अंधभक्त तो देश में महामारी फैलने की बात कर मोदी सरकार को क्लीन चिट दे रहे हैं, क्या वे यह भी संमझ रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उनके मंत्रियों, किसी सांसद, विधायक का कोई खर्च कम हुआ था।
क्या किसी पूंजीपति की किसी अय्याशी में कोई कमी हुई थी। मरा तो आम आदमी ना। कुछ लोग नौकरी जाने से तनाव में मरे तो कुछ भुखमरी से। कुछ कोरोना से मरे तो कुछ लॉकडाउन में पैदा हुई गंभीर बीमारी से।
जो लोग कोरोना को महामारी बता रहे हैं वे यह भी समझें कि कोरोना विदेश से आया है न कि किसी गरीब के घर से। 30 जनवरी को हमारे देश में कोरोना का पहला केस आ गया था। उसके बाद यदि कोरोना को रोकने के कारगर प्रयास नहीं हुए तो इसके लिए मोदी सरकार जिम्मेदार है।
#HowdyModi ना होता तो इतना कोरोना भी भारत में नहीं फैलता। https://t.co/eYXcudMsb5
— digvijaya singh (@digvijaya_28) October 23, 2020
यदि सरकार कोरोना को रोकने के प्रति गंभीर होती तो गुजरात में अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कार्यक्रम नमस्ते ट्रंप (Namaste Trump) न होता। दिल्ली में तब्लीगी जमात का कार्यक्रम न होता। ताली और थाली बजवाने के बजाय कोरोना को रोकने के कारगर प्रयास होते।
हां मोदी सरकार ने दूसरे देशों से तुलना कर अपने भोंपू मीडिया से यह जरूर कहलवाना शुरू जरूर कर दिया कि मोदी ने लोगों को बचा लिया। आज की तारीख में भारत कोरोना संक्रमण मामले नम्बर एक बनने जा रहा है।
कोई चैनल या फिर अखबार यह बोलने या फिर लिखने का साहस नहीं कर पा रहा है कि मोदी ने लोगों को मरवा दिया। हर क्षेत्र में काम धंधे ठप्प हो गए हैं। और मोदी सरकार है कि इस संकट के समय में गरीबों की मदद करने के बजाय मारने पर उतारू है।
यह भलीभांति संमझ लें कि यह व्यक्ति गरीबों का सबसे बड़ा दुश्मन है। इनके दोस्त अडानी और अम्बानी जैसे लोग हैं। जाति और धर्म के नाम पर कब तक बंटोगे। अपने बच्चों की जान और भविष्य के बारे में सोचो। न नौकरी, न धंधा, न सुरक्षा, न पेंशन, न स्वास्थ। यह स्थिति हो गई है लोगों की।