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UP विधानसभा चुनाव से पहले पीएम मोदी ने तैयार किया अभेद्य किला, भेद पाना होगा मुश्किल

By: Amit ranjan 
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UP विधानसभा चुनाव से पहले पीएम मोदी ने तैयार किया अभेद्य किला, भेद पाना होगा मुश्किल

नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होने में अभी कई माह शेष है उससे पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा अभेद्य किला तैयार किया है, जिसे भेद पाना विपक्षी पार्टियों के लिए मुश्किल होगा। क्योंकि पीएम मोदी ने अपने नये मंत्रिमंडल में यूपी चुनाव का भरपूर ख्याल रखा है, और उन्हें अपनी इस टीम में जगह दी है, जो चुनावी पिच पर अच्छी साझेदारी निभा सकें। यही वजह है कि बड़े नामों के बजाय सामाजिक समीकरणों को प्राथमिकता दी गई है। इसके साथ ही तीन पिछड़े, तीन दलित और एक ब्राह्मण बिरादरी के मंत्री के साथ ही बीजेपी ने क्षेत्रीय संतुलन भी साधा है।

आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में यूपी से 7 नए चेहरे शामिल किए गए हैं। लखनऊ से अब दो (राजनाथ सिंह और कौशल किशोर) केंद्रीय मंत्री हो गए हैं। यूपी से राज्यसभा सांसद हरदीप पुरी को शामिल कर लें तो विस्तार के पहले मोदी सहित कुल 10 चेहरे केंद्र में यूपी से थे। इनमें राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार संतोष गंगवार का इस्तीफा ले लिया गया। नई भागीदारी के बाद अब टीम मोदी में उनके अलावा यूपी से 14 चेहरे हो गए हैं। लोकसभा की 20% से अधिक सीटों वाले यूपी की मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी भी करीब 20% हो गई है। नए पुराने चेहरों को जोड़ लें तो पूर्वांचल से 5, अवध से 4, पश्चिम यूपी से 3, बुंदलेखंड से 2 और रुहेलखंड से एक चेहरा टीम मोदी का हिस्सा है।

जातीय और सामाजिक समीकरण

विकास के घोषणापत्रों के बीच यूपी के विधानसभा चुनाव के नतीजे जातीय और सामाजिक समीकरणों से सधते हैं। सवर्णों के साथ ही गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलितों को अपने कोर वोट बैंक में बदलने के अभियान में बीजेपी 2014 से ही लगी हुई है। उसे इसका काफी फायदा भी हुआ है। मंत्रिमंडल विस्तार में इसे और मजबूती दी गई है।

नए चेहरों में दो कुर्मी बिरादरी से हैं। अनुप्रिया और उनके दल का पूर्वांचल के कई जिलों में प्रभाव है। इस बिरादरी से आने वाले संतोष गंगवार को हटाया गया तो पंकज चौधरी को जोड़कर उसकी भरपाई भी कर दी गई। बदायूं के रहने वाले बीएल वर्मा लोध बिरादरी से आते हैं। सेंट्रल यूपी के कई जिलों में इस बिरादरी के वोट निर्णायक हैं।

तीन दलित मंत्रियों में कौशल किशोर पासी, भानुप्रताप वर्मा कोरी और एसपी सिंह बघेल धनगर बिरादरी से आते हैं। 2014 से ही गैर-जाटवों के वोट बीएसपी से छिटक कर बीजेपी में जुड़े हैं। अति-पिछड़ों, दलितों की उपजातियों की भागीदारी का यह गुलदस्ता सत्ता का गुलदान सजाने के काम आएगा। एसपी सिंह बघेल बीजेपी के पिछड़ा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं।

अति पिछड़ों में पाल बिरादरी में भी उनका प्रभाव माना जाता है। हालांकि, इस समय वह आगरा की सुरक्षित सीट से सांसद हैं। उन्होंने धनगर जाति (एससी) का प्रमाणपत्र लगाया था, जिसका मुकदमा भी चल रहा है। अजय मिश्र टेनी अवध से आते हैं। इस बेल्ट से केंद्रीय मंत्रिमंडल में ब्राह्मणों की पहले कोई भागीदारी नहीं थी।

