भोपालः आज मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के किसानों के हित में महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील निर्णय लिया गया। कृषक कल्याण वर्ष के संकल्प को चरितार्थ करते हुए मंत्रिपरिषद ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भूमि अर्जन में लागू गुणन कारक (Multiplication Factor) को 1.0 से बढ़ाकर 2.0 करने की ऐतिहासिक मंजूरी प्रदान की।

इस निर्णय से अब प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित होने वाली कृषि भूमि के लिये किसानों को बाजार मूल्य का अधिकतम 4 गुना तक मुआवजा प्राप्त हो सकेगा। यह निर्णय न केवल किसान कल्याण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि प्रदेश के लाखों किसान परिवारों की आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। इस निर्णय की पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा 7 नवम्बर 2025 को आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में दिए गए निर्देश शामिल हैं. जिससे उन्होंने प्रदेश की वृहद परियोजनाओं के लिए भू-अर्जन नीति की समीक्षा तथा अन्य राज्यों की सर्वोत्तम प्रक्रियाओं के अध्ययन के निर्देश दिए थे। उक्त निर्देशों के परिपालन में 13 जनवरी 2026 को एक उच्चस्तरीय मंत्रिमंडलीय समिति का गठन किया गया। समिति द्वारा 400 से अधिक हितबद्ध पक्षकारों, किसान संगठनों, सामाजिक संगठनों तथा क्रेडाई एवं फिक्की सहित विभिन्न संस्थाओं के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

प्रदेश के किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए समिति की अनुशंसा पर मंत्रिपरिषद ने ‘मध्यप्रदेश भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के अंतर्गत ‘मध्यप्रदेश भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार नियम, 2015’ के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के लिए गुणन कारक को 2.0 निर्धारित किया है। इससे प्रदेश के किसान अपनी भूमि का अधिक सम्मानजनक एवं यथोचित मुआवजा प्राप्त कर सकेंगे। मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित यह निर्णय 22 अप्रैल 2026 से प्रभावशील हो गया है। यह प्रावधान सभी भू-अर्जन परियोजनाओं पर लागू होगा। साथ ही, यह ताभ उन सभी लंबित प्रकरणों में भी दिया जाएगा, जिनमें अब तक अंतिम अवार्ड पारित नहीं किया गया है।
इस निर्णय का सकारात्मक प्रभाव सिंचाई परियोजनाओं, सड़कों, पुलों, रेलवे लाइनों एवं बांधों सहित विभिन्न अधोसंरचना परियोजनाओं पर पड़ेगा। पर्याप्त मुआवजा मिलने से भूमि देने वाले किसानों के जीवन स्तर में सुधार होगा, साथ ही विकास कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होंगी और परियोजनाओं को गति मिलेगी। अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप नगरीय क्षेत्रों में गुणन कारक 1.0 यथावत रहेगा। ‘कृषक कल्याण वर्ष में लिया गया यह पारदर्शी एवं जनहितैषी निर्णय प्रदेश के अन्नदाताओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें प्रदेश के विकास में सक्रिय सहभागी बनाएगा। यह निर्णय मध्यप्रदेश को देश में कृषि एवं किसान समृद्धि के मॉडल के रूप में और अधिक सुदृढ़ करेगा।