रिपोर्ट:सत्यम दुबे
नई दिल्ली: तीनों नये कृषि कानूनों को लेकर सरकार के विरोध में किसानों द्वारा जारी आंदोलन का गुरुवार को 71वां दिन है। किसान आंदोलन दिन पर दिन तेज ही होता जा रहा है। गणतंत्र दिवस के दिन ट्रैक्टर परेड के नाम पर हुई हिंसा के बाद आंदोलन कुछ कमजोर पड़ा था। लेकिन भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत के ऑसूओं ने आंदोलन में एक बार फिर जान फूंक दी है। किसानों द्वारा सरकार के विरोध में किये जा रहे इस आंदोलन में अब इंटरनेशनल बयानबाजी भी सामने आने लगी है।
कृषि कानूनों के विरोध पर हो रहे आंदोलन में अमेरिका ने भी अपनी राय रखी है। इस मामले में अमेरिका का कहना है कि “किसी भी विवाद या प्रदर्शन को लेकर दोनों पार्टियों में चर्चा होनी चाहिए। बातचीत से ही हल निकलना चाहिए। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि कृषि क्षेत्र को बेहतर करने के किसी भी फैसले का अमेरिका स्वागत करता है।“
अमेरिकी विदेश मंत्रालय़ के प्रवक्ता ने आगे कहा कि “हमें लगता है कि शांतिपूर्ण तरीके से जारी प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा है। भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी बात को कहा है। अगर दोनों पक्षों में मतभेद है तो उसे बातचीत के जरिए हल करना चाहिए।“
सरकार द्वारा इंटरनेट बंद करने के बाद मचे बवाल पर अमेरिका ने कहा कि “हमें लगता है कि किसी भी जानकारी को आम लोगों तक पहुंचाना, जिसका इंटरनेट भी एक हिस्सा है, वो एक अच्छे लोकतंत्र का हिस्सा है।“