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Loksabha Election: मुख्यमंत्री मोहन यादव का तूफानी दौर जारी, उज्जैन एवं खंडवा लोकसभा क्षेत्र में भरेंगे हुंकार

लोकसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल लगातार जनसभाएं करते नजर आ रहे है. आज मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव उज्जैन व खंडवा लोकसभा क्षेत्र में जनसभा को सम्बोधित करेंगे.

By: RNI Hindi Desk 
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Loksabha Election: मुख्यमंत्री मोहन यादव का तूफानी दौर जारी, उज्जैन एवं खंडवा लोकसभा क्षेत्र में भरेंगे हुंकार

लोकसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल लगातार जनसभाएं करते नजर आ रहे है. आज मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव उज्जैन व खंडवा लोकसभा क्षेत्र में जनसभा को सम्बोधित करेंगे. चलिए आपको बताते है सीएम मोहन के आज के कार्यक्रम.

सीएम मोहन आज सुबह 11:25 बजे तक रतलाम के ताल पहुंचेंगे. जिसके बाद उज्जैन लोकसभा क्षेत्र के आलोट विधानसभा में जनसभा को संबोधित करेंगे.

आलोट के बाद सीएम  12.35 बजे तराना विधानसभा में जनसभा को संबोधित करने के पश्चात दोपहर 1.30 बजे ग्राम उंडासा में पंचक्रोशी यात्रियों के स्वागत कार्यक्रम में शामिल होंगे.

दोपहर 2.20 बजे उत्तर उज्जैन विधानसभा के मनोरमा गार्डन में आयोजित महिला मोर्चा सम्मेलन को संबोधित करेंगे.

शाम 4.10 बजे खंडवा लोकसभा क्षेत्र के नेपानगर के धूलकोट में जनसभा को संबोधित करने के पश्चात शाम 5.15 बजे बुरहानपुर में रोड शो करेंगे.

उज्जैन लोकसभा इतिहास

पूरे देश और विदेश में बाबा महाकाल के लिए जानी जाने वाली उज्जैन लोकसभा सीट बेहद महत्वपूर्ण है. उज्जैन लोकसभा सीट में उज्जैन पूरा जिला और कुछ हिस्सा रतलाम जिले का भी आता है. धार्मिक रूप से अति समृद्ध यह क्षेत्र शिप्रा नदी के किराने बसा हुआ है. यहां पर हर 12 साल में एक बार सिम्हस्थ का आयोजन भी होता है. सिम्हस्थ के दौरान देश-विदेश से हजारों लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. उज्जैन को पुराने जमाने में ज्योतिष के लिए भी जाना जाता था. ज्यादातर हिंदू घरों में विक्रम संवत के कैलेंडर को फॉलो किया जाता है जो कि यहीं के राजा विक्रमादित्य ने शुरू किया था.

उज्जैन में बाबा महाकाल के मंदिर के अलावा विश्व प्रसिद्ध काल भैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, चिंतामन गणेश मंदिर, मां हरसिद्धि मंदिर हैं. यहां पर महाकाल लोक भी बनाया गया है जिसका उद्घाटन 11 अक्टूबर 2022 को किया गया था. उज्जैन शहर को कालीदास की नगरी के नाम से भी जाना जाता है. वहीं इस लोकसभा सीट में रतलाम भी आता है जहां का प्राचीन लक्ष्मी माता मंदिर पूरे प्रदेश के आस्था का केंद्र है, वहीं यहां की सोना मंडी का सोना पूरे देश में विख्यात है.

शिवपुराण से लेकर महाभारत तक

उज्जैन शहर के इतिहास का जिक्र न सिर्फ शिवपुराण बल्कि महाभारत में भी मिलता है. महाभारत के अनुसार भगवान श्री कृष्ण अपने भाई बलराम के सात उज्जैन के ऋषि सांदीपनी के आश्रम में शिक्षा प्राप्त करने  आए थे. यहां आज भी भगवान श्री कृष्ण और उनके परममित्र श्रीदामा का मंदिर मौजूद है. वहीं यहां पर भगवान भोलेनाथ 84 अलग-अलग मंदिरों में 84 महादेव के नाम से जाने जाते हैं. इन सभी मंदिरों की कथा शिवपुराण में मौजूद है.

