{ श्री अचल सागर जी महाराज की कलम से }
पुरे संसार में प्रभाव मानव की योग्यता का प्रतीक है और यही कारण है कि व्यक्ति किसी ना किसी चीज़ पर अपना प्रभाव रखता ही है। जिसके कारण उसे समाज में मान सम्मान प्राप्त हो जाता है।
कहने के लिए एक विद्यालय में बहुत से छात्र होते है लेकिन बहुत कम छात्र ऐसे होते है जिनको पुरे विद्यालय के बच्चे और शिक्षक जानते है। ऐसा कई कारणों से हो सकता है।
लेकिन इसके पीछे जो सबसे बड़ा कारण होता है वो है उस बालक का किसी टॉपिक पर प्रभाव होना। कोई ना कोई उसके अंदर ऐसी बात होती है जो उसे दूसरों से अलग बना देती है जिसके कारण पुरे शिक्षक उस बच्चे को जान जाते है।

कहा भी जाता है कि प्रभावशाली होना एक अच्छी परंपरा के लिए जरुरी भी होता है। क्योंकि अगर एक पिता की तरह उसका पुत्र अगर प्रभावशाली नहीं हुआ तो ये उस परिवार के लिए अच्छी बात नहीं होती है।
लेकिन अगर आज के समय की बात करे तो एक ऐसा व्यक्ति जो दूसरों की मदद करता हो और हमेशा दूसरों का सहारा बनता हो उसे प्रभावशाली कहा जाएगा। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि आज इस कलियुग में सब स्वार्थी है।
ऐसे में अगर कोई एशिया व्यक्ति है जो हमेशा संकट की घड़ी में दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहता है तो उससे बड़ा प्रभावशाली व्यक्ति समाज में कोई नहीं हो सकता है।