लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में प्रचार के अंतिम दिन रविवार को सागर संसदीय सीट से भाजपा प्रत्याशी लता वानखेड़े के पक्ष में प्रचार करने राहतगढ़ पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चुनावी सभा के मंच से राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जब से राहुल गांधी को लांच किया है, तभी से इनकी सरकारें चली गईं।
उन्होंने कहा कि वे अपनी नादानियों की वजह से पार्टी की फजीहत कराते हैं। नादान की दोस्ती, जी का जंजाल… यह मुहावरा राहुल के लिए बनाया गया है। इनको खुद को नहीं पता कि ये क्या करने वाले है ?
इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेई ने गांव-गांव, प्रधानमंत्री सड़क देने का काम किया है। कांग्रेस के लोग उस समय कह रहे थे, गांव में सड़क की क्या जरूरत है ? वहां बैलगाड़ी चलती है, उनको बैलगाड़ी का सिस्टम मालूम नहीं है। उन्होंने गांव देखा नहीं है। वो आज भी आलू से सोना निकालने की मशीन ढूंढते हैं।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि आलू से सोना केवल पप्पू बना सकता है। और किसी को मालूम नहीं… इसी नादानियों के कारण से वो अपनी और पार्टी की फजीहत कराते हैं। हमारे यहां मुहावरा है – नादान की दोस्ती, जी का जंजाल। जब से राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी आ गए हैं, तब से हमारी पार्टी रोज बढ़ती जा रही है। ये मुहावरा राहुल गांधी के लिए बनाया है। इनको खुद को नहीं मालूम कि ये क्या करने वाले है ?
राहुल को लॉन्च करते ही गई सत्ता
जब से राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी आए हैं तब से पता चल गया। ये राहुल गांधी के लिए ही बना है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 2004 से 2014 तक कांग्रेस की सरकार अच्छी-खासी चल रही थी। लेकिन राहुल गांधी को लॉन्च करते ही इनकी सरकार चली गई और 115 सांसद रह गए। 2019 में राहुल गांधी को फिर से लॉन्च किया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बना दिया गया लेकिन इनकी 115 सीटों में से सिर्फ 52 रह गईं। इतना ही नहीं उन्हें पद से इस्तीफा तक देना पड़ा।
कांग्रेसियों में इतनी हिम्मत नहीं कि मंच से भगवान का नाम ले सकें
सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस में इतनी हिम्मत नहीं है कि उनके नेता मंच से भगवान श्रीराम और भगवान कृष्ण की जय बोल सके। वे जनता के बीच जाते हैं। मंच से बोलते हैं, लेकिन भगवान का नाम नहीं लेंगे। इनकी मानसिकता ऐसी है कि वे महिलाओं की सरेआम इज्जत उतारते हैं। कभी टंच माल बोलते हैं तो कोई रस तलाशता है। सीएम ने मंच से हुंकार भरी कि दलित बेटियों और महिलाओं का अपमान करने वालों का आस्तित्व खत्म हो जाएगा।
सीएम सागर आए और कांग्रेस को तगड़ा झटका दे गए
सीएम मोहन यादव सागर लोकसभा के राहतगढ़ में सभा करने आए थे और कांग्रेस को तगड़ा झटका देकर चले गए। सागर जिले के बीना की कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे को उन्होंने बीजेपी में शामिल करा लिया। इसके बाद सागर जिले की आठों विधानसभा सीटों पर भाजपा के विधायक काबिज हो गए हैं। विधायकों में देखें तो सागर जिला कांग्रेस मुक्त हो गया है।
रुक गया था विकास कार्य
इधर भाजपा में पहुंची बीना विधायक ने मीडिया को बताया कि जब से विधायक बनी हैं उनके क्षेत्र बीना का विकास अवरूध हो गया था। वे कोई काम नहीं करा पा रहीं थी, इसलिए अपने क्षेत्र के विकास के किए उन्होंने बीजेपी ज्वाइन की है। विधायक सप्रे के अनुसार न कांग्रेस की सरकार हैं और न उनके पास कोई विकास की योजना है। इसलिए उन्होंने कांग्रेस झोड़ दी है।
सागर लोकसभा इतिहास
सागर लोकसभा सीट मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड की सबसे अहम सीटों में से एक है। यह बीजेपी का गढ़ मानी जाती है और यहां पर 1996 के बाद से कोई और पार्टी ने जीत हासिल नहीं की है। प्रदेश की राजनीति में भी इस क्षेत्र से कई दिग्गज राजनेता शामिल रहे हैं। सागर लोकसभा सीट में भी आठ विधानसभाओं को शामिल किया गया है जिसमें बीना, खुरई, सुरखी, नरयावली और सागर के साथ-साथ विदिशा जिले की कुरवाई, सिरोंज और शमशाबाद शामिल है।
