Home एजुकेशन कोरोना की वजह से रद्द हुए बोर्ड पेपर तो पेरेंट्स ने की सीबीएसई से एग्जाम फीस वापस करने की मांग

कोरोना की वजह से रद्द हुए बोर्ड पेपर तो पेरेंट्स ने की सीबीएसई से एग्जाम फीस वापस करने की मांग

1 second read
0
43

नई दिल्ली : कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर सीबीएसई ने 10वीं क्लास के एग्जाम रद्द करने का फैसला किया है। ऐसे में अब कई पेरेंट्स ने बोर्ड से एग्जाम फीस वापस करने की मांग की है। आपको बता दें कि इस साल करीब साढ़े 21.5 लाख छात्रों ने 10वीं क्लास का एग्जाम देने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। जिसके एवज में बोर्ड ने सब्जेक्ट्स और प्रैक्टिकल पेपर की संख्या के आधार पर एक बच्चे से 1500 रुपये से लेकर 1800 रुपये तक फीस ली थी। यह परीक्षाएं इस साल 4 मई से 16 जून के बीच आयोजित होनी थीं।

तंगी हालत में जमा की बच्चों की फीस

द टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक, दिल्ली के मदनपुर खादर में स्लम में रहने वाली 65 साल की शांति राणा कपड़े सिल कर अपने चार पोते-पोतियों को पढ़ाती हैं। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के पिता यानी शांति के बेटे का निधन हो चुका है। उनकी बहू उनके साथ नहीं रहते हैं। पिछले साल फरवरी में उनकी सबसे बड़ी पोती कीर्ति ने 1800 रुपये बोर्ड फीस जमा कराई थी। अब चूंकि बोर्ड परीक्षाएं रद्द हो चुकी हैं ऐसे में शांति चाहती हैं कि बोर्ड फीस की एवज में लिए गए पैसे वापस कर दे। इसी तरह कई पेरेंट्स और गार्जियन बोर्ड से पैसे वापस करने की मांग कर रहे हैं। खास वे लोग जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं।

बोर्ड को फीस रिफंड करना चाहिए

दिल्ली यूनिवर्सिटी एग्जीक्यूटिव काउंसिल के मेंबर और ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अशोक अग्रवाल का कहना है कि जब बोर्ड ने एग्जाम सेंटर पर खर्च नहीं, इन्विजिलेटर्स और एग्जामिनर्स को पैसे नहीं दिए तो उन्हें आवश्यक रूप से एग्जाम फीस को वापिस करना चाहिए। बोर्ड फीस में परीक्षा आयोजित कराने से संबंधित सभी तरह के खर्च शामिल होते हैं। चूंकि बोर्ड ने जब इस तरह का कोई खर्च ही नहीं किया तो उसे फीस रिफंड करनी चाहिए।

प्राइवेट स्कूल स्टूडेंट्स के पेरेंट्स भी समर्थन में

अपना नाम जाहिर ना करने के शर्त पर, एक स्कूल प्रिंसिपल ने बताया कि बोर्ड पहले ही फीस का एक हिस्सा क्वेश्चन पेपर बनवाने पर खर्च कर चुका है, बावजूद इसके उसे बचे हुए पैसे वापिस कर देने चाहिए। कई पेरेंट्स जिनके बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं, उन लोगों ने भी फीस रिफंड करने की मांग का समर्थन किया है। वहीं, सीबीएसई का कहना है कि वह बिना बोर्ड परीक्षा के स्टूडेंट्स को ग्रेड अलॉट करने के तरीके पर काम कर रहा है। फिलहाल स्टूडेंट्स इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि उन्हें किस आधार पर 11 में स्ट्रीम अलॉट होगा। फीस रिफंड को लेकर बोर्ड के सचिव अनुराग त्रिपाठी की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया।

खबरों की मानें तो, पिछले साल भी देश में जारी लॉकडाउन के बीच सभी सरकारी और गैर सरकारी शिक्षण संस्थान बंद थे। लेकिन गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों ने ऑनलाइन पढ़ाई सुविधा उपलब्ध कराने के नाम पर विद्यार्थियों के पेरेंट्स से पूरे महीने का फीस भुगतान कराया गया। किसी स्कूल ने रियायत दी तो अधिकतर स्कूल नहीं मानें, जिस कारण अब पेरेंट्स भी बोर्ड से अपने पैसों की मांग कर रहे है।

Load More In एजुकेशन
Comments are closed.