राजधानी दिल्ली में आज विपक्षी दलों ने S.I.R. (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन रेगुलेशन) कानून के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी से लेकर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव तक, कई प्रमुख नेताओं ने एकजुट होकर सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने का आरोप लगाया।
जंतर मंतर पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राकांपा, वामपंथी दल और कई क्षेत्रीय दलों के नेता शामिल हुए। विपक्षी नेताओं का कहना है कि S.I.R. का इस्तेमाल सरकार राजनीतिक विरोधियों को डराने, गिरफ्तार करने और उनकी आवाज दबाने के लिए कर रही है। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा, “यह कानून जनता की आजादी पर सीधा हमला है। सरकार इससे विपक्ष और असहमति रखने वालों को निशाना बना रही है। हम इसे संसद के भीतर और बाहर हर मंच पर चुनौती देंगे।”

अखिलेश यादव ने भी मंच से सरकार पर तीखा वार किया। उन्होंने कहा, “S.I.R. लोकतंत्र के खिलाफ है और जनता की स्वतंत्रता छीनने वाला कानून है। इसका इस्तेमाल आम नागरिकों को भयभीत करने और विपक्षी नेताओं को फंसाने के लिए किया जा रहा है।” उन्होंने मांग की कि इस कानून को तुरंत रद्द किया जाए या इसके दमनकारी प्रावधानों को हटाया जाए।
प्रदर्शन में शामिल अन्य नेताओं, जैसे सीताराम येचुरी, शरद पवार और तेजस्वी यादव ने भी S.I.R. के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़ने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि यह केवल विपक्ष का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के हर नागरिक की आजादी का सवाल है।
विपक्ष का आरोप है कि S.I.R. के तहत जांच एजेंसियों को बिना पर्याप्त सबूत के भी गिरफ्तारी और लंबी पूछताछ का अधिकार दिया गया है, जिससे सत्ता पक्ष के लिए इसका दुरुपयोग आसान हो गया है। उनका कहना है कि यह कानून न्यायिक प्रक्रिया और मानवाधिकारों के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।

वहीं, केंद्र सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि S.I.R. का उद्देश्य केवल गंभीर अपराधों की जांच को तेज और प्रभावी बनाना है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जो लोग निर्दोष हैं, उन्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है।
दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए इस प्रदर्शन में भारी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। यहां “S.I.R. वापस लो” और “लोकतंत्र बचाओ” के नारे लगातार गूंजते रहे। विपक्ष ने साफ चेतावनी दी कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो आंदोलन को देशभर में फैलाया जाएगा।






