मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित भारत भवन में सात दिवसीय ‘जल समागम’ का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में देशभर से आए जल संरक्षण विशेषज्ञ, पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता जल संकट से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
इसी दौरान भोपाल के समाजसेवी सुरेश साहू ने शहर की पहचान माने जाने वाले बड़े तालाब (भोजताल) की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कभी जीवन रेखा रहे इस तालाब पर आज गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 1955-60 के डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण तेजी से बढ़ा है। इसके साथ ही आसपास की कॉलोनियों का गंदा पानी सीधे तालाब में मिल रहा है, जिससे इसका जल स्तर और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि पुराने रिकॉर्ड के आधार पर बड़े तालाब का पुनः सीमांकन किया जाए और सीवेज के प्रवाह को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। लोगों का मानना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में गंभीर जल संकट उत्पन्न हो सकता है।
अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है कि वह इस महत्वपूर्ण जल स्रोत को बचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है और तालाब के संरक्षण को लेकर क्या रणनीति अपनाई जाती है।