ना मंजूर कर लिया। भारत देश में आ गए। ये हमारा सौभाग्य है।”

सीएम मोहन यादव ने भिण्ड की धरती से राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को भी अमेठी के बजाय रायबरेली से चुनाव लड़ने के लिए घेरा। इसके अलावा 2014 के लोकसभा चुनावों में गुजरात से आकर उत्तर प्रदेश के बनारस से पीएम मोदी के चुनाव लड़ने का भी जिक्र किया।

भिंड लोकसभा इतिहास

भिंड मध्य प्रदेश राज्य का एक जिला और लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र है. यह जिले का मुख्यालय भी है. इसका क्षेत्रफल 4,459 वर्ग किलोमीटर है. भिंड जिले में 5 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं.

2011 जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक भिंड की जनसंख्या 24 लाख 89 हजार 759 है. यहां की 75.3 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 24.7 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है. भिंड में 23.1 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति की और 0.85 फीसदी आबादी अनुसूचित जनजाति की है. इस  जिले की 75.26 फीसदी जनसंख्या साक्षर है. इनमें पुरुष 85.40 फीसदी और महिलाओं की साक्षरता दर 63.14 फीसदी है.

चुनाव आयोग के आंकड़े के मुताबिक 2014 में भिंड लोकसभा सीट पर 15 लाख 98 हजार 169 मतदाता थे. यहां पर 8 लाख 90 हजार 851 पुरूष और 7 लाख 07 हजार 318 महिला मतदाता थे.

मध्य प्रदेश का यह जिला भौगोलिक रूप से अपने बीहड़ों, उपजाऊ भूमि और घने जंगलों के लिए जाना जाता है. भिंड मध्य भारत के 16 जिलों में से एक था जिसे 28 मई 1948 को गठित किया गया था. इसके बाद, नवंबर में राज्यों के पुनर्गठन के परिणामस्वरूप 1956 में जिला भिंड नए मध्य प्रदेश का हिस्सा बना. पूर्व में 4 तहसीलें थीं- भिंड, मेहगांव, गोहद और लहार लेकिन वर्तमान में 8 तहसीलें है- भिंड, अटेर, मेहगांव, गोहद, मिहोना, लहर, गोरमी और रौन.

भिंड लोकसभा सीट बीजेपी के मजबूत किलों में से एक है. इस सीट पर विजयाराजे सिंधिया भी चुनाव जीत चुकी हैं, तो वहीं उनकी बेटी और राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे भी इस सीट पर किस्मत आजमा चुकी हैं. 1984 के चुनाव में वसुंधरा राजे ने यहां से चुनाव लड़ा था, लेकिन उनको हार का सामना करना पड़ा था. फिलहाल इस सीट पर पिछले 8 बार से बीजेपी जीतती आ रही है. कांग्रेस को इस सीट पर सिर्फ 3 बार जीत नसीब हुई.

भिंड के बारे में

मध्य प्रदेश की भिंड लोकसभा सीट (Bhind Lok Sabha Election Results 2019) पर 2014 के चुनाव में BJP के भागीरथ प्रसाद ने यहां जीत दर्ज की थी. उन्हें 4,04,474 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस की इमरती देवी 2,44,513 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रही थीं.

अगर यहां के इतिहास की बात करें, तो सन् 1962 में इस सीट पर सबसे पहले चुनाव हुआ था. उस समय सीट कांग्रेस के सूरज प्रसाद ने इस सीट से जीत दर्ज की थी. 1967 में BJS के वाई.एस. कुशवाहा, 1971 में BJS की विजया राजे सिंधिया, 1977 में BLD के रघुबीर सिंह, 1980 में कांग्रेस के कालीचरण, 1984 में कांग्रेस के कृष्ण सिंह, 1989 में BJP के नरसिंह राव और 1991 में BJP के योगानंद सरस्वती ने चुनाव जीता. वहीं 1996, 1998, 1999 व 2004 में BJP के रामलखन सिंह और 2009 में अशोक अरगल का इस सीट पर कब्‍जा था.

2014 में चुनाव जीते भागीरथ प्रसाद का जन्‍म 3 जुलाई, 1947 को हुआ था. वह पेशे से सामाजिक कार्यकर्ता हैं. इन्‍होंने पीएचडी किया हुआ है.

इस संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटें आती हैं, जिनमें अटेर, भिंड, लहर, मेहगांव, गोहड़ (सुरक्षित), सेवाडा, भांडेर (सुरक्षित) व दतिया शामिल हैं.

संध्या राय हैं भिंड से सांसद

भाजपा ने अपनी उम्मीदवार संध्या राय को बरकरार रखा है, जिन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में 54.93% वोट हासिल किए थे, जबकि कांग्रेस को 34.12% वोट मिले थे. बसपा भी इस सीट पर एक शक्तिशाली राजनीतिक ताकत थी क्योंकि 2009 के चुनाव में इसके उम्मीदवार डी एल राहुल ने 11.6% वोट हासिल किए थे, जबकि भाजपा उम्मीदवार अशोक अर्गल और कांग्रेस उम्मीदवार डॉ भागीरथ प्रसाद के बीच वोटों का अंतर 4% से कम था.

2019 में संध्या राय

2019 में, भाजपा ने प्रसाद की जगह संध्या राय को टिकट दिया, जिन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार देवाशीष के 34.12% वोटों के मुकाबले 54.93% वोटों के साथ आसानी से चुनाव जीत लिया. पिछले दो चुनावों में, बसपा भिंड में कोई प्रभाव डालने में विफल रही है क्योंकि उसके उम्मीदवारों को क्रमशः केवल 4.63% और 6.93% वोट मिले हैं.

2019 में संध्या राय

2019 में, भाजपा ने प्रसाद की जगह संध्या राय को टिकट दिया, जिन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार देवाशीष के 34.12% वोटों के मुकाबले 54.93% वोटों के साथ आसानी से चुनाव जीत लिया. पिछले दो चुनावों में, बसपा भिंड में कोई प्रभाव डालने में विफल रही है क्योंकि उसके उम्मीदवारों को क्रमशः केवल 4.63% और 6.93% वोट मिले हैं.

बीजेपी की संध्या राय को 5,27,694 वोट मिले (जीतीं)
कांग्रेस के देवाशीष जरारिया को 3,27,809 वोट मिले
बसपा के बाबू राम जमोर को 66,613 वोट मिले

2014 का जनादेश

साल 2014 के चुनाव में बीजेपी के टिकट से भागीरथ प्रसाद ने जीत हासिल की थी. डॉ. भागीरथ प्रसाद को 4 लाख 04 हजार 474 (55.48 फीसदी) वोट मिले थे, तो इमरती देवी को 2 लाख 44 हजार 513 (33.54 फीसदी) वोट मिले थे. दोनों के बीच हार जीत का अंतर 15 हजार 9961 वोटों का था. वहीं बसपा 4.64 फीसदी वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रही थी.

2009  का जनादेश

इससे पहले साल 2009 के चुनाव में भी यहां पर बीजेपी को जीत मिली थी और अशोक अर्गल सांसद बने थे. उन्होंने कांग्रेस के डॉ. भागीरथ प्रसाद को हराया था. अशोक अर्गल को जहां 2 लाख 27 हजार 376 (43.41 फीसदी) वोट मिले थे, तो वहीं भागीरथ प्रसाद को 2 लाख 08 हजार 479 (39.8 फीसदी) वोट मिले थे. दोनों के बीच हार जीत का अंतर का 18 हजार 897 वोटों का था. बसपा 11.61 फीसदी वोटों के साथ इस चुनाव में तीसरे स्थान पर रही थी.

 

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