राजनीतिक ताना-बाना

उज्जैन की राजनीति की बात की जाए तो इस लोकसभा सीट में आठ विधानसभाएं हैं जिनमें उज्जैन जिले की नागदा-काचरोड, महिदपुर, तराना, घटिया, उज्जैन नॉर्थ, उज्जैन साउथ, बड़नगर शामिल हैं, वहीं रातलाम जिले की आलोट सीट भी इस लोकसभा क्षेत्र में शामिल है. इन सभी विधानसभाओं में 2 पर कांग्रेस काबिज है वहीं बाकी 6 पर बीजेपी ने कब्जा जमाया हुआ है. 2019 के चुनाव की बात की जाए तो यहां पर बीजेपी की ओर से अनिल फिरोजिया ने कांग्रेस के बाबूलाल मालवीय को साढ़े तीन लाख से ज्यादा वोटो के अंतर से हराया था.

उज्जैन लोकसभा  2019 जनादेश

देश में हुए पिछले लोकसभा चुनाव में, यानी लोकसभा चुनाव 2019 में इस सीट पर कुल 1661229 मतदाता थे. उस चुनाव में BJP प्रत्याशी अनिल फिरोजिया को जीत हासिल हुई थी, और उन्हें 791663 वोट हासिल हुए थे. इस चुनाव में अनिल फिरोजिया को लोकसभा सीट में मौजूद कुल मतदाताओं में से 47.66 प्रतिशत का समर्थन प्राप्त हुआ था, जबकि इस सीट पर डाले गए वोटों में से 63.18 प्रतिशत उन्हें दिए गए थे. लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान इस सीट पर INC प्रत्याशी बाबूलाल मालवीय दूसरे स्थान पर रहे थे, जिन्हें 426026 वोट मिले थे, जो संसदीय सीट के कुल मतदाताओं में से 25.65 प्रतिशत का समर्थन था, और उन्हें कुल डाले गए वोटों में से 34 प्रतिशत वोट मिले थे. इस सीट पर आम चुनाव 2019 में जीत का अंतर 365637 रहा था.

इससे पहले, उज्जैन लोकसभा सीट पर वर्ष 2014 में हुए आम चुनाव के दौरान 1525481 मतदाता दर्ज थे. उस चुनाव में BJP पार्टी के प्रत्याशी प्रो. चिंतामणि मालवीय ने कुल 641101 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी. उन्हें लोकसभा क्षेत्र के कुल मतदाताओं में से 42.03 प्रतिशत ने समर्थन दिया था, और उन्हें उस चुनाव में डाले गए वोटों में से 63.07 प्रतिशत वोट मिले थे.

उधर, दूसरे स्थान पर रहे थे INC पार्टी के उम्मीदवार प्रेमचंद गुड्डू, जिन्हें 331438 मतदाताओं का समर्थन हासिल हो सका था, जो लोकसभा सीट के कुल वोटरों का 21.73 प्रतिशत था और कुल वोटों का 32.61 प्रतिशत रहा था. लोकसभा चुनाव 2014 में इस संसदीय सीट पर जीत का अंतर 309663 रहा था.

