कुछ दिनों पहले क्लिनिकल इंफेक्सियस डिसीज जर्नल में एक आलेख छपा जिसमें 32 देशों के 239 वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि कोरोना वायरस के अणु हवा में तैरते हैं।
आगे लिखा गया था कि किसी इंसान के सांस लेने पर वो उसके शरीर में चले जाते हैं। वैज्ञानिकों ने दावा किया कि ऐसे कई मामले देखे गए हैं।
इस मामले पर पहले तो विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चुप्पी साधी रही लेकिन अब देर से WHO ने ये स्वीकार किया है कि कोरोना वायरस संक्रमण के हवा में फैलने के सबूत हैं लेकिन साथ ही ये भी कहा गया है कि ये निर्णायक नहीं है।
वैज्ञानिक जोस जिमेनज का कहना है कि इससे लोगों के बीच भय का माहौल पैदा हो जाएगा, अगर हवा में संक्रमण के बारे में लोगों ने सुना तो स्वास्थ्य कर्मचारी अस्पताल आना बंद कर देंगे या फिर लोग एन95 को खरीदना शुरू कर देंगे।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के कोविड-19 की तकनीकी टीम का नेतृत्व कर रही मारिया वैन का कहना है कि कोरोना वायरस के हवा के जरिए संक्रमण फैलने को लेकर बातचीत लगातार जारी है।