Yoga For Shoulder Pain: आज के इस डिजिटल समय में ज्यादातर लोग लैपटॉप और कंप्यूटर पर घंटों काम करने के कारण अनेक बीमारियों का घर बन जाते है। जब ज्यादातर लोग अपने हफ्ते का ज्यादातर समय स्क्रीन पर बिताते हैं। तो इससे उनके कंधो और पीठ को सबसे अधिक समस्याएं होती है। लोग इस दर्द से छुटकारा पाने के लिए अनेक दर्द निवारक गोलोया भी लेते है, जो कुछ घंटे या एक दो दिन आपको आराम देता है और आप पुनः इस दर्द के शिकार हो जाते है। आप जानते ही है की बार बार दर्द निवारक दवा लेना आपको इस दर्द से छुटकारा नहीं दिलाने वाला बल्कि आपको और अधिक गंभीर बीमारियों की और ले जा सकता है। तो क्यों न आप कुछ नेचुरल उपाय आजमाए जो आपको इस दर्द से हमेसा के लिए छुटकारा दिला सकता है। ये आप भी जानते है की अगर आप धीरे-धीरे कुछ योग आसनों को आजमाते हैं तो आपको इस दर्द से काफी लाभ मिल सकता है। यहां कुछ ऐसे योग आसनों के बारे में बताया गया है जिससे आपके कंधे के दर्द को काफी राहत मिलेगा।
आइए हम आपको बताते है कंधों के दर्द को दूर करने के आसान आसनों के बारे में
पर्वतासन
यह आसन इंसान को पर्वत के समान गंभीर होना सिखा देता है। ये आसन दिखने में साधारण होने के बाद भी बहुत फायदेमंद है। इससे न सिर्फ कंधे का दर्द दूर होता है बल्कि रीढ़ की हड्डी भी मजबूत होती है। पर्वतासन (Parvatasana) को मुख्य रूप से अष्टांग योग का आसन माना जाता है। ये आसन बेसिक या प्राइमरी लेवल के योगियों के करने के लिए बनाया गया है। इस आसन को करना काफी आसान होता है। फिर भी पर्वतासन के लिए धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं, जरा सी भी असुविधा होने पर इस आसन का अभ्यास न करें इस आसान को करते समय कभी भी कंधे या घुटनों पर दबाव न डालें। अगर कभी असुविधा या दर्द महसूस होता है तो खुद पर जरा भी दबाव न डालें। धीरे-धीरे आसन का अभ्यास बंद कर दें और आराम करें। किसी भी आसन को खुद से करने का प्रयाश कभी भी न करे जब भी कोई नया आसन शुरू करे तो पहली बार किसी योग्य योग गुरु की देखरेख में आपने आसन का अभ्यास शुरू करें।
पर्वतासन करने के फायदे
पर्वतासन न केवल आपके कंधे के दर्द को दूर करेंगे बल्कि इस आसान के और भी अनेक फायदे है। जैसे यह हमारे रक्त संचार को बढ़ाता है, अंगों का कामकाज सुधारता है, बॉडी फ्रेम को बैलेंस करता है, लचीलापन और मजबूती देता है, दिमाग को शांत करता है, पर्वतासन के फायदे सिर्फ यही तक सीमित नहीं हैं। यह योग आसन हमारे शरीर में मौजूद अनेको बीमारियों को ठीक करता है पर्वतासन मानव शरीर से टेंशन को रिलीज करता है। पर्वतासन के अभ्यास से हाथ, कंधे मजबूत होते हैं। यह हमारे शरीर में ऑक्सीजन के लेवल को भी बढ़ता है। जिससे इंसान बेहतर ढंग से काम काज कर पाता है। इस आसन से शरीर के अंदर मौजूद अंगो को भी मसाज मिलता है और वे अच्छे से काम कर पते है।
यह आसन न सिर्फ शरीर को बल्कि यह हमारे मस्तिष्क को को स्वस्त रखता है।
पर्वतासन करने की विधि
इसे करने के लिए पहले सुखासन में बैठ जाएं। दाहिना पैर बाईं जांघ पर और बायां पैर दाईं जांघ पर रहेगा। लगभग कुछ सेकेंड धीमी और गहरी सांस लें। नमस्कार करते हुए हथेलियों को मिलाएं। अब सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊप उठाएं। कोहनी सीधी रखें और नमस्कार की मुद्रा बनाएं। कूल्हों को जमीन पर रखें और हाथों को ऊपर की ओर खींचें। शरीर में गहरे खिंचाव को महसूस करें। कुछ सेकंड के लिए अंतिम मुद्रा बनाए रखें। श्वास बाहर निकालते हुए मुद्रा को छोड़ दें। धीरे-धीरे अपनी प्रारंभिक मुद्रा में वापस लौट आएं।
