1. हिन्दी समाचार
  2. Breaking News
  3. Loksabha Election: विंध्य की जनता का आशीर्वाद BJP को भारी मतों से जीत दिलाएगी: राजेंद्र शुक्ल

Loksabha Election: विंध्य की जनता का आशीर्वाद BJP को भारी मतों से जीत दिलाएगी: राजेंद्र शुक्ल

लोकसभा चुनाव के लिए होने वाले तीसरे चरण के अंतिम दिन राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. इसी के चलते मध्य प्रदेश शासन में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का कहना है कि पूरे देश में मोदी की नीतियों का एक माहौल है.

By: RNI Hindi Desk 
Updated:
Loksabha Election: विंध्य की जनता का आशीर्वाद BJP को भारी मतों से जीत दिलाएगी: राजेंद्र शुक्ल

लोकसभा चुनाव के लिए होने वाले तीसरे चरण के अंतिम दिन राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. इसी के चलते मध्य प्रदेश शासन में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का कहना है कि पूरे देश में मोदी की नीतियों का एक माहौल है. मध्य प्रदेश की बात की जाए तो विंध्य क्षेत्र की जनता ने हमेशा ही भारतीय जनता पार्टी को अपना आशीर्वाद दिया है.

इस बार भी विंध्य की जनता भारी मतों से बीजेपी को बढ़त दिलाएगा डिप्टी सीएम शुक्ला विंध्य एकता परिषद मध्यप्रदेश के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे जहाँ उन्होंने मीडिया से चर्चा की वही कार्यक्रम में भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी आलोक शर्मा मध्य प्रदेश लोकसभा चुनाव प्रभारी महेंद्र सिंह बीजेपी विधायक भगवान दास सवनानी,सहित बड़ी संख्या में विंध्य परिवार के लोग मौजूद रहे.

कार्यक्रम में डिप्टी सीएम ने विंध्य के वोटरों से भोपाल भाजपा प्रत्याशी आलोक शर्मा को भरपूर समर्थन देने की अपील भी की. वहीं पिछले दो चरण में हुए कम वोटिंग प्रतिशत पर चिंता जताते हुए उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि अब परिस्थितियों दूसरी है. शादी और फसल की कटाई का काम कम हो गया है तो निश्चित रूप से वोटिंग परसेंटेज बढ़ेगा.

सतना सीट पर सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड

भाजपा प्रत्याशी गणेश सिंह के नाम सतना लोकसभा सीट में सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड दर्ज है. 2019 के लोकसभा चुनाव में 2 लाख 31 हजार 473 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी. उन्हें 5 लाख 88 हजार 753 मत मिले थे, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी राजाराम त्रिपाठी को 3 लाख 57 हजार 280 वोट मिले थे. इसके पूर्व के चुनावों में गणेश सिंह मप्र के पूर्व डिप्टी स्पीकर डॉ राजेन्द्र कुमार सिंह, पूर्व सांसद  सुखलाल कुशवाहा और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल को भी हार का स्वाद चखा चुके हैं.

ओबीसी वर्ग का सबसे दमदार चेहरा

गणेश सिंह चार बार से सतना लोकसभा सीट से सांसद हैं. ओबीसी वर्ग के बड़े चेहरे हैं. वह ओबीसी स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन रहे हैं. सभी सात विधानसभा क्षेत्रों में समर्थकों की बड़ी तादाद और कार्यकर्ताओं की अपनी टीम है.सजातीय वोटों पर भी पकड़ होने के चलते वे पार्टी की पसंद बने, चूंकि विन्ध्य की चार सीटों पर भाजपा ने दो ब्राह्मण चेहरे उतारे और एक सीट पर अनुसूचित जनजाति वर्ग को मौका दिया. इस लिहाज से सतना सीट ओबीसी कोटे में फिर आ गई है.

सतना लोकसभा चुनाव

देश में अभी लोकसभा चुनाव कराए जा रहे हैं. चुनाव के दूसरे चरण में 12 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की 88 संसदीय सीटों के साथ-साथ मध्य प्रदेश की 6 संसदीय सीटों पर भी वोटिंग कराई गई. दूसरे चरण में देश में 68.49 फीसदी वोट पड़े. लेकिन 2019 की तुलना में 4.83% वोट कम पड़े. इस दौरान मध्य प्रदेश की 6 लोकसभा सीटों में कुल 54.83% वोटिंग हुई. सतना लोकसभा सीट पर 57.18 फीसदी वोट पड़े.

सतना लोकसभा सीट मध्य प्रदेश की ऐसी लोकसभा सीट है जिसमें सिर्फ 7 विधानसभाओं को शामिल किया गया है. यह लोकसभा सीट पूरे सतना जिले को कवर करती है. इस लोकसभा सीट के अंतर्गत चित्रकूट, रायगांव, सतना, नागोद, मैहर, अमरपाटन और रामपुर बघेलन आता है. इस लोकसभी सीट पर 1998 से 2019 तक बीजेपी ही काबिज है. वहीं अगर विधानसभाओं की बात की जाए तो यहां पर सिर्फ 2 सीटों पर कांग्रेस काबिज है वहीं बाकी पांच पर बीजेपी का कब्जा है.

