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कभी 11 तो कभी 12 बजे सोते हैं? बिगड़ा स्लीप टाइम टेबल बन सकता है बीमारी की वजह

आधुनिक जीवनशैली में काम का दबाव, देर रात तक मोबाइल या स्क्रीन स्क्रॉल करना और अनियमित दिनचर्या लोगों की नींद का टाइम टेबल बिगाड़ रही है।

By: Abhinav Tiwari 
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कभी 11 तो कभी 12 बजे सोते हैं? बिगड़ा स्लीप टाइम टेबल बन सकता है बीमारी की वजह

स्वस्थ रहने के लिए डॉक्टर रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद लेने की सलाह देते हैं, लेकिन हालिया स्टडी बताती है कि केवल नींद की अवधि ही नहीं, बल्कि हर दिन एक तय समय पर सोना भी उतना ही जरूरी है। अगर आप रोज अलग-अलग समय पर सोते हैं-कभी 11 बजे, कभी 12 या उससे भी देर से-तो यह आदत धीरे-धीरे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है।

बिगड़ा स्लीप पैटर्न क्यों बन रहा है समस्या

आधुनिक जीवनशैली में काम का दबाव, देर रात तक मोबाइल या स्क्रीन स्क्रॉल करना और अनियमित दिनचर्या लोगों की नींद का टाइम टेबल बिगाड़ रही है। कभी-कभार देर से सोना नुकसानदेह नहीं, लेकिन लंबे समय तक अनियमित समय पर सोना शरीर के लिए हानिकारक साबित होता है।

स्टडी क्या कहती है

साइंस जर्नल हेल्थ डेटा साइंस में प्रकाशित एक स्टडी में 88,461 लोगों के नींद पैटर्न को वियरेबल डिवाइस की मदद से ट्रैक किया गया। नतीजों में सामने आया कि जो लोग रोज अलग-अलग समय पर सोते हैं या देर रात तक जागते रहते हैं, उनमें कई बीमारियों का जोखिम ज्यादा पाया गया। इसके अलावा नेचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में एआई मॉडल के जरिए 65 हजार से अधिक लोगों के स्लीप डेटा (पॉलीसोमनोग्राफी) का विश्लेषण किया गया। इस मॉडल ने नींद की गड़बड़ी से 130 से अधिक बीमारियों के बढ़ते खतरे की पहचान की।

किन बीमारियों का खतरा बढ़ता है

नींद शरीर के लिए एक प्राकृतिक और जरूरी प्रक्रिया है। खराब या अनियमित नींद से मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, डायबिटीज, डिमेंशिया जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। साथ ही इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ता है, जिससे बार-बार संक्रमण होने की संभावना रहती है।

कितनी नींद है जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार औसतन एक वयस्क व्यक्ति के लिए 7 से 9 घंटे की नींद जरूरी है। बच्चों और किशोरों में यह अवधि थोड़ी ज्यादा हो सकती है। केवल पर्याप्त नींद ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण नींद भी जरूरी है-यानी रात में बार-बार नींद न टूटे और कोई व्यवधान न हो।

बायोलॉजिकल क्लॉक पर पड़ता है असर

शरीर के भीतर एक बायोलॉजिकल क्लॉक होती है, जिसे सर्कैडियन रिदम कहा जाता है। अनियमित समय पर सोने से यह रिदम बिगड़ जाती है, जिसका असर हार्मोन पर पड़ता है। थायराइड, कॉर्टिसोल और ग्रोथ हार्मोन जैसे हार्मोन असंतुलित हो सकते हैं, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं जन्म लेती हैं।

भूख और मूड पर भी पड़ता है असर

खराब नींद से भूख से जुड़े हार्मोन (घ्रेलिन और लेप्टिन) असंतुलित हो जाते हैं, जिससे जंक फूड और ज्यादा कैलोरी खाने की इच्छा बढ़ती है। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस और डायबिटीज का खतरा भी बढ़ता है। साथ ही डिप्रेशन, एंग्जायटी, चिड़चिड़ापन और याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

नींद का पैटर्न कैसे सुधारें

नींद को बेहतर बनाने के लिए रोजाना एक ही समय पर बिस्तर पर जाने की आदत डालें। शाम के समय चाय-कॉफी से बचें, क्योंकि कैफीन नींद में बाधा डालता है। हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें, सोने से पहले गुनगुने पानी से स्नान करें और स्क्रीन टाइम कम करें। ये छोटे-छोटे बदलाव आपकी नींद की क्वालिटी और सेहत-दोनों को बेहतर बना सकते हैं।

किसी भी प्रकार की समस्या होने पर या जीवनशैली अपनाने पर सबसे पहले अपने डॉक्टर से संपर्क करें…

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