पन्नाः मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में वन एवं वन्यजीव संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी ही अब कानून की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं। अधिकारी सौंदर्यीकरण के नाम पर निर्माण कार्य कर रहे हैं।

दरअसल पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) के उप संचालक द्वारा अपने शासकीय बंगले से कार्यालय और मुख्य मार्ग तक आम लोगों की नजरों से बचकर आवागमन करने के लिए वन क्षेत्र में बिना अनुमति जेसीबी मशीन चलवाकर एक कच्चे “गुप्त मार्ग” का निर्माण कराया गया।
इस दौरान वर्षों पुराने बांस-भिर्रा समेत कई वनस्पतियों को जड़ सहित उखाड़ दिया गया और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र की संरचना में व्यापक बदलाव कर दिया गया। निर्माण के दौरान मौके पर स्वयं उप संचालक अपने तीन रेंजरों के साथ मौजूद थे और जेसीबी चालक से अपनी देखरेख में कार्य करा रहे थे।
पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक का कार्यालय परिसर उत्तर सामान्य वन मण्डल पन्ना अंतर्गत आता है। नियमानुसार कार्य कराने से पूर्व संबंधित वन मण्डल से अनुमति लेना अनिवार्य है। लेकिन साहब ने पद का दुरुपयोग कर उन नियम-कानूनों को ही जेसीबी तले रौंदते हुए निर्माण करा डाला कि जिनका पालन स्वयं करना तथा दूसरों से करवाना उनका दायित्व है। वहीं अपनी इस आपराधिक लापरवाही को उप संचालक पीटीआर वीरेन्द्र पटेल (IFS) ने स्वयं स्वीकार किया है।
पूरी घटना बीते शनिवार की बताई जा रही है। पूरा क्षेत्र उत्तर वन मण्डल पन्ना की पन्ना रेंज के वन कक्ष क्रमांक पी-410 के अंतर्गत आता है। इसी दौरान मीडिया कर्मियों के अचानक मौके पर पहुंचने से हड़कंप मच गया और कुछ ही देर में जेसीबी मशीन को मौके से हटा दिया गया।
उप संचालक ने स्वयं स्वीकार किया कि कार्य कराने से पहले उनके द्वारा आवश्यक अनुमति नहीं ली गई। मामला मीडिया के संज्ञान में आने पर अब वे पत्र लिखकर उत्तर वन मण्डल पन्ना से आवश्यक अनुमति शीघ्रता से प्राप्त करने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कराए गए कार्य को “कार्यालय परिसर की सामान्य साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण” योजना का हिस्सा बता कर लापरवाही पर पर्दा डालने की कोशिश भी की। इस दौरान कार्यस्थल पर उप संचालक अपने सहयोगी परिक्षेत्र अधिकारी हिनौता राजेन्द्र अरजरिया, परिक्षेत्र अधिकारी पन्ना कोर अजीत जाट एवं राहुल सिकरवार परिक्षेत्र अधिकारी पन्ना बफर के साथ मौजूद रहे।
उधर पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक वीरेन्द्र पटेल (IFS) ने अपने कक्ष में मीडिया से बात करते हुए एक सवाल के जवाब में बताया, ऑफिस कैम्पस के सौंदर्यीकरण का कार्य मैं और समस्त विभागीय कर्मचारी मिलकर अपनी स्वेच्छा तथा स्वयं के खर्च से करा रहे हैं। इसके तहत पुराने बांस-भिर्रा, शो बबूल एवं झाड़ियों की साफ़-सफाई करवाकर छायादार-फलदार पौधे लगाए जाएंगे। रास्ते का निर्माण निरीक्षण पथ के तौर पर आवागमन के लिए किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि यह मार्ग केवल निरीक्षण या सफाई के लिए नहीं, बल्कि उप संचालक के आवास से सीधे कार्यालय और आगे मुख्य सड़क तक पहुंच बनाने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा था। इसके लिए बाउंड्री वॉल तक तोड़ दी गई। जबकि पहले से एक सुगम पक्का मार्ग मौजूद है, ऐसे में इस नए रास्ते की आवश्यकता पर सवाल उठ रहे हैं। वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के तहत किसी भी वन भूमि के उपयोग में बदलाव, खुदाई या निर्माण के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य है।
पन्ना से राजेश रावत की रिपोर्ट