समय