नई दिल्ली : अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ गंदी नजर से देखते थे, और बार-बार शरीर छूने की कोशिश करते थे। ये दृश्य है उस अस्पताल का जहां कोरोना मरीजों को भर्ती कराया गया है। एक तरफ जहां परिजन अपने सदस्य की जान बचाने के लिए अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों से गुहार लगा रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ अस्पताल स्टाफ और डॉक्टर मरीज के साथ आये महिलाओं पर गंदी नजर डाल रहे है। और घात लगाये बैठे हुए है। इस दौरान अगर ये कुछ मरीजे के साथ आएं महिलाओं के साथ कुछ ऐसी हरकत भी करते हैं तो मरीज ये सब देखकर भी मन मसोसकर रह जाता है और खुद को कोसता है।
ये दृश्य है पटना के एक निजी अस्पताल का। जहां से ये शर्मसार करने वाली घटना सामने आई। ऐसी ही एक कहानी है रुचि और रौशन की। रुचि 26 दिन तक अपने पति रौशन के लिए अस्पताल के कुप्रबंधन से लड़ती रही लेकिन फिर भी अपने पति को बचा न सकी। इस दौरान अस्पताल के स्टाफ ने उससे छेड़खानी भी की। पैसे को लेकर शोषण हुआ सो अलग, इन सब बातों को याद करके रुचि का रोना नहीं रुकता। रुचि ने जो झेला वो भयावह है। उसने अपने पति की आंखों में ऑक्सीजन खत्म हो जाने का भय देखा।

पटना के इस निजी अस्पताल ने अपने यहां भर्ती मरीजों के लिए ही ब्लैक में ऑक्सीजन बेचा और रुचि ने अपने पति के जीवन को बचाने के लिये खरीदा भी, लेकिन वह अपने पति को बचा नहीं सकी। रुचि ने बताया कि, एक बार उसके पति कोरोना से बच भी सकते थें लेकिन हॉस्पिटल की लापरवाही से जान जाना तय है। रुचि अपने पति के साथ होली में परिवार वालों से मिलने भागलपुर आई थी।
9 अप्रैल को पति रौशन को सर्दी बुखार हुआ। इलाज के लिये एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। रुचि देखभाल के लिये किसी तरह वहां मौजूद रहती थी। उसी दौरान अस्पताल के एक कर्मचारी ज्योति कुमार ने उसके साथ छेड़खानी की, जिसे बीमार पति ने भी देखा. लेकिन लाचार पति कुछ न कर सका।
डॉक्टरों द्वारा ठीक से देखभाल न करने की वजह से रुचि ने अपने पति को मायागंज अस्पताल में भर्ती कराया। वहां के हालात और बुरे थे। ICU में एक के बाद एक लोग मरते जा रहे थे, कोई किसी की नहीं सुन रहा था। रुचि ने बताया कि एक आदमी, डॉक्टर-डॉक्टर चिल्लाते-चिल्लाते बेड से गिर गया, उसका माथा फट गया। चारों तरफ खून बिखर गया।
इसके बावजूद डॉक्टरों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। आरोप लगा कि डॉक्टर और नर्स अपने कमरे में लाइट ऑफ कर मोबाइल पर पिक्चर देखते रहते थे, लेकिन कोई मरीज को देखने नहीं जाता था।
रुचि की बड़ी बहन ऋचा सिंह का आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ गंदी नजर से देखते थे। और बार-बार शरीर छूने की कोशिश करते थे। जब मायागंज अस्पताल में हालत खराब हुई, तो एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाने की कोशिश भी की, लेकिन एयर एंबुलेंस समय पर नहीं मिलने के कारण पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया।
आरोप है कि यहां भी गिद्ध की तरह मरीजों को लूटा गया। यहां तक कि अस्पताल ने ऑक्सीजन की कमी की बात कर अपने ही अस्पताल के ऑक्सीजन सिलेंडर को 50-50 हजार में बेचा।
रुचि का आरोप है कि रौशन की मौत कोरोना से कम अस्पताल की कुव्यवस्था और ऑक्सीजन खत्म होने के भय की वजह से हुई। रुचि और रौशन पांच साल पहले ही शादी के बंधन में बंधे थे। रौशन को याद कर रुचि के आंसू नहीं थम रहे। 26 दिनों तक वो अपने पति के साथ लगातार अस्पताल में ही रही लेकिन वह अपने पति को न बचा सकी।
आपको बता दें कि रौशन और रुचि नोएडा में रहते थे। रौशन सॉफ्टवेयर इंजीनियर था, मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छा पैकेज पर था। लेकिन पैसा रहने के बावजूद रौशन को मौत से पहले काफी दुर्गति झेलनी पड़ी।