मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हरिद्वार में गंगा तट पर आयोजित भव्य संत समागम में सहभागिता की। यह आयोजन समन्वय ट्रस्ट द्वारा अनंतश्रीविभूषित परम गुरुदेव स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज के गुरुदेव समाधि मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा एवं सात दिव्य मूर्तियों की स्थापना के अवसर पर किया गया था। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री ने संत समाज को नमन करते हुए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना से जुड़े महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि वे महाकाल की नगरी उज्जैन से आते हैं और आध्यात्मिक आयोजनों में सहभागिता को अपना कर्तव्य मानते हैं। उन्होंने कहा कि हरिद्वार जैसी पुण्यभूमि पर संतों के सान्निध्य में आना आत्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।
मुख्यमंत्री ने ब्रह्मलीन सत्यमित्रानंद जी महाराज के जीवन-दर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने शंकराचार्य जैसे उच्च पद की गरिमा को समझते हुए भी सनातन संस्कृति के वैश्विक प्रचार-प्रसार के लिए परंपरागत सीमाओं से आगे बढ़कर कार्य किया। विदेश यात्राओं के माध्यम से उन्होंने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को विश्व पटल पर स्थापित किया।

डॉ. मोहन यादव ने वैचारिक रूप से स्पष्ट किया कि “हिंदुत्व ही राष्ट्र है” और प्रत्येक भारतीय को अपने सांस्कृतिक मूल्यों पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने हरिद्वार में स्थित भारत माता मंदिर की परिकल्पना और निर्माण का उल्लेख करते हुए इसे राष्ट्रीय चेतना और वैचारिक गौरव का प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि मध्य प्रदेश सरकार 2028 के सिंहस्थ कुंभ की तैयारियाँ बड़े स्तर पर कर रही है। उन्होंने संत समाज को इस ऐतिहासिक आयोजन में सहभागी बनने का आमंत्रण देते हुए कहा कि यह आयोजन सनातन संस्कृति की विराटता को प्रदर्शित करेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समन्वय ट्रस्ट, महाराज जी के उत्तराधिकारियों और संत समाज को आश्वस्त किया कि यदि वे मध्य प्रदेश में कोई भी नया सामाजिक, आध्यात्मिक या सांस्कृतिक प्रकल्प प्रारंभ करना चाहते हैं, तो राज्य सरकार उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी रहेगी।
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने “भारत माता की जय” के उद्घोष के साथ गुरुदेव स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की और संत समाज को शुभकामनाएँ दीं।