उससे भी पहले, मध्य प्रदेश राज्य की उज्जैन संसदीय सीट पर वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान 1253686 मतदाता मौजूद थे, जिनमें से INC उम्मीदवार गुड्डू प्रेमचंद ने 326905 वोट पाकर जीत हासिल की थी. गुड्डू प्रेमचंद को लोकसभा क्षेत्र के कुल मतदाताओं में से 26.08 प्रतिशत वोटरों का समर्थन हासिल हुआ था, जबकि चुनाव में डाले गए वोटों में से 48.97 प्रतिशत वोट उन्हें मिले थे.
दूसरी तरफ, उस चुनाव में दूसरे स्थान पर BJP पार्टी के उम्मीदवार सत्यनारायण जटिया रहे थे, जिन्हें 311064 मतदाताओं का साथ मिल सका था. यह लोकसभा सीट के कुल वोटरों का 24.81 प्रतिशत था और कुल वोटों का 46.6 प्रतिशत था. लोकसभा चुनाव 2009 में इस संसदीय सीट पर जीत का अंतर 15841 रहा था.
कब, कौन जीता-हारा
  • 1952 से 1967 तक कांग्रेस के नेता राधेलाल व्यास सांसद रहे। उन्होंने भारतीय जनसंघ के भार्गव कैलाश प्रसाद को हराया.
  • 1967 में जनसंघ के हुकुमचंद कछवाय ने कांग्रेस के दुर्गादास सूर्यवंशी को हराया.
  • 1971 में जनसंघ के फूलचंद वर्मा ने कांग्रेस के बापूलाल मालवीय को हराया .
  • 1977 में भारतीय लोकदल के हुकुमचंद्र कछवाय ने कांग्रेस के दुर्गादास सूर्यवंशी को हराया.
  • 1980 में भाजपा के सत्यनारायण जटिया ने कांग्रेस के सुज्जनसिंह विश्नार को हराया.
  • 1984 में कांग्रेस के सत्यनारायण पंवार ने भाजपा के डा. सत्यनारायण जटिया को हराया.
  • 1991 में भाजपा के डा. सत्यनारायण जटिया ने कांग्रेस के सज्जनसिंह वर्मा को हराया.
  • 1996 में भाजपा के जटिया ने कांग्रेस के सिद्धनाथ परिहार को हराया.
  • 1998 में भाजपा के जटिया ने कांग्रेस के अवंतिका प्रसाद मरमट को हराया .
  • 1999 में भाजपा के जटिया ने कांग्रेस के तुलसीराम सिलावट को हराया.
  • 2004 में भाजपा के जटिया ने कांग्रेस के प्रेमचंद्र गुड्डू केा हराया.
  • 2009 में कांग्रेस के प्रेमचंद्र गुड्डू ने भाजपा के जटिया को हराया.
  • 2014 में भाजपा के चिंतामणि मालवीय ने कांग्रेस के प्रेमचंद्र गुड्डू को हराया.
  • 2019 में भाजपा के अनिल फिरोजिया ने बाबूलाल मालवीय को हराया.

खंडवा लोकसभा सीट इतिहास

खंडवा लोकसभा सीट मध्य प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से एक है. इस सीट पर मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही होता आया है. बीजेपी के नंदकुमार चौहान इस सीट से सबसे ज्यादा बार जीतने वाले सांसद हैं. यहां की जनता ने उनको पांच बार चुनकर संसद पहुंचाया है. 1996, 1998, 1999 और 2004 का चुनाव जीतकर उन्होंने इस सीट पर अपना दबदबा बनाए रखा. हालांकि 2009 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके अगले चुनाव 2014 में उन्होंने इस सीट पर वापसी की और शानदार जीत दर्ज की.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

खंडवा में लोकसभा का पहला चुनाव 1962 में हुआ था. कांग्रेस के महेश दत्ता ने पहले चुनाव में जीत हासिल की. कांग्रेस ने इसके अगले चुनाव 1967 और 1971

में भी जीत हासिल की. 1977 में भारतीय लोकदल ने इस सीट पर कांग्रेस को हरा दिया. कांग्रेस ने इस सीट पर वापसी 1980 में की. तब शिवकुमार सिंह ने इस सीट पर कांग्रेस की वापसी कराई थी. कांग्रेस ने इसका अगला चुनाव भी जीता.1989 में बीजेपी ने पहली बार इस सीट पर जीत हासिल की.  हालांकि बीजेपी की खुशी ज्यादा दिन नहीं टिकी. और 1991 में उसे कांग्रेस के हाथों हार का सामना करना पड़ा.

1996 में बीजेपी की ओर से नंदकुमार चौहान मैदान में उतरे और उन्होंने खंडवा में बीजेपी की वापसी कराई. वे अगला 3 चुनाव जीतने में भी कामयाब रहे. 2009 में अरुण सुभाष चंद्रा ने यहां पर कांग्रेस की वापसी कराई. 2009 में हारने के बाद नंदकुमार ने एक बार फिर यहां पर वापसी की और अरुण सुभाष चंद्र को मात दी. बीजेपी को यहां पर 6 बार तो कांग्रेस को 7 बार जीत मिली है.

खंडवा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटें आती हैं. बगाली, पंधाना, भीखनगांव, मंधाता, नेपानगर,बदवाह, खंडवा, बुरहानपुर यहां की विधानसभा सीटें हैं. यहां की 8 विधानसभा सीटों में से 3 पर बीजेपी, 4 पर कांग्रेस और 1 सीट पर निर्दलीय का कब्जा है.

