भोपाल, निमाड़ और बुरहानपुर क्षेत्र में आए तेज आंधी-तूफान ने केला उत्पादक किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में फसल पूरी तरह नष्ट होने की स्थिति में पहुंच गई है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा है।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि इस प्राकृतिक आपदा से किसानों को 150 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। उनका आरोप है कि सरकार नुकसान का सही आकलन नहीं कर रही है और वास्तविक स्थिति को कम करके दिखाया जा रहा है।
विपक्ष का आरोप है कि किसानों को उनकी वास्तविक लागत के अनुसार मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि एक हेक्टेयर केले की खेती में 4 से 6 लाख रुपये तक की लागत आती है, जबकि मुआवजा बेहद कम दिया जा रहा है, जो किसानों के साथ अन्याय है।
विपक्षी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि सरकार 100 प्रतिशत फसल नुकसान को केवल 25 प्रतिशत मानकर मुआवजा तय कर रही है, जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
प्रभावित क्षेत्रों के लिए विपक्ष ने 150 करोड़ रुपये के विशेष राहत पैकेज की मांग की है। साथ ही किसानों के कर्ज माफी की भी अपील की गई है, ताकि उन्हें आर्थिक राहत मिल सके।
अब सभी की नजरें सरकार पर हैं कि वह इस गंभीर कृषि संकट पर क्या राहत कदम उठाती है और प्रभावित किसानों को किस तरह सहायता प्रदान करती है।