इतिहास से अच्छा शिक्षक कोई दूसरा हो ही नहीं सकता। इतिहास सिर्फ अपने में घटनाओं को नहीं समेटे होता है बल्कि इन घटनाओं से भी आप बहुत कुछ सीख सकते हैं। हर गुजरता दिन इतिहास में कुछ घटनाओं को जोड़कर जाता है। इटली के तानाशाह बेनितो मुसोलिनी, उनकी प्रेमिका क्लारा पेटाची और उनके कुछ सहयोगियो की 28 अप्रैल 1945 में हत्या हुई थी ।
दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत में मुसोलिनी ने एक मशहूर वक्तव्य दिया था, अगर मैं लड़ाई के मैदान से हटूं तो मुझे गोली मार दो। मुसोलिनी ये कह कर सिर्फ लफ्फाजी कर रहे थे, लेकिन जब मौका आया तो उनके विरोधियों ने उनके इस कथन का अक्षरश: पालन किया। लड़ाई में शिकस्त खाने के बाद मुसोलिनी और उनकी प्रेमिका क्लारेटा उत्तर में स्विटजरलैंड की सीमा की तरफ बढ़ रहे थे कि डोगों कस्बे के पास वो अपने विरोधियों के जिन्हें पार्टीजन कहा जाता था हत्थे चढ़ गए। उन्होंने उन्हें और उनके 16 साथियों को बिना मुकदमा चलाए कोमो झील के पास गोली से उड़ा दिया।
मुसोलिनी 18 साल की उम्र में ही अध्यापक बन गया था, हालांकि वो बाद में भागकर स्विटजरलैंड चला गया और वहां पर मजदूरी करने लगा था। वहां से लौटने के बाद वो इटली की सेना में काम किया और उसके बाद पत्रकार बना। इस दौरान प्रथम विश्व युद्ध छिड़ा और बेनिटो मुसोलिनी का मानना था कि इटली को प्रतम विश्व युद्ध में निष्पक्ष न रहकर ब्रिटेन और फ्रांस के पक्ष में लड़ना चाहिए. लेकिन उसकी ऐसी सोच के कारण उसे संपादक की नौकरी से निकाल दिया गया।
साल 1919 में बेनिटो मुसोलिनी ने अपना एक राजनीतिक संगठन बनाया, इसमें उसने उन लोगों को शामिल किया जो उसकी विचारधारा से समहत रखते थे। इसी दौरान इटली में सामाजवाद कमजोर हो रहा था, इटली में भ्रष्टाचार फैल गया था. इस दौरान बेनिटो मुसोलिनी इटली में ताकतवर बनता चला गया और धीरे धीरे हालात ऐसे बनते चले गए कि तत्कालनी प्रधानमंत्री लुइगी फैटा को इस्तीफा देना पड़ा और बेनिटो मुसोलिनी प्रधानमंत्री बन गया. दूसरे विश्व युद्ध के शुरू होने के लिए कई इतिहासकार बेनिटो मुसोलिनी को जिम्मेदार माना जाता है।
लेकिन जब दूसरा विश्व युद्ध खत्म हुआ तब तक मुसोलिनी काफी कमजोर पड़ चुका था और मुसोलिनी को के पद प्रधानमंत्री से इस्तीफा देना पड़ा, बाद में उसे हिरासत में ले लिया गया. कहा जाता है कि इसके बाद हिटलर ने मुसोलिनी की मदद की और उसे जेल से छुड़वाया। 28 अप्रॅल को जन्मे व्यक्ति 28 अप्रॅल 1971 में हिंदी फिल्म निर्देशक और पटकथा लेखक निखिल आडवाणी का जन्म हुआ था।
28 अप्रॅल को हुए निधन मराठा शासक पेशवा बाजीराव प्रथम का 28 अप्रॅल 1740 में निधन हुआ था। 28 अप्रॅल 1740 में बाजीराव प्रथम की दूसरी पत्नी मस्तानी का निधन।
28 अप्रैल की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
1945 – इटली के देशभक्त सैनिकों द्वारा तानाशाह मुसोलिनी एवं उनकी पत्नी की गोली मारकर हत्या।
1999 – अमेरिकी वैज्ञानिक डॉक्टर रिचर्ड सीड द्वारा एक वर्ष के अंदर मानव क्लोन बनाने की घोषणा, विश्वभर में हज़ारों कम्प्यूटरों को चेर्नोबिल वायरस ने ठप्प किया।
2001 – पहला अंतरिक्ष सैलानी टेनिस टीटो अंतरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना।
2002 – बुकर पुरस्कार का नया नाम ‘मैन बुकर प्राइज फ़ॉर फ़िक्शन’ रखा गया, पाकिस्तान की सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ के जनमत संग्रह को वैध करार दिया।
2004 – थाबोम्बेकी ने दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति पद की शपथ ली। थाइलैंड में पुलिस चौकी पर हमले में 122 लोगों की मृत्यु।
2008 – भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरों) ने पीएसएलवी-सी9 के साथ 10 सैटेलाइट एक साथ छोड़कर एक नया इतिहास रचा। मलेशिया में भारतीय मूल के दस सांसदों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। पाकिस्तान की प्रधानमंत्री रहीं बेनजीर भुट्टो को मरणोपरान्त प्रतिष्ठित टिपरी इंटरनेशनल पुरस्कार प्रदान किया गया।
28 अप्रैल को जन्मे व्यक्ति
1981 – अनुप्रिया पटेल – भारत की सत्रहवीं लोकसभा की सांसद व नरेन्द्र मोदी सरकार की सबसे युवा मंत्री हैं।
1940 – समीर रंजन बर्मन – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनेता थे।
1929 – भानु अथैया – भारतीय फ़िल्मों की प्रसिद्ध ड्रेस डिज़ाइनर।
1791 – हरि सिंह नलवा – महाराजा रणजीत सिंह के सेनाध्यक्ष।
1924 – केनेथ कौंडा – ज़ाम्बिया के पहले राष्ट्रपति थे।
1897 – ये जियानयिंग – चीन में सेना प्रमुख के अध्यक्ष थे।
28 अप्रॅल को हुए निधन
1992 – विनायक कृष्ण गोकाक – ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ से सम्मानित कन्नड़ भाषा के प्रमुख साहित्यकारों में से एक।
1955 – टी. वी. सुन्दरम अयंगर – भारतीय उद्योगपति और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के अग्रणी उद्यमी थे।
1740 – बाजीराव प्रथम, मराठा साम्राज्य के महान सेनानायक थे। मस्तानी – बाजीराव प्रथम की दूसरी पत्नी थी।
1719 – फ़र्रुख़सियर – मुग़ल वंश के अजीमुश्शान का पुत्र था।