मध्य प्रदेश में तीसरे चरण की वोटिंग के लिए चुनाव प्रचार तेज है. शनिवार को उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भोपाल चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व खजुराहो सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने शनिवार को स्टेट हेंगर, भोपाल में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्वागत किया. सुबह 11 बजे अशोकनगर जिले के सुभाषगंज में जनसभा कर ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए वोट मांगेंगे. कुछ देर रुकने के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा के साथ अशोक नगर रवाना हुए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ.

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश में एक बार फिर से चुनावी मैदान में हैं. इस बार वह बीजेपी के टिकट पर अपनी परंपरागत सीट गुना से लड़ेंगे. इस सीट से पहले ही तीन बार सांसद और यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं. एक जनवरी 1971 को पैदा हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. माधव राव सिंधिया के बेटे हैं. माधवराव सिंधिया भी मध्यप्रदेश की गुना लोकसभा सीट से जीत कर संसद पहुंचते थे, लेकिन 30 सितम्बर 2001 को एक प्लेन दुर्घटना में उनका निधन हो गया.
उसके बाद से पिता की राजनीतिक विरासत को ज्योतिरादित्य सिंधिया आगे बढ़ा रहे हैं. ग्वालियर राजघराने में पैदा हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया का शुरू में राजनीति से कोई वास्ता नहीं था. हालांकि सितंबर 2001 में पिता के निधन के बाद वह 18 दिसंबर को वह कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए और पिता के निधन के बाद खाली हुई गुना लोकसभा सीट पर पहली बार फरवरी 2002 में चुनाव मैदान में उतरे. इस चुनाव में उन्होंने साढ़ 4 लाख वोटों से विजय हासिल की.
फिर वह साल 2004 में हुए लोकसभा चुनावों में उतरे और जीतकर केंद्र सरकार में मंत्री बने. उन्होंने 2009 में अपनी लगातार जीत का हैट्रिक लगाया और इस बार उन्हें वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री बनाया गया. ज्योतिरादित्य सिंधिया 2014 के लोकसभा चुनावों में भी कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे और मोदी लहर के बावजूद जीते, लेकिन 2019 के चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इसी दौरान मध्यप्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी हो गई और ज्योतिरादित्य अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस छोड़ कर 11 मार्च 2020 को बीजेपी में शामिल हो गए.
इससे मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिर गई और बीजेपी की सरकार बनी. इधर, बीजेपी में आने के बाद ज्योतिरादित्य को 2021 में हुए कैबिनेट विस्तार में मंत्री बनाया गया. तब से वह नागरिक उड्डयन मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. उन्हें मंत्री बनाए रखने के लिए बीजेपी ने राज्यसभा भेजा है. 2022 में केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह के राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास इस्पात मंत्रालय भी आ गया. ज्योतिरादित्य सिंधिया की शिक्षा दीक्षा ग्वालियर के ही कैंपियन स्कूल और फिर दून स्कूल से हुई.
फिर वह उच्च शिक्षा के लिए 1993 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी गए. 2001 में ज्योतिरादित्य ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए किया. ज्योतिरादित्य सिंधिया की मां माधवी राजे सिंधिया (किरण राज्य लक्ष्मी देवी) नेपाल के प्रधान मंत्री और कास्की और लमकुंग के महाराजा और गोरखा के सरदार रामकृष्ण कुंवर के पैतृक वंशज जुड्ढा शमशेर जंग बहादुर राणा की पोती है.
गुना लोकसभा सीट मध्य प्रदेश की राजनीति की उन धुरियों मे से एक हैं जहां से पूरे प्रदेश की राजनीति निर्धारित होती रही है. ग्वालियर राजघराने से संबंध रखने वाली ये लोकसभा सीट बेहद महत्वपूर्ण है. यहां से सिंधिया परिवार की तीन पीढ़िया चुनाव लड़ते आ रही हैं. यहां से राजमाता विजय राजे सिंधिया चुनाव लड़ी हैं फिर इस सत्ता को माधवराज सिंधिया ने संभाला इसके बाद अब राजघराने की तीसरी पीढ़ी यानी ज्योतिरादित्या सिंधिया का इस सीट पर दबदबा है.
