नई दिल्ली : सावन का पावन महीने के शुरूआत के साथ ही पूरी धरती भोले मय हो जाते है। चारों तरफ से बम-बम भोले का जयकारा गूंजता है। हालांकि कोरोना काल के कारण पिछले साल मंदिरों में कम रौनक देखने को मिला। वहीं कई राज्य सरकारों ने इस साल भी कोरोना के कारण निकलने वाले कांवड़ यात्रा पर रोक लगा दी है। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा को मंजूरी दे दी है।

सीएम योगी ने अफसरों को निर्देश दिया है कि वह पड़ोसी राज्यों, बिहार और उत्तराखंड सरकार से बातचीत करके जल्द से जल्द गाइडलाइन जारी करें।
विशेष इंतजाम करने का आदेश दिया
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिव भक्तों के लिए विशेष इंतजाम करने का आदेश दिया है। सरकार हर साल कांवड़ियों के लिए जगह-जगह पानी, आराम की सुविधा की व्यवस्था कराती है। इसके अलावा कई जिलों में कांवड़ियों के स्वागत में हेलीकाप्टर से पुष्प वर्षा भी की जाती है।
उत्तराखंड सरकार ने लगाई है रोक
कोविड 19 संक्रमण के चलते उत्तराखंड सरकार ने इस साल भी कांवड यात्रा पर रोक लगाने का ऐलान कर दिया है। सरकार ने तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए कांवड़ यात्रा को प्रतिबंधित कर दिया है। पिछले ही दिनों उत्तराखंड के मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने इसका आदेश जारी कर दिया है। उत्तराखंड में हाल ही में हुए कुंभ मेले को लेकर काफी विवाद हुआ था। इसी से सबक लेते हुए सरकार ने कांवड़ यात्रा पर एहतियातन रोक लगा दी है।
लाखों श्रद्धालु निकलते हैं
कांवड़ यात्रा के दौरान भगवान शिव के भक्त उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, दिल्ली, राजस्थान और देश के कई अन्य राज्यों से कांवड़ लेकर हरिद्वार पहुंचते हैं और फिर हरिद्वार, काशी, प्रयागराज से कांवड़ भरकर वापस अपने घरों की तरफ निकलते हैं। अधिकतर श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हैं।
बता दें कि ऐसा कहा जाता है कि इस पावन महीने में जो भी भक्त भक्तिभाव से भोलेनाथ की तपस्या करता है या व्रत करता है, भगवान भोलेनाथ उसकी हर मुराद पूरी करते है।