गोरखपुर : उत्तर प्रदेश में अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, चक्रवात और बाढ़ से प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा ऐलान किया है। गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश के 9 लाख 18 हजार 91 किसानों के बैंक खातों में करीब 493 करोड़ रुपये की कृषि निवेश अनुदान राशि भेजने की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की मार झेल रहे किसानों को राहत पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने फसल क्षति, मकान क्षति, पशुधन की हानि और आकाशीय बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं पर मिलने वाली आर्थिक सहायता का जिक्र किया। उन्होंने डिजिटल क्रॉप सर्वे और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के जरिए किसानों के खातों में सीधे पैसा पहुंचाने की बात कही। वहीं, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए मुआवजा वितरण में अनियमितताओं के आरोप लगाए। मुख्यमंत्री ने किसानों की कर्जमाफी, निजी नलकूपों को मुफ्त बिजली, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और धान समेत मोटे अनाज की सरकारी खरीद को लेकर भी सरकार की योजनाएं गिनाईं। साथ ही अधिकारियों को बाढ़ कटान रोकने, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और आपदा से पहले लोगों को सतर्क करने के निर्देशों का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, गोरखपुर के सांसद रवि किशन शुक्ला, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक विपिन सिंह, श्रीराम चौहान, फतेह बहादुर सिंह, प्रदीप शुक्ला, डॉ. बिम्बेश पासवान, महेंद्र पाल सिंह, श्रवण कुमार निषाद और राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी का अभिवादन किया। मुख्यमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारियों, प्रदेश के विभिन्न जनपदों में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल केंद्र और प्रदेश सरकार के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों तथा उपस्थित किसान बहनों और भाइयों का स्वागत किया।
अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और बाढ़ से फसलों को भारी नुकसान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, चक्रवात और बाढ़ के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। प्राकृतिक आपदाओं के चलते कई स्थानों पर जनहानि और पशुधन की हानि भी हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन की सरकार प्रभावित किसानों और नागरिकों को राहत पहुंचाने के लिए तत्काल कदम उठा रही है। सरकार का प्रयास है कि फसल क्षति, मकान क्षति और पशुधन की हानि के मामलों में आपदा राहत कोष से लगभग आठ से दस दिनों के भीतर सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में प्रदेश के 9 लाख 18 हजार 91 किसानों के बैंक खातों में करीब 493 करोड़ रुपये की कृषि निवेश अनुदान राशि भेजी जा रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अन्नदाता किसानों के जीवन में खुशहाली लाने और संकट के समय उन्हें सहारा देने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।

चालू वर्ष में आपदा प्रभावितों को करीब एक हजार करोड़ रुपये की सहायता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि चालू वर्ष में बरसात के दौरान अब तक प्रदेश के आपदा प्रभावित किसानों और नागरिकों को लगभग एक हजार करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि अतिवृष्टि, चक्रवात और बाढ़ के कारण जिन लोगों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत अलग से एक लाख 20 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। यह राशि फसल क्षति के मुआवजे से अलग होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदा में जनहानि होने पर संबंधित परिवार को चार लाख रुपये की सहायता 24 घंटे के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ या चक्रवात में जिन लोगों के आवास पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। वहीं, आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए नियमानुसार आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पशुधन की हानि होने पर पात्र प्रभावितों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
डिजिटल क्रॉप सर्वे और डीबीटी से सीधे किसानों के खातों में पहुंच रहा पैसा
मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल क्षति का आकलन डिजिटल क्रॉप सर्वे के आधार पर किया गया है। जिन जनपदों की सर्वे रिपोर्ट सरकार को प्राप्त हो गई थी, वहां प्रभावित किसानों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। मुख्यमंत्री के मुताबिक, करीब 493 करोड़ रुपये की सहायता राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा रही है। डिजिटल सर्वे और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के माध्यम से भुगतान होने से किसानों को उनकी सहायता राशि सीधे मिल रही है। उन्होंने पुरानी भुगतान प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब किसानों की सहायता राशि बीच में नहीं रुकती और बिचौलियों के लिए उसमें से हिस्सा निकालने की गुंजाइश नहीं रहती। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि संकट की घड़ी में किसान को राहत के लिए दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और निर्धारित सहायता समय पर उसके खाते में पहुंचे।
