आगर मालवा जिले में स्थित मोती सागर तालाब किनारे के पूरा फॉर्म पशु प्रजनन केंद्र की बदहाल स्थिति ने पशुपालन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। केंद्र में कई गोवंश लंपी वायरस से संक्रमित पाए गए हैं, जबकि इलाज, देखरेख और निगरानी की व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। स्थिति तब और भयावह हो गई, जब केंद्र पर कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों ने वेतन न मिलने के विरोध में हड़ताल शुरू कर दी।
पशु प्रजनन केंद्र की ताजा तस्वीरें वहां की अव्यवस्था और लापरवाही की पोल खोल रही हैं। कई गोवंश लंपी वायरस से गंभीर रूप से प्रभावित हैं, लेकिन-
न पर्याप्त दवाइयाँ उपलब्ध हैं,
न पशुओं की निगरानी हो पा रही है,
और न ही संक्रमण रोकने के लिए आवश्यक प्रबंध किए गए हैं।
गोवंशों की हालत प्रतिदिन बिगड़ रही है, जबकि उनके उपचार के लिए न्यूनतम संसाधन भी उपलब्ध नहीं दिखाई दे रहे।
केंद्र में कुल 22 आउटसोर्स कर्मचारी तैनात हैं, जिन्हें केवल 7,000 रुपये मासिक वेतन मिलता है। कर्मचारियों का आरोप है कि- उन्हें समय पर वेतन नहीं मिलता, कई महीनों से भुगतान लंबित है, मजबूरी में उन्हें पिछले तीन दिनों से हड़ताल करनी पड़ी।
कर्मचारियों के न होने से- गोवंशों की देखरेख, भोजन व्यवस्था, साफ-सफाई, और उपचार सेवाएँ पूरी तरह रुक गई हैं। केंद्र परिसर में गंदगी बढ़ चुकी है, जिससे वायरस और अधिक फैलने का खतरा खड़ा हो गया है।
नियमों के अनुसार ऐसी स्थिति में अतिरिक्त स्टाफ, मेडिकल सपोर्ट और संक्रमण नियंत्रण की प्रक्रिया लागू की जानी चाहिए, लेकिन पूरा फॉर्म केंद्र में इसके बिल्कुल विपरीत हालात नजर आ रहे हैं। अव्यवस्था और स्टाफ की कमी के चलते गोवंशों की सेहत और जीवन दोनों खतरे में हैं।
पशुपालन विभाग के अनुसार- “लंपी वायरस से ग्रसित गोवंशों के सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दे दी गई है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।”
हालाँकि जमीनी स्तर पर अभी भी हालात में सुधार नहीं दिख रहा।
इस पूरे प्रकरण ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं-
क्या विभाग बीमार गोवंशों के इलाज की जिम्मेदारी समय रहते निभाएगा?
क्या आउटसोर्स कर्मचारियों की उचित मांगों पर ध्यान दिया जाएगा?
क्या लापरवाही के लिए किसी पर कार्रवाई होगी?
स्थिति हर घंटे गंभीर होती जा रही है और समय रहते कार्रवाई न होने पर बड़े नुकसान का खतरा बना हुआ है।