हाल ही में 30 सालों से भी अधिक समय के बाद देश को नयी शिक्षा नीति मिल गई है जिसका देश के लोगों ने स्वागत किया है वही राजनीतिक दलों की भी अलग अलग राय देश के सामने आ रही है
इसी विषय पर अब शिव सेना ने भी अपनी राय जाहिर करते हुए इसे देश हित में बताया है लेकिन कई सवाल भी खड़े किये है।
मुखपत्र सामना के संपादकीय में नई शिक्षा नीति के बारे में शिव सेना की और से लिखा गया है।हा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अच्छा फैसला किया है.
उन्होंने देश की शिक्षा नीति को पूरी तरह से बदल दिया है. ऐसा 34 सालों बाद हुआ है। शिवसेना ने पांचवीं कक्षा तक बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा दिए जाने को अनिवार्य बनाए जाने के फैसले का स्वागत किया।
सामना ने सवाल उठाए हैं कि आखिर नई एजुकेशन पॉलिसी पर नया करिकुलम कौन बनाएगा और इसके लिए किन यूनिवर्सिटी से विशेषज्ञ काम करेंगे?