मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित भारत भवन में चल रहे सात दिवसीय ‘जल समागम’ के दौरान देश में बढ़ते जल संकट पर गंभीर चर्चा की गई। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और ‘वॉटरमैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाने जाने वाले राजेन्द्र सिंह ने जल संरक्षण को लेकर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उन्होंने लोगों की भागीदारी से 23 सूखी और मृतप्राय नदियों को पुनर्जीवित करने में सफलता हासिल की है।
राजेन्द्र सिंह का कहना है कि जल ही भविष्य की सबसे बड़ी संपत्ति है। उन्होंने कहा कि यदि समाज, सरकार और आम नागरिक मिलकर प्रयास करें, तो जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उनके अनुसार भारत की असली ताकत उसके जल संसाधनों में निहित है, जिन्हें सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि उनका कार्य केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सामूहिक जनभागीदारी पर आधारित है। लोगों को जोड़कर किए गए प्रयासों से ही 23 नदियों को पुनर्जीवित करना संभव हुआ है, जो पर्यावरण संरक्षण की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
राजेन्द्र सिंह ने जल संकट को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति गंभीर हो सकती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि पानी बचाने को जीवन का हिस्सा बनाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।