सामाजिक ताना-बाना

प्राचीन मान्यताओं के अनुसार खंडवा शहर का प्राचीन नाम खांडववन(खांडव वन)था जो मुगलों और अंग्रेजो के आने से बोलचाल में धीरे धीरे खंडवा हो गया .खंडवा नर्मदा और ताप्‍ती नदी घाटी के मध्य बसा है. ओमकारेश्‍वर यहां का लोकप्रिय और पवित्र दर्शनीय स्‍थल है. इसे भारत के 12 ज्योतिर्लिगों में शुमार किया जाता है.

2011 की जनगणना के मुताबिक खंडवा की जनसंख्या 2728882 है. यहां की 76.26 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 23.74 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है. खंडवा में 10.85 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति और 35.13 फीसदी आबादी अनुसूचित जनजाति की है. चुनाव आयोग के आंकड़े के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां पर 17,59,410 मतदाता थे. इनमें से 8,46, 663 महिला मतदाता और 9,12,747 पुरुष मतदाता थे. 2014 के चुनाव में इस सीट पर 71.46 फीसदी मतदान हुआ था.

2014 का जनादेश

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी नंदकुमार चौहान ने कांग्रेस अरुण यादव को हराया था. नंदकुमार को 717357(57.05 फीसदी) वोट मिले थे तो वहीं अरुण यादव को 457643(36.4 फीसदी) वोट मिले थे.दोनों के बीच हार जीत का अंतर 259714 वोटों का था. इस चुनाव में आम आदमी पार्टी 1.34 फीसदी वोटों के साथ तीसरे स्थान पर थी.

इससे पहले 2009 के चुनाव में कांग्रेस के अरुण यादव ने जीत हासिल की थी. उन्होंने बीजेपी के नंदकुमार चौहान को हराया था. इस चुनाव में अरुण यादव को 394241(48.53 फीसदी ) वोट मिले थे तो वहीं नंदकुमार चौहान को 345160(42.49 फीसदी) वोट मिले थे. दोनों के बीच हार जीत का अंतर 49081 वोटों का था.

सांसद का रिपोर्ट कार्ड

66 साल के नंदकुमार चौहान 2014 का चुनाव जीतकर पांचवीं बार सांसद बने. पेशे से किसान नंदकुमार ने बीए की पढ़ाई की है. संसद में उनके प्रदर्शन की बात करें तो 16वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 54 फीसदी रही. वे 7 बहस में हिस्सा लिए. उन्होंने संसद में 6 सवाल किया.

नंदकुमार चौहान को उनके निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए 22.50 करोड़ रुपये आवंटित हुए थे. जो कि ब्याज की रकम मिलाकर 22.86 करोड़ हो गई थी. इसमें से उन्होंने 19.54 यानी मूल आवंटित फंड का 85.07 फीसदी खर्च किया. उनका करीब 3.32 करोड़ रुपये का फंड बिना खर्च किए रह गया.

खंडवा के बारे में

मध्य प्रदेश की खंडवा लोकसभा सीट (Khandwa Lok Sabha Election Results 2019) पर 2014 में हुए चुनाव में BJP के नन्द कुमार सिंह चौहान ने जीत हासिल की थी. उन्हें 7,17,357 वोट मिले थे और 4,57,643 वोट पाकर दूसरे पायदान पर कांग्रेस के अरुण सुभाषचंद्र यादव रहे थे.

खंडवा लोकसभा सीट से 1952 और 1957 में कांग्रेस के बाबूलाल तिवारी, 1962 में कांग्रेस के महेश दत्ता मिश्रा, 1967 और 1971 में कांग्रेस के गंगाचरण दीक्षित ने दो बार जीत हासिल की, 1977 में भारतीय लोकदल के परमानंद ठाकुरदास गोविंदजीवाला, 1980 में कांग्रेस के ठाकुर शिवकुमार नवल सिंह, 1984 में कांग्रेस के कालीचरण रामरतन सकरगय, 1989 में BJP के अमृतलाल तारवाला, 1991 में कांग्रेस के ठाकुर महेन्द्र कुमार नवल सिंह, 1996, 1998, 1999 और 2004 में BJP के नन्द कुमार सिंह चौहान ने चार बार जीत हासिल की. 2009 में कांग्रेस के अरुण सुभाषचंद्र यादव ने जीत हासिल की थी.

खंडवा लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटें मान्धाता, बुरहानपुर, बड़वाह, बागली, पंधाना, नेपानगर, बीकनगांव और खंडवा हैं. बागली, पंधाना, नेपानगर, बीकनगांव सीटें अनुसूचित जनजाति और खंडवा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है.

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