मंत्रिमंडल में पहले से मौजूद

नरेंद्र मोदी (वाराणसी), राजनाथ सिंह (लखनऊ), स्मृति इरानी (अमेठी), महेंद्र नाथ पांडेय (चंदौली), हरदीप सिंह पुरी (राज्यसभा), साध्वी निरंजन ज्योति (फतेहपुर), वीके सिंह (गाजियाबाद), संजीव बालियान (मुजफ्फरनगर)

ये नए मंत्री बने

कौशल किशोर (मोहनलालगंज), अनुप्रिया पटेल (मीरजापुर), पंकज चौधरी (महाराजगंज), भानु प्रताप वर्मा (जालौन), बीएल वर्मा, (राज्यसभा) अजय कुमार मिश्र (खीरी), एसपी सिंह बघेल (आगरा)।

कौन हैं मोदी की टीम में शामिल यूपी के नए ‘खिलाड़ी’?:-

पंकज चौधरी: महाराजगंज से छठी बार सांसद पंकज चौधरी ने पार्षद से केंद्रीय मंत्री तक का सफर तय किया है। 1990-91 में वे गोरखपुर में डिप्टी मेयर रहे। 57 साल के सांसद 1991 से 2019 के बीच केवल एक बार 2009 में चुनाव हारे थे। संगठन के पुराने व समर्पित चेहरों में गिनती होती है।

अनुप्रिया पटेल: सहयोगी अपना दल की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया मीरजापुर से दूसरी बार सांसद है। 2012 में वह रोहनिया से विधायक भी चुनी गई थी। मोदी सरकार के पहले टर्म में भी उन्हें विस्तार में राज्यमंत्री बनाया गया था।

सत्यपाल सिंह बघेल: सपा, बसपा से होते हुए भाजपा में आए बघेल आगरा से सांसद हैं। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के करीबी रहे बघेल तीन बार सपा से सांसद रहे। इसके बाद बसपा ने उन्हें राज्यसभा भेजा। 2017 में टुंडला सुरक्षित सीट से विधायक बनने के बाद योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बने थे। 2019 में भाजपा ने उन्हें आगरा से लोकसभा चुनाव लड़ाया था।

भानु प्रताप सिंह वर्मा: जालौन से सांसद संगठन के पुरान चेहरों में हैं। विधायक रहने के अलावा वह पांचवी बार सांसद हैं। ला ग्रेजुएट यूपी बीजेपी के एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। लोकसभा की विभिन्न कमेटियों में भी सदस्य रहे हैं।

कौशल किशोर: मोहनलालगंज से दूसरी बार भाजपा से सांसद कौशल किशोर 2014 लोकसभा चुनाव के पहले भगवा दल में आए थे। विधानसभा का सदस्य रह चुके कौशल किशोर इस समय भाजपा के एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। पत्नी जय देवी मलिहाबाद से विधायक हैं।

अजय कुमार मिश्र टेनी: लखीमपुर खीरी से दूसरी बार सांसद अजय 2012 में निघासन से विधायक भी रह चुके हैं। भाजपा युवा मोर्चा के जिला मंत्री व खीरी में भाजपा के जिला महामंत्री रहे हैं। हाल में ही उन्हें सांसद रत्न का अवार्ड भी मिला था।

बीएल वर्मा: पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के करीबियों में शुमार बीएल वर्मा बदायूं के रहने वाले हैं और राज्यसभा से सांसद हैं। संघ से भाजपा में आए वर्मा भाजपा के ब्रज क्षेत्र के अध्यक्ष, प्रदेश मंत्री व प्रदेश उपाध्यक्ष भी रहे हैं। योगी सरकार में भी उन्हें राज्यमंत्री स्तर का पद दिया गया था।

आपको बता दें कि अगले साल यानि की 2022 में यूपी के 404 विधानसभा सीटों पर चुनाव होने है। अब देखना यह है कि पीएम मोदी का यह जातीय और सामाजिक समीकरण यूपी चुनाव 2022 में कितना सटीक बैठता है।  

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