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड की प्रमुख लोकसभा सीट सतना उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के साथ अपनी सीमा शेयर करती है. पूरे प्रदेश और पूरे देशो की आस्था का केंद्र मैहर भी यहीं पर स्थित है. यहां पर  मैहर वाली माता का मंदिर विश्व विख्यात है. मान्यता है कि जहां यह मंदिर स्थित है वहां पर देवी सती का हार गिरा था इसी वजह से इस क्षेत्र को मां का हार कहा गया जो कि समय के साथ मैहर हो गया. इसके अलावा इस जिले में कई खूबसूरत जगहें हैं जो कि घूमने योग्य हैं.

सतना जिले में ही चित्रकूट स्थित है मान्यता है कि यहीं पर भगवान राम माता सीता और लक्ष्मण के जी के साथ वनवास के वक्त रुके थे. यहां पर हनुमान धारा हनुमान जी का चमत्कारिक मंदिर है. यहां पर लंबे वक्त तक बुंदेली साम्राज्य रहा है. इस क्षेत्र का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है. मैहर और चित्रकूट के अलावा यहां पर मुक्तयारगंज में स्थित भगवान वैंकटेश को समर्पित मंदिर और बीरसिंहपुर में स्थित भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर शामिल है.

राजनीतिक ताना-बाना

1998 के बाद से यह लोकसभा सीट फिलहाल बीजेपी के पास है. 2019 के लोकसभा चुनाव की बात की जाए तो इस सीट से बीजेपी की ओर से गणेश सिंह मैदान में थे, जबकि कांग्रेस से राजाराम त्रिपाठी और बीएसपी से अच्छेलाल खुसवाहा को टिकट मिला था. जी हां, यह मध्य प्रदेश की उन इक्का दुक्का सीटों में से एक है जहां बीएसपी का वोटबैंक भी है. इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी के गणेश सिंह को 588753 वोट, कांग्रेस के राजाराम को 357280 वोट और बीएसपी के अच्छे लाल को 109961 वोट मिले थे. पहले दो कैंडिडेट के बीच जीत का अंतर करीब 2 लाख 31 वोटों का रहा.

शहडोल में कौन आमने- सामने ?

इस लोकसभा सीट में बीजेपी ने वर्तमान सांसद हिमाद्री सिंह को ही अपना प्रत्याशी बनाया है, तो वहीं कांग्रेस ने वर्तमान विधायक फुन्देलाल मार्को को चुनावी मैदान पर उतार दिया है. कांग्रेस ने अपने उस नेता को टिकट दिया है. जो पिछले तीन बार से लगातार पुष्पराजगढ़ विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज करते आ रहे हैं और विधायक बन रहे हैं. दोनों ही नेताओं के बीच इस बार एक कड़ी चुनौती देखी जा रही है.

मोदी की गारंटी Vs निष्क्रियता पर भरोसा

देखा जाए तो शहडोल लोकसभा सीट में इस बार सन्नाटा पसरा हुआ है. जिससे भी पूछिए उसका यही कहना है कि इस बार चुनाव जैसा माहौल तो लग ही नहीं रहा है. सांसदी बरकरार रखने मैदान में उतरी भाजपा की हिमाद्री सिंह और पहली बार संसदीय चुनाव लड़ रहे कांग्रेस के तीन बार के विधायक फुन्देलाल सिंह मार्को का प्रचार और जनसंपर्क अभियान अपने-अपने तरीके से ही चला. शहर से लेकर गांव तक प्रचार-प्रसार की सरगर्मी नहीं दिखी. हिमाद्री को मोदी लहर और गारंटी के सहारे चुनावी नैया पार लग जाने की पूरी उम्मीद है. वहीं फुन्देलाल सिंह मार्को को उम्मीद है कि निष्क्रियता का मुद्दा जनता के बीच असर कर जाएगा. आलम तो यह रहा कि शहडोल लोकसभा सीट के संभागीय मुख्यालय में ही दोनों ही पार्टियों के किसी एक भी पार्टी के प्रत्याशी का चुनावी पोस्टर नजर नहीं आए. इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि इस बार किस तरह से शांति के साथ चुनाव प्रचार चल रहा है.

सीधी में इनके बीच सीधा मुकाबला

सीधी लोकसभा सीट की बात करें तो सीधी लोकसभा सीट में भी इस बार दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है, क्योंकि सीधी लोकसभा सीट से पिछली दो बार से लगातार जीतते आ रही बीजेपी की रीति पाठक इस बार विधानसभा का चुनाव लड़ीं और विधायक बन चुकी हैं. बीजेपी ने सीधी लोकसभा सीट से इस बार डॉ राजेश मिश्रा को टिकट दिया है, तो वहीं कांग्रेस ने अपने बड़े नेता कमलेश्वर पटेल को चुनावी मैदान पर उतारा है. सीधी लोकसभा सीट की लड़ाई को दिलचस्प इस बार भारतीय जनता पार्टी से नाराज होकर गोंगपा से चुनाव लड़ रहे पूर्व राज्यसभा सांसद अजय प्रताप सिंह ने बना दिया है. अब इस सीट पर भी सबकी नजर है कि आखिर बाजी कौन मारेगा.

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...