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रतलाम की बालम ककड़ी और गराडू को मिला जीआई टैग, किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

रतलाम की प्रसिद्ध बालम ककड़ी और रतलामी गराडू को “मालवी गराडू” नाम से जीआई टैग मिला है। यह उपलब्धि स्थानीय किसानों के लिए आर्थिक अवसर बढ़ाने और उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे पहले जिले की रियावन लहसुन को भी जीआई टैग मिल चुका है।

By: Nivedita 
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रतलाम की बालम ककड़ी और गराडू को मिला जीआई टैग, किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

रतलाम जिले की प्रसिद्ध बालम ककड़ी और रतलामी गराडू को अब “मालवी गराडू” के नाम से भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्राप्त हो गया है। यह उपलब्धि जिले के कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मंत्री चेतन्य काश्यप के प्रयासों से मिली सफलता

एमएसएमई मंत्री चेतन्य काश्यप के विशेष प्रयासों के परिणामस्वरूप यह उपलब्धि हासिल हुई है। राज्य सरकार द्वारा जिला स्तर पर प्रमुख उत्पादों को जीआई टैग दिलाने के निर्देशों के तहत रतलाम के इन पारंपरिक उत्पादों को यह मान्यता प्रदान की गई है।

पहले भी मिल चुका है रियावन लहसुन को जीआई टैग

उल्लेखनीय है कि इससे पहले रतलाम जिले की प्रसिद्ध रियावन लहसुन को भी जीआई टैग मिल चुका है। इसके साथ ही अब जिले के उद्यानिकी उत्पादों की विशिष्ट पहचान और मजबूत हो गई है।

 

मालवी गराडू के नाम से मिली भौगोलिक पहचान

किसानों के लिए बढ़ेंगे आर्थिक अवसर

जिले में बालम ककड़ी लगभग 100 हेक्टेयर और गराडू लगभग 120 हेक्टेयर क्षेत्र में उत्पादित की जाती है। इन फसलों से बड़ी संख्या में किसान जुड़े हुए हैं। जीआई टैग मिलने से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने, उत्पादन क्षेत्र के विस्तार और निर्यात की संभावनाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

 

रतलाम की विशिष्ट कृषि पहचान को मिली मान्यता

रतलाम की जलवायु, मिट्टी और पारंपरिक कृषि पद्धतियों के कारण यहां के उत्पाद अपनी अलग पहचान रखते हैं। बालम ककड़ी और गराडू अपने स्वाद, गुणवत्ता और पोषण गुणों के लिए पहले से ही प्रसिद्ध रहे हैं। अब जीआई टैग इस विशिष्टता को आधिकारिक मान्यता प्रदान करता है।

संयुक्त प्रयासों का परिणाम

उपसंचालक मंगलसिंह डोडवे ने बताया कि यह उपलब्धि किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, उद्यानिकी विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। इससे न केवल जिले की कृषि पहचान को नई ऊंचाई मिलेगी, बल्कि स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में भी मजबूती मिलेगी।

 

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