पर्वतासन करते समय हमे कुछ बातो का ध्यान आवश्यक रूप से रखना चाहिए जैसे पर्वतासन का अभ्यास सुबह के वक्त ही किया जाना चाहिए। अगर आप शाम को यह आसन करना चाहते है तो आसन करने के लिए भोजन को कम से कम आसन से घंटे पहले करना होगा साथ ही आसन करने से पहले आपने शौच कर लिया हो और पेट एकदम खाली हो।
गौमुखासन
गौमुखासन एक ऐसा आसन जिसे करने से बहुत सारी बीमारियों से छुटकारा मिल जाता है। जो लोग नियमित रूप से गौमुखासन करते हैं, उन्हें जीवन में कभी भी रीढ़ की हड्डी का दर्द, कंधे और कमर का दर्द नहीं हो सकता। तो आप समझ सकते हैं, इस एक योगासन को करके आप कितने तरह के दर्द से मुक्ति मिल सकती है क्या आप जानते है की गोमुखासन एक संस्कृत का शब्द है जो दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है। पहला शब्द गौ का अर्थ गाय है और दूसरा शब्द मुख का अर्थ मुंह है। इस आसन का मतलब गाय के मुंह के समान होता है।
गोमुखासन करने के फायदे
गोमुखासन आसन फेफड़ों की बीमारियों के लिए एक बहुत ही अच्छा योगाभ्यास है यह छाती को पुष्ट बनाता है और फेफड़ों की सफाई करते हुए इसकी क्षमता को बढ़ाता है। अगर आपको आपने बांहों की पेशियां को मजबूत बनाना हो, तो इस आसन का अभ्यास जरूर करें। यह रीढ़ को सीधा रखता है के और साथ साथ इसको मजबूत भी बनाता है। यह बवासीर के लिए बहुत ही उपयोगी योगाभ्यास माना जाता है। इस आसन के अभ्यास से आप बहुत सारी परेशानियों से छुटकारा पा सकते हैं जैसे कंधे की जकड़न, गर्दन में दर्द, लैंगिक परेशानियों को दूर करने में यह आसन बहुत ही कारगर है। यह स्त्री रोगों के लिए भी बहुत लाभदायक है। इसके नियमित अभ्यास से आप कमर दर्द की परेशानियों से राहत पा सकते हैं। यह पैर में ऐंठन को कम करता है और पैर की मांसपेशियों को मज़बूत बनाता है।
गोमुखासन करने की विधि
दंडासन में बैठ और इसके बाद अपने बांए पैर को अपने शरीर की ओर खींच के उसे अपने पास ले आय आप एड़ी पर भी बैठ सकते हैं। दाएं पैर को मोड़ कर बाएं पैर के ऊपर इस प्रकार रखें कि दोनों घुटने एक-दूसरे से स्पर्श करते हों। आसन को करने के लिए आप खुले हवादार स्थान पर चटाई बिछा के सुखासन में बैठे। दाएं हाथ को ऊपर उठा कर पीठ की ओर मोड़ें और पीठ के पीछे हाथों को एक दूसरे से पकड़ लें। गर्दन और कमर सीधी रखें। अब दोनों हाथों को खींच के आपस में मिलाने की कोशिश करें। अब इस आसन में कुछ देर तक करे रहें और बार बार सांस लें। जब आपको इस स्थिति में असुविधा होने लगे तो आप पुनः अपनी प्रारंभिक स्थिति में आयें। इसके लिए अपने दोनों को हाथों को खोलें और पैरों को सीधा करें।
गोमुखासन करने से पहले आपको कुछ बातो का ध्यान रखना आवश्यक है कई लोगों के दोनों कूल्हे समान रूप से फर्श पर नहीं टिक पाते हैं। इस वजह से घुटने एक दूसरे के ऊपर रखने में मुश्किल हो सकती है और रीढ़ की हड्डी ठीक से सीधी नहीं हो पाती। अगर किसी के कंधो में लचीलापन कम हो तो उसे हाथों को पकड़ने में कठिनाई का सामना करना पर सकता हैं। अगर आपको कंधे, गर्दन, घुटने में दर्द है तो आप इस आसन को ना करें। अगर आप गर्भवती महिला हैं तो पहले के तीन माह में इस आसन को ना करें। रीढ़ की हड्डी में किसी भी प्रकार की समस्या या दर्द हो तो इस आसन को ना करें। अगर आप पीठ दर्द से पीड़ित हैं तो इस आसन को करने से पहले आप डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।