अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार को दिखाया आईना
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को कहा कि ‘किसान आंदोलन’ भारत के इस लोकतांत्रिक मूल्य की पुनर्स्थापना का भी आंदोलन है कि सरकार के सभी फैसलों में आम जनता की भागीदारी होनी चाहिए। सरकार की मनमानी नहीं।
इसीलिए भारत में लोकतंत्र को बचाने के लिए देश का हर नागरिक भी आज ‘किसान आंदोलन’ के साथ भावात्मक रूप से जुड़ता जा रहा है। अखिलेश ने ये बातें ट्वीट कर कहीं।
अखिलेश यादव को सोमवार को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया था, जब उनके नेतृत्व में पार्टी के कार्यकर्ता आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में शहर के बीचों-बीच धरने पर बैठने के लिए एक सुरक्षा घेरा तोड़कर आए थे।
कोविड-19 महामारी के मद्देनजर अखिलेश यादव और अन्य सपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ शांति भंग करने और महामारी रोग अधिनियम के तहत गौतम पल्ली पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था।
‘किसान आंदोलन’ भारत के इस लोकतांत्रिक मूल्य की पुनर्स्थापना का भी आंदोलन है कि सरकार के सभी फैसलों में आम जनता की भागीदारी होनी चाहिए; सरकार की मनमानी नहीं.
इसीलिए भारत में लोकतंत्र को बचाने के लिए देश का हर नागरिक भी आज ‘किसान आंदोलन’ के साथ भावात्मक रूप से जुड़ता जा रहा है. pic.twitter.com/tLc2SPIwP2
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) December 10, 2020
हिरासत में लिए जाने के बाद अखिलेश ने ट्वीट करते हुए लिखा था, खुद समारोह कर रही व विपक्ष को कोरोना के नाम पर गिरफ्तार कर रही भाजपा के दोहरे मानदंड जनता देख रही है। भाजपा हताश है क्योंकि किसानों के साथ अब जनता भी जुड़ गयी है। जब सत्ता दमनकारी हो जाती है तो आंदोलन को क्रांति बनते देर नहीं लगती। हम भी देखते हैं कि भाजपा कितने दिन रोकेगी।
भाजपा सरकार बुजुर्ग किसानों को बार-बार, अलग-अलग जगह पर बुलाकर बिना किसी नतीजे के अपमानित-सा कर रही है. देश की जनता आक्रोशित होकर सब देख रही है. भाजपा कुछ पूँजीपतियों के स्वार्थ को पूरा करने के लिए बिचौलिया बनना बंद करे.
भाजपाई अहंकार की सत्ता नहीं चलेगी! #नहीं_चाहिए_भाजपा
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) December 9, 2020
अखिलेश ने कहा, भाजपा सरकार बुजुर्ग किसानों को बार-बार, अलग-अलग जगह पर बुलाकर बिना किसी नतीजे के अपमानित-सा कर रही है। देश की जनता आक्रोशित होकर सब देख रही है। भाजपा कुछ पूंजीपतियों के स्वार्थ को पूरा करने के लिए बिचौलिया बनना बंद करे। भाजपाई अहंकार की सत्ता नहीं चलेगी