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बेटियां असुरक्षित, दहेज और घरेलू हिंसा के मामलों ने तोड़े रिकॉर्ड, जीतू पटवारी ने मोहन सरकार पर साधा निशाना

मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एनसीआरबी 2024 के आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि दहेज हत्या और घरेलू हिंसा के बढ़ते मामले सरकार के दावों की पोल खोलते हैं।

By: BS Yadav 
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बेटियां असुरक्षित, दहेज और घरेलू हिंसा के मामलों ने तोड़े रिकॉर्ड, जीतू पटवारी ने मोहन सरकार पर साधा निशाना

भोपाल: मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि एनसीआरबी 2024 के आंकड़े प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा संबंधी सरकारी दावों की वास्तविकता सामने लाते हैं। पटवारी के अनुसार, राज्य में दहेज हत्या और घरेलू हिंसा के मामलों की संख्या चिंताजनक है, जो यह दर्शाती है कि महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में सरकार अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी है।

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पटवारी ने कहा कि एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में दहेज हत्या के 450 मामले और घरेलू हिंसा के 7514 मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने इन आंकड़ों को गंभीर बताते हुए कहा कि सरकार एक ओर महिला सम्मान और महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावे करती है, जबकि दूसरी ओर प्रदेश की महिलाएं और बेटियां लगातार अपराधों का सामना कर रही हैं।

उन्होंने विशेष रूप से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की स्थिति को चिंताजनक बताया। उनके अनुसार, मुरैना जिले में दहेज हत्या के 25 मामले दर्ज हुए हैं, जबकि ग्वालियर में घरेलू हिंसा के 582 मामले सामने आए हैं। पटवारी ने कहा कि ये आंकड़े प्रशासनिक व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करते हैं और यह दर्शाते हैं कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और अधिक ठोस प्रयासों की आवश्यकता है।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से कई सवाल पूछते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर है तो प्रदेश में दहेज हत्या और घरेलू हिंसा जैसी घटनाओं में कमी क्यों नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि समाज में आज भी दहेज प्रथा एक बड़ी समस्या बनी हुई है और कई परिवार आर्थिक एवं सामाजिक दबावों का सामना करने को मजबूर हैं।

पटवारी ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार की प्राथमिकताएं जनसमस्याओं के समाधान से अधिक प्रचार और आयोजन तक सीमित होती जा रही हैं। उनका कहना है कि यदि महिलाओं की सुरक्षा पर प्रभावी कार्रवाई होती तो अपराधों के आंकड़ों में गिरावट दिखाई देती। उन्होंने यह भी कहा कि कई मामलों में पीड़ित महिलाओं को न्याय पाने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

कांग्रेस नेता ने मांग की कि प्रदेश में दहेज हत्या और घरेलू हिंसा से जुड़े सभी मामलों की विशेष समीक्षा की जाए, दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और महिला सुरक्षा के लिए जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इस मुद्दे पर सरकार को जनता के सामने जवाब देना चाहिए।

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