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Bhopal: यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री का मुख्यमंत्री ने किया औचक निरीक्षण, जमीन के भविष्य को लेकर बढ़ी हलचल

भोपाल में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर का मुख्यमंत्री मोहन यादव ने औचक निरीक्षण किया। 85 एकड़ जमीन, गैस पीड़ितों और जहरीले कचरे को लेकर चर्चाएं तेज।

By: Abhinav Tiwari 
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Bhopal: यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री का मुख्यमंत्री ने किया औचक निरीक्षण, जमीन के भविष्य को लेकर बढ़ी हलचल

भोपाल की पहचान बन चुकी जेपी नगर स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री एक बार फिर सुर्खियों में है। शनिवार को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अचानक फैक्ट्री परिसर का निरीक्षण करने पहुंचे। उनके इस औचक दौरे से इलाके में हलचल तेज हो गई है और लोगों को उम्मीद जगी है कि दशकों से वीरान पड़ी इस ऐतिहासिक और संवेदनशील जमीन के भविष्य को लेकर कोई ठोस निर्णय सामने आ सकता है।

जमीन के उपयोग पर मंथन, 85 एकड़ क्षेत्र को लेकर तैयारी

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गैस राहत विभाग के अधिकारियों के साथ लंबी चर्चा की। सूत्रों के अनुसार यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री की करीब 85 एकड़ जमीन के उपयोग को लेकर सरकार स्तर पर मंथन चल रहा है। जिला प्रशासन और गैस राहत विभाग के अधिकारी पहले से ही इस जमीन से जुड़े पुराने दस्तावेजों की पड़ताल में जुटे हुए हैं। बताया जा रहा है कि पुलिस विभाग ने भी डीआरपी लाइन के लिए इसी जमीन का कुछ हिस्सा मांगा है, जिस पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है।

गैस पीड़ित संगठनों की मुख्यमंत्री से उम्मीदें

यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी से जुड़े पीड़ित संगठनों ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात की इच्छा जताई है। सामाजिक कार्यकर्ता रचना ढिंगरा के अनुसार, कई पीड़ित महिलाओं को आज भी मिलने वाली ₹1000 की मासिक पेंशन नियमित रूप से नहीं मिल पा रही है। इसके साथ ही पीड़ितों के पुनर्वास और स्वास्थ्य सुविधाओं की निगरानी के लिए बनी राज्य स्तरीय समिति की बैठक पिछले 11 वर्षों से नहीं हुई है। गैस पीड़ित संगठन इन सभी मुद्दों पर सरकार से सीधी और ठोस बातचीत चाहते हैं।

जहरीले कचरे का विवाद अब भी बरकरार

यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री का 337 मीट्रिक टन जहरीला कचरा पिछले साल जनवरी में लगभग 40 साल बाद हटाया गया था। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच इस कचरे को 12 कंटेनरों में भरकर पीथमपुर भेजा गया, जहां भारी विरोध के बावजूद इसका निपटान किया गया। हालांकि गैस पीड़ित संगठनों का दावा है कि फैक्ट्री परिसर में अब भी हजारों टन जहरीला कचरा दबा हुआ है, जिससे आसपास की करीब 42 बस्तियों का भूजल प्रदूषित हो चुका है।

दुनिया की सबसे भयावह औद्योगिक त्रासदी की गवाही

2-3 दिसंबर 1984 की काली रात भोपाल के इतिहास का सबसे दर्दनाक अध्याय है। यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के टैंक नंबर-610 से लीक हुई मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस ने हजारों जिंदगियां छीन लीं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक उस रात हर तरफ अफरा-तफरी, चीख-पुकार और लाशों का ढेर था। यह हादसा आज भी दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी के रूप में जाना जाता है।

हादसा आखिर हुआ कैसे? जानिए पूरी वजह

यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड में सेविन नामक कीटनाशक बनाने के लिए अत्यंत जहरीली MIC गैस का इस्तेमाल होता था। 2 दिसंबर 1984 की रात पाइप की सफाई के दौरान पानी MIC टैंक में चला गया, जिससे रासायनिक प्रतिक्रिया बेकाबू हो गई। दबाव बढ़ने से टैंक फट गया और जहरीली गैस पूरे भोपाल शहर में फैल गई।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार शुरुआती दिनों में 3828 लोगों की मौत हुई, जबकि बाद के वर्षों में यह संख्या 15 हजार से अधिक बताई गई। करीब साढ़े पांच लाख लोग इस त्रासदी से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए।

अब आगे क्या?

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह दौरा संकेत दे रहा है कि सरकार यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री की जमीन, गैस पीड़ितों के मुद्दों और पर्यावरणीय खतरे को लेकर नई और ठोस पहल कर सकती है। आने वाले दिनों में इस ऐतिहासिक स्थल को लेकर कोई बड़ा फैसला सामने आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

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