राजघराने की सीट कहलाने वाली गुना लोकसभा में पूरा अशोकनगर जिला और शिवपुरी और गुना जिले के कुछ हिस्से आते हैं. इस लोकसभा सीट में भी 8 विधानसभाएं हैं जिनमें से 2 पर कांग्रेस का कब्जा वहीं है 6 पर बीजेपी ने कमल खिला रखा है. इन विधानसभाओं में शिवपुरी, पिछोर, कोलारस, बमोरी, गुना, अशोक नगर, चंदेरी, मुंगावली शामिल हैं. इनमें से अशोकनगर और बमोरी को छोड़कर सभी विधानसभाएं बीजेपी के पास हैं.
2019 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो इस सीट पर बीजेपी के केपी यादव ने जीत दर्ज की थी. उन्हें 6,14,049 वोट मिले थे. दूसरी ओर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े ज्योतिरादित्य सिंधिया को 4,88,500 वोट मिले थे. तीसरे नंबर पर 37,530 वोटों के साथ बीएसपी के लोकेंद्र सिंह राजपूत तीसरे नंबर पर रहे थे.
2014 में गुना सीट पर कांग्रेस की ओर से ज्योतिरादित्य सिंधिया जीते थे. उन्होंने बीजेपी नेचा जयभान सिंह पवैया को हराया था. सिंधिया को 5,17,026 वोट मिले थे जबकि जयभान सिंह को 3,96,266 वोट मिले थे. तीसरे नंबर पर बीएसपी के लखन सिंह बघेल रहे थे. उन्हें 27,412 वोट मिले थे.
साल 2009 के लोकसभा में भी गुना की लोकसभा सीट पर कांग्रेस का ही दबदबा रहा था. ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बीजेपी नेता नरोत्तम मिश्रा को वोटों के बड़े अंतर से हराया था. सिंधिया को 4,13,297 वोट मिले थे वहीं, नरोत्तम मिश्रा को 1,63,560 वोट मिले थे. तीसरे नंबर पर बीएसपी के लोकपाल लोदी रहे थे. उन्हें 29,164 वोट मिले थे.
जातिगत समीकरण के मुताबिक यहां अनुसूचित जनजाति की तादाद सबसे ज्यादा 2 लाख 30 हजार से ज्यादा है. अनुसूचित जाति 1 लाख से ज्यादा, कुशवाहा- 60 हजार, रघुवंशी- 32 हजार, यादव-73 हजार, ब्राह्नण-80 हजार, मुस्लिम- 20 हजार और वैश्य जैन-20 हजार है.
चुनाव आयोग ने 10 मार्च, 2019 को लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा की थी. चुनाव आयोग द्वारा 7 चरणों में 2019 के चुनाव कराए जाने की घोषणा की गई थी. ये चुनाव 11 अप्रैल से 19 मई तक चले थे। वोटों की गिनती 23 मई को हुई थी.
मध्य प्रदेश में साल 2019 के लिए लोकसभा चुनाव चार चरणों में हुआ था. पहले फेज में 6 सीटों पर 29 अप्रैल को, दूसरे फेज में 7 सीटों पर 6 मई को, तीसरे फेज में 8 सीटों पर 12 मई को और चौथे फेज में 8 सीटों पर 19 मई को चुनाव हुआ था. वोटों की गिनती 23 मई को हुई थी.
ऐतिहासिक मंदिर है बजरंगढ़
गुना लोकसभा सीट ग्वालियर संभाग में आती है और यहां पर बजरंगढ़ नाम का ऐतिहासिक स्थान है जो कि अतिप्रचीन मंदिर की वजह से लाखों लोगों की श्रद्धा का केंद्र है. इसके अलावा चंदेरी के किले भी बहुत फेमस हैं और यहां पर जागेश्वरी माता का अतिप्रचीन मंदिर है. यहां हर नवरात्रि में लाखों भक्त दर्शन करने आते हैं. यह लोकसभा राजस्थान की सीमा से सटी हुई है इसलिए यहां का कल्चर राजस्थानी कल्चर से मेल खाता हुआ है.
राजनीतिक वर्चस्व
इस सीट पर पार्टी का वर्चस्व उतना नहीं है जितना सिंधिया राजघराने का रहा है. इस सीट से सिंधिया राजघराने की तीन पीढ़ियां चुनाव लड़ चुकी हैं और जीत दर्ज की है. माधवराव सिंधिया की आकस्मक मौत के बाद इस सीट से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने चुनाव लड़ा था और अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. 2002 के बाद से 2019 तक सिंधिया यहां से सांसद रहे हैं. वहीं 2019 के चुनाव में सिंधिया से बीजेपी के केपी यादव ने इस सीट को छीन लिया था और 1 लाख से ज्यादा वोटों से करारी शिकस्त दी थी.