बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण के अपने आखिरी चुनाव प्रचार के दौरान पूर्णिया के धमदाहा में मंच से बड़ा ऐलान किया और अपने राजनीतिक संन्यास की घोषणा की।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने धमदाहा में रैली में जनता से कहा, ‘आप जान लीजिए आज तीसरे चरण के प्रचार का आखिरी दिन है। अब परसों चुनाव है और ये यह मेरा अंतिम चुनाव है। अंत भला तो सब भला। अब आप बताइए वोट दीजिएगा ना इनको। हम इन्हें जीत की माला समर्पित कर दें। बहुत बहुत धन्यवाद।’
नीतीश कुमार की इस टिप्पणी के बाद विरोधी दलों ने उन पर चुनाव में हार स्वीकार करने का आरोप लगाना शुरू कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने गुरुवार को दावा किया कि नीतीश कुमार ने यह बात कहकर विधानसभा चुनाव में अपनी हार स्वीकार कर ली है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘अंतिम चुनाव’ वाली चाल नाकामियों पर दया की याचिका है।
चिदंबरम ने अपने ट्वीट में लिखा, “जब नीतीश कुमार ने घोषणा की कि यह उनका ‘अंतिम चुनाव’ होगा, तो उन्होंने प्रभावी रूप से हार मान ली। ‘अंतिम चुनाव’ वाली चाल उनके प्रदर्शन के आधार पर समर्थन की अपील नहीं है, बल्कि उनके नाकामियों पर दया की याचिका है।”
बिहार के लोग एक ऐसे व्यक्ति को वोट क्यों दें, जो यदि चुना गया तो पहले दिन से ही सुस्त हो जाएगा?
— P. Chidambaram (@PChidambaram_IN) November 5, 2020
उन्होंने कहा, “बिहार के लोग एक ऐसे व्यक्ति को वोट क्यों दें, जो यदि चुना गया तो पहले दिन से ही सुस्त हो जाएगा?”
आप को बता दे कि बिहार विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण का मतदान सात नवंबर को पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, सहरसा, दरभंगा, वैशाली, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर जिलों में मतदान होना है।
बता दें कि एनडीए गठबंधन की ओर से नीतीश कुमार मुख्यमंत्री का चेहरा हैं और पिछले पंद्रह वर्षों से राज्य की गद्दी संभाल रहे हैं। नीतीश कुमार लगातार चौथी बार चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बनने की कोशिश में जुटे हैं, वो चुनावी मंच से अपनी उपलब्धियों को गिना रहे हैं। अपने लंबे कार्यकाल के बावजूद वो अपनी सभाओं में कह रहे हैं कि फिर से मौका मिला तो वह बचे हुए काम पूरा कर बिहार को विकसित राज्य बना देंगे।