कांग्रेस पर हमला-100 रुपये में से 15 रुपये पहुंचने वाले बयान का किया जिक्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी के उस पुराने बयान का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि सरकार की ओर से भेजे गए 100 रुपये में से केवल 15 रुपये ही लाभार्थी तक पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती व्यवस्था में सरकारी धन का बड़ा हिस्सा बीच में ही गायब हो जाता था। उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों की फसल बर्बाद होने के बाद मुआवजा वितरण में भी अनियमितताएं होती थीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री की ओर से सहायता राशि जारी होने पर पैसा सीधे किसान के बैंक खाते में पहुंचता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस किसान के लिए 25 हजार रुपये की सहायता निर्धारित होती है, उसके खाते में सीधे पूरी सहायता राशि पहुंचती है। बीच में किसी बिचौलिए के लिए उस रकम में सेंध लगाने की गुंजाइश नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 493 करोड़ रुपये की सहायता आपदा प्रभावित किसानों को राहत देने के उद्देश्य से दी जा रही है और सरकार उनके साथ खड़ी है।
बाढ़ कटान रोकने और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ और अतिवृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्वास कार्यों को लेकर अधिकारियों को जरूरी निर्देश देने की बात कही।
उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में बाढ़ के कारण कटान हुआ है, वहां कटान रोकने के लिए तत्काल काम शुरू किया जाए। सिंचाई विभाग को इसके लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई गई है और जहां जरूरत हो, वहां धन का उपयोग करके प्रभावी कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अतिवृष्टि के कारण सड़कों को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे लोगों के आवागमन में परेशानी हो रही है। सड़कों की मरम्मत के लिए लोक निर्माण विभाग, नगर विकास विभाग, आवास विभाग और विकास प्राधिकरणों को पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई गई है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मौसम साफ होते ही मरम्मत का काम शुरू कराया जाए, ताकि लोगों को आने-जाने में किसी प्रकार की दिक्कत न हो।
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि आपदा से क्षतिग्रस्त सड़कों और अन्य सार्वजनिक व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी।
आकाशीय बिजली से बचाव के लिए अर्ली वॉर्निंग सिस्टम
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार केवल आपदा के बाद राहत देने तक सीमित नहीं है, बल्कि आपदा से पहले लोगों को सतर्क करने के लिए भी कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के कई जनपदों में आकाशीय बिजली और मौसम संबंधी घटनाओं की पूर्व चेतावनी देने के लिए अर्ली वॉर्निंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं। इस प्रणाली के माध्यम से संबंधित क्षेत्रों में आकाशीय बिजली गिरने की आशंका होने पर लोगों को मोबाइल फोन और एसएमएस के जरिए अलर्ट भेजा जाता है। लोगों को खुले आसमान के नीचे या पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने और सुरक्षित पक्के भवन में जाने की सलाह दी जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था से आकाशीय बिजली के कारण होने वाली जनहानि को रोकने में मदद मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई किसान, बटाईदार या उनके परिवार का सदस्य आकाशीय बिजली अथवा अन्य दुर्घटना की चपेट में आता है और योजना के अंतर्गत पात्र है, तो मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत पांच लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। मुख्यमंत्री ने पात्र परिवारों को निर्धारित समय के भीतर सहायता उपलब्ध कराने की बात कही।
हुदहुद चक्रवात के मुआवजे को लेकर कांग्रेस और सपा पर गंभीर आरोप