इस क्षेत्र में छोटी-बड़ी कई नदियां बहती हैं जिनमें बेतवा, धसान, बेबस, बीना, बामनेर, सुनार नदियां शामिल हैं। इन नदियों की वजह से इस क्षेत्र के कई गांवों को सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति होती है। अगर इस क्षेत्र में पर्यटन की बात की जाए तो यहां राहतगढ़ वॉटरफॉल बेहद खूबसूरत है, जो कि बीना नदी से बना है। वहीं महाभारत कालीन एरण यहां पर कई ऐतिहासिक धरोहरों को अपने अंदर समाए हुए है। खिमलासा का प्राचीन किला भी यहां पर दर्शनीय स्थल है।
इनके अलावा यहां पर गढ़पहरा पर बना हनुमान जी का मंदिर और रानगिर में बना माता हरसिद्धि का मंदिर पूरे क्षेत्र के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। यहीं पर नौरादेही वन्य जीव अभ्यारण्य भी है जो कि सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिले के त्रिभुज पर बना है. इनके अलावा सागर की लाख बंजारा झील भी इस क्षेत्र की पहचान है।
राजनीतिक ताना-बाना
सागर जिला बीजेपी के लिए एक सुरक्षित लोकसभा सीट मानी जाती है। इसके पीछे की वजह है कि 1996 के बाद से यहां पर किसी और पार्टी की दाल नहीं गली है। सिर्फ बीजेपी ने ही अपना कब्जा जमाया हुआ है। 2019 के चुनाव की बात की जाए तो यहां से बीजेपी ने राजबहादुर सिंह को मैदान में उतारा था जबकि कांग्रेस ने प्रभु सिंह ठाकुर को टिकट दिया था। इस चुनाव में बीजेपी को 646231 वोट मिले थे जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार को 340689 वोट मिले थे। बीजेपी के राजबहादुर सिंह ने कांग्रेस के प्रभु सिंह ठाकुर को करीब 3 लाख वोटों से करारी शिकस्त दी धी।
2019 का जनादेश
बीजेपी के राजबहादुर सिंह को 6,46,231 वोट मिले (जीते)
कांग्रेस के प्रभु सिंह ठाकुर को 3,40,689 वोट मिले
बसपा के राजकुमार यादव को 20,363 वोट मिले
2014 का जनादेश
2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लक्ष्मी नारायण यादव ने कांग्रेस के गोविंद सिंह राजपूत को हराया था। इस चुनाव में लक्ष्मी नारायण यादव को 4,82,580(54.11 फीसदी) वोट मिले थे तो वहीं गोविंद सिंह राजपूत को 3,61,843(40.57 फीसदी) वोट मिले थे। दोनों के बीच हार जीत का अंतर 120737 वोटों का था। इस चुनाव में बसपा 2.23 फीसदी वोटों के साथ तीसरे स्थान पर थी।
2019 के लोकसभा में मतदाताओं की संख्या
मुख्य मुद्दे:
विधानसभा क्षेत्र:
सागर लोकसभा सीट का इतिहास मध्य प्रदेश के सियासी बदलाव का साक्षी रहा है। शिक्षा के गढ़ रहे सागर में कभी भी एक पार्टी का कब्जा नहीं रहा। शुरुआती 15 साल तक कांग्रेस सागर से जीतती रही। 1967 में जनसंघ ने कांग्रेस से सीट छीन ली। 1971 में कांग्रेस ने फिर इस पर कब्जा किया। आपातकाल के बाद जनता पार्टी के लहर में सागर सीट कांग्रेस के हाथ से निकल गई। इसके बाद हर चुनाव में बदलाव का क्रम चलता रहा। 1996 में बीजेपी के वीरेंद्र खटीक की जीत के साथ ही यह सीट भी कांग्रेस के कब्जे से हमेशा के लिए निकल गई। इसके बाद सात चुनावों में लगातार बीजेपी सागर लोकसभा सीट से जीतती रही।
| वर्ष | विजेता | पार्टी |
| 1952 | खूबचंद सोदिया | कांग्रेस |
| 1957 | ज्वाला प्रसाद ज्योतिषी | कांग्रेस |
| 1962 | ज्वाला प्रसाद ज्योतिषी | कांग्रेस |
| 1967 | रामसिंह अयारवाल | जनसंघ |
| 1971 | सहोद्राबाई राय | कांग्रेस |
| 1977 | नर्मदा प्रसाद राय | जनता पार्टी |
| 1980 | सहोद्राबाई राय | कांग्रेस |
| 1984 | नंदलाल चौधरी | कांग्रेस |
| 1989 | शंकरलाल खटीक | बीजेपी |
| 1991 | आनंद अहिरवार | कांग्रेस |
| 1996 | वीरेंद्र खटीक | बीजेपी |
| 1998 | वीरेंद्र खटीक | बीजेपी |
| 1999 | वीरेंद्र खटीक | बीजेपी |
| 2004 | वीरेंद्र खटीक | बीजेपी |
| 2009 | भूपेंद्र सिंह | बीजेपी |
| 2014 | लक्ष्मी नारायण यादव | बीजेपी |
| 2019 | राजबहादुर सिंह | बीजेपी |