गोरखपुर । कैंसर का इलाज कराने वाले मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने कैंसर की कुछ दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण बढ़ाने का फैसला किया है। इससे संबंधित दवाओं के दाम 20 से 70 फीसदी तक कम होने की उम्मीद है। सरकार का अनुमान है कि इस कदम से मरीजों को सालाना करीब 2,500 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। वहीं, एम्स गोरखपुर के डॉक्टर शशांक का कहना है कि दवाओं की कीमतों में कमी से उन मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें कई महीनों तक कीमोथेरेपी करानी पड़ती है और इलाज पर अपनी जमा-पूंजी तक खर्च करनी पड़ती है।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज लंबे समय तक चलने के कारण मरीजों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। खासकर कीमोथेरेपी के दौरान इस्तेमाल होने वाली दवाओं का खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य यानी एमआरपी के 30 फीसदी तक सीमित करने की मंजूरी दी है। सरकार को उम्मीद है कि इससे संबंधित दवाओं की कीमतों में 20 से 70 फीसदी तक कमी आ सकती है। हालांकि, यह राहत सभी कैंसर की दवाओं पर समान रूप से लागू नहीं होगी।
14 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में दवाओं की कीमतों में संभावित कमी और आगे की प्रक्रिया की जानकारी दी है। संबंधित दवाओं की सूची तय करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की गई है। समिति की सिफारिशों के बाद राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण यानी एनपीपीए संबंधित दवाओं की कीमतों को लेकर आगे की कार्रवाई करेगा। ऐसे में मरीजों को वास्तविक राहत कब से मिलेगी, यह अंतिम सूची और संशोधित कीमतें लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

एम्स गोरखपुर के डॉक्टर शशांक ने बताया कि संस्थान में प्रतिदिन करीब 100 मरीज आते हैं, जिनमें से लगभग 40 से 50 फीसदी मरीज कीमोथेरेपी के लिए पहुंचते हैं। ऐसे मरीजों के लिए दवाओं की कीमतों में कमी बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। डॉक्टर का कहना है कि कई बार दवाओं के महंगे होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों पर इतना आर्थिक दबाव पड़ता है कि उन्हें इलाज के लिए घर और जमीन तक बेचनी पड़ती है। ऐसे में सरकार का यह कदम मरीजों को आर्थिक राहत देने की दिशा में सकारात्मक पहल है। साथ ही डॉक्टर शशांक ने यह भी कहा कि निमोनिया या सामान्य ऑपरेशन जैसी कई बीमारियों का इलाज सीमित अवधि में पूरा हो सकता है, लेकिन कैंसर के उपचार में कई महीनों तक दवाओं और कीमोथेरेपी की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में दवाओं की कीमतों में कमी का फायदा सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि पूरे इलाज के दौरान मिल सकता है। इससे मरीजों के परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।
सरकार की योजना में संबंधित ब्रांडेड और जेनेरिक, देश में निर्मित और आयातित कैंसर रोधी दवाओं को शामिल करने की बात कही गई है। लेकिन किन दवाओं की कीमत कितनी कम होगी, यह अंतिम सूची और अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगा। इसलिए मरीजों को दवा खरीदते समय उसकी एमआरपी और लागू संशोधित कीमत की जांच करनी चाहिए। गोरखपुर और पूर्वांचल के मरीजों को भी अब इस फैसले के लागू होने का इंतजार है। कैंसर की दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण का यह फैसला मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। खासकर उन मरीजों के लिए, जिन्हें लंबे समय तक कीमोथेरेपी करानी पड़ती है। अब देखना होगा कि सरकार की ओर से संबंधित दवाओं की सूची और नई कीमतें कब जारी होती हैं, ताकि गोरखपुर समेत पूरे पूर्वांचल के मरीजों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।