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2014 में आए हुदहुद चक्रवात का उल्लेख करते हुए पूर्ववर्ती सरकारों पर किसानों के मुआवजे में अनियमितता के आरोप लगाए। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उस समय भारत सरकार की ओर से 3,200 करोड़ रुपये भेजे गए थे, लेकिन किसानों को केवल 800 करोड़ रुपये ही मिल पाए। उन्होंने शेष धनराशि के वितरण को लेकर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के पैसे का दुरुपयोग करने वालों को जनता ने सबक सिखाया। उन्होंने विपक्षी दलों पर जाति के नाम पर समाज को बांटने और किसानों को उनका हक देने के मामले में पीछे रहने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, हुदहुद चक्रवात से प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा नहीं मिल पाया था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद इस मामले की जांच कराई गई। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में दावा किया कि जांच में पता चला कि प्रभावित किसानों को पूरी सहायता नहीं मिली थी। इसके बाद अलग से धनराशि की व्यवस्था करके किसानों को सहायता उपलब्ध कराई गई। उन्होंने इस उदाहरण के जरिए कहा कि वर्तमान सरकार आपदा प्रभावित किसानों तक जल्द से जल्द राहत पहुंचाने का प्रयास कर रही है।
रेन गेज और पूर्व चेतावनी प्रणाली से आपदा प्रबंधन को मजबूती
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में अर्ली वॉर्निंग सिस्टम के साथ बारिश की मात्रा मापने के लिए रेन गेज भी लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन उपकरणों से बारिश की स्थिति का आकलन करने और प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी। सरकार का उद्देश्य केवल आपदा के बाद मुआवजा देना नहीं, बल्कि पहले से तैयारी करके जनहानि और फसल क्षति को कम करना भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार आपदा प्रभावित किसानों और नागरिकों को हर संभव राहत देने के लिए प्रतिबद्ध है। आपदा प्रबंधन की व्यवस्था को मजबूत करके लोगों की सुरक्षा और नुकसान को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
पहले भी किसानों को फसल क्षति के लिए जारी की गई सहायता राशि
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मौजूदा सहायता राशि जारी करने से पहले भी बाढ़, चक्रवात और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को आर्थिक मदद दी गई है। उन्होंने बताया कि फसल क्षति के लिए पहले भी लगभग 170 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। मुख्यमंत्री के अनुसार, एक लाख 29 हजार 326 किसानों को करीब 78 करोड़ 75 लाख रुपये की फसल क्षति सहायता दी जा चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं में जनहानि, पशुहानि और मकान क्षति के मामलों में प्रभावित परिवारों को लगभग 220 करोड़ 93 लाख रुपये की सहायता वितरित की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि अन्नदाता किसान को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े और आपदा के समय उसे आर्थिक सहारा मिले।
गोरखपुर के किसानों के खातों में भेजी गई सहायता राशि
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने गोरखपुर के विभिन्न क्षेत्रों के किसानों को मिलने वाली सहायता राशि का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कुछ किसानों को प्रतीकात्मक डमी चेक दिए गए, जबकि वास्तविक सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी गई।मुख्यमंत्री द्वारा बताए गए लाभार्थियों और सहायता राशि का विवरण इस प्रकार है।कैंपियरगंज के बिरहीची को 25 हजार 670 रुपये 67 पैसे, बैचन प्रसाद को 22 हजार 951 रुपये, जोखन को 22 हजार 841 रुपये, संपद को 22 हजार 372 रुपये और परमहंस को 22 हजार 219 रुपये की सहायता राशि दी गई। सदर तहसील के चंद्रप्रकाश द्विवेदी को 11 हजार 811 रुपये और धरणीधर को 11 हजार 808 रुपये दिए गए। वहीं, गोला क्षेत्र के गिरिजापति त्रिपाठी को 34 हजार रुपये, कमलेश को 26 हजार 520 रुपये, रामदरश को 27 हजार 914 रुपये, जनार्दन प्रसाद को 24 हजार 660 रुपये 33 पैसे और राणा प्रताप सिंह को 22 हजार 350 रुपये की सहायता राशि दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को उनकी फसल क्षति के आकलन के आधार पर मुआवजा दिया जा रहा है।उन्होंने समाजवादी पार्टी की पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले किसानों को या तो मुआवजा नहीं मिलता था या बहुत कम राशि मिलती थी। उन्होंने अपने संबोधन में दो रुपये, चार रुपये और पंद्रह रुपये जैसी छोटी रकम का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार के एजेंडे में अन्नदाता किसान, युवा, महिलाएं और गरीब शामिल हैं। सरकार का प्रयास है कि इन सभी वर्गों के हितों की रक्षा की जाए और संकट के समय उन्हें सहायता उपलब्ध कराई जाए।
86 लाख किसानों की 36 हजार करोड़ रुपये की कर्जमाफी का जिक्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में सरकार बनने के बाद किसानों को राहत देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। उन्होंने बताया कि सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों की कर्जमाफी से अपनी यात्रा शुरू की थी। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश के 86 लाख किसानों के लगभग 36 हजार करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए गए। मुख्यमंत्री ने बिजली व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार के समय किसानों को बिजली नहीं मिलती थी, लेकिन बिजली का बिल आता था। उन्होंने कहा कि अब किसानों को बिजली उपलब्ध कराने और उनकी कृषि लागत कम करने पर जोर दिया जा रहा है।
निजी नलकूपों को मुफ्त बिजली, 22 लाख हेक्टेयर भूमि को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा
मुख्यमंत्री ने किसानों को सिंचाई के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का जिक्र करते हुए कहा कि निजी नलकूपों को मुफ्त बिजली देने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि सरकारी नलकूपों से पहले से ही मुफ्त सिंचाई की सुविधा मिलती थी, लेकिन अब निजी ट्यूबवेल वाले किसानों को भी मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में नहरों का जाल बिछाया गया है और सिंचाई की नई व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। अब तक लगभग 22 लाख हेक्टेयर भूमि को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है। उन्होंने बताया कि नए नलकूप लगाए जा रहे हैं और किसानों को सिंचाई के लिए जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि उनकी उत्पादन क्षमता बढ़े और खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और कृषि क्षेत्र में सुविधाओं का विस्तार करने के लिए लगातार काम कर रही है।
अतिवृष्टि प्रभावित जिलों में 15 अक्टूबर से शुरू होंगे धान खरीद केंद्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धान और मोटे अनाज की सरकारी खरीद को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जिन जनपदों में बारिश नहीं हुई थी, वहां सरकारी क्रय केंद्र शुरू किए जा रहे हैं। वहीं, अतिवृष्टि के कारण जिन जनपदों में बड़े पैमाने पर पानी भर गया है, वहां 15 अक्टूबर से धान खरीद केंद्र शुरू करने की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि धान के साथ ज्वार, बाजरा और मक्का जैसे मोटे अनाज की खरीद के लिए भी क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य उपलब्ध कराना है, ताकि प्राकृतिक आपदा से नुकसान झेलने वाले किसानों को आर्थिक राहत मिल सके।
किसान कहीं भी बेच सकेंगे अपनी उपज, भुगतान सीधे बैंक खाते में
मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की कि वे अपनी धान की उपज सरकारी खरीद केंद्रों और मंडियों में उपलब्ध कराएं, ताकि उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उचित मूल्य मिल सके। उन्होंने कहा कि किसानों को भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की उपज खरीदने के लिए ऐसी सीमा या बाध्यता नहीं होनी चाहिए, जिससे उन्हें अपनी फसल बेचने में परेशानी का सामना करना पड़े। उन्होंने कहा कि किसान जहां अपनी उपज का अच्छा मूल्य प्राप्त कर सके, वहां बेच सकता है। यदि कोई उसकी उपज नहीं खरीदेगा, तो सरकार खरीद करेगी और भुगतान सीधे उसके बैंक खाते में भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।
चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देकर किसानों को सम्मानित करने का उल्लेख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अन्नदाता किसान खुशहाल होगा, तभी देश खुशहाल होगा। किसान समृद्ध होगा, तभी देश की समृद्धि का रास्ता मजबूत होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्व प्रधानमंत्री और किसान नेता चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देकर अन्नदाता किसानों को सम्मानित करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में इस अभियान की शुरुआत करने का अवसर मिला है, लेकिन किसानों के लिए राहत और सुविधाओं से जुड़े ये प्रयास पूरे प्रदेश में किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा करने और उन्हें हर परिस्थिति में सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।
आपदा में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति मुख्यमंत्री ने जताई संवेदना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में प्राकृतिक आपदा के कारण अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने इस आपदा में अपने सदस्यों को खोया है, उनके प्रति उनकी व्यक्तिगत संवेदना के साथ-साथ प्रदेश सरकार की भी संवेदना है। मुख्यमंत्री ने आपदा में नुकसान उठाने वाले सभी लोगों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा कि मुआवजा वितरण के माध्यम से वह प्रभावित किसानों और परिवारों को यह भरोसा दिलाने आए हैं कि डबल इंजन की भारतीय जनता पार्टी की सरकार उनके हर सुख-दुख में साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार प्रभावित लोगों को हर प्रकार का सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। फसल क्षति से लेकर मकान, पशुधन और जनहानि तक, पात्र प्रभावितों को नियमानुसार सहायता पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सभी उपस्थित लोगों के प्रति मंगलकामनाएं व्यक्त किया।
रिपोर्ट : अंकित श्रीवास्तव