मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को हिरनकी गांव का दौरा किया और पूसा रिसर्च इंस्टीट्यूट के तैयार किये गए बॉयो डीकंपोजर घोल के छिड़काव का पराली पर पड़ने वाले प्रभावों का जायजा लिया। हिरनकी गांव के उसी खेत मे अरविंद केजरीवाल ने दौरा किया जहां से 13 अक्टूबर को दिल्ली में छिड़काव की शुरुआत की गई थी।
इसकी जानकारी खुद अरविन्द केजरीवाल ने ट्वीट करके दी। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा दिल्ली के खेतों में बायो-डिकम्पोज़र तकनीक कामयाब रही। पराली खाद में बदल गई है जिससे दिल्ली का किसान संतुष्ट भी है और खुश भी। हमारे किसान पराली जलाना नहीं चाहते। हमने उनको समाधान भी दिया है और सुविधा भी, अब दूसरे राज्यों को भी बहाने छोड़ अपने किसानों को ये सुविधा देनी चाहिए।
दिल्ली के खेतों में बायो-डिकम्पोज़र तकनीक कामयाब रही। पराली खाद में बदल गई है जिससे दिल्ली का किसान संतुष्ट भी है और खुश भी।
हमारे किसान पराली जलाना नहीं चाहते। हमने उनको समाधान भी दिया है और सुविधा भी, अब दूसरे राज्यों को भी बहाने छोड़ अपने किसानों को ये सुविधा देनी चाहिए। pic.twitter.com/4mB7XK7gKK
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) November 4, 2020
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में बॉयो डिकम्पोज़र तकनीक के इस्तेमाल पर कहा, “हर साल पराली के जलने की वजह से धुआं उठता है। अभी भी देखेंगे तो आसमान में धुआं है।
सैटेलाइट की तस्वीरों से यह लगता है कि आसपास के राज्यों में खासकर पंजाब में काफी ज़्यादा पराली जलाई जा रही है। एक तरफ किसान खुद ही दुखी है। उसको और पूरे गांव को कितना प्रदूषण बर्दाश्त करना पड़ता है।
Delhi leads the way in providing an alternative to stubble burning. pic.twitter.com/UAJJEWcLRM
— CMO Delhi (@CMODelhi) November 5, 2020
आसपास के राज्यों की सरकारों ने उनके लिए कुछ भी नहीं किया। किसान अपनी पराली जलाने के लिए मजबूर हुआ और वह पूरा धुआं उत्तर भारत में फैल जाता है। पूसा इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर दिल्ली सरकार ने इस बार एक अहम कदम उठाया है दिल्ली के सारे खेतों के अंदर बायो डीकंपोजर केमिकल का छिड़काव किया गया।
13 तारीख को छिड़काव किया था और आज जब हम यहां खड़े हैं तो पूरी पराली गल चुकी है। खाद में कन्वर्ट हो चुकी है और अब इसकी बुआई का काम शुरू हो सकता है।”
With the success of the newly developed bio-decomposing technique, the Delhi government has provided a sustainable alternative to stubble burning in the national capital.
The arrangements for spraying the solution on the farmlands have been made free of cost by the Delhi govt. pic.twitter.com/Q7YyWjoSWi
— CMO Delhi (@CMODelhi) November 4, 2020
आप को बता दे कि दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित प्राधिकरण ने पंजाब और हरियाणा को पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए तत्काल कदम उठाने को कहा था। इन दोनों राज्यों में जलने वाली पराली सर्दी के मौसम में दिल्ली में वायु प्रदूषण का बड़ा कारण बनती है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक दिल्ली के वायु प्रदूषण का बड़ा कारण पराली जलाना है। बीते साल इस धुएं के कारण नवंबर में पीएम स्तर 44 फीसदी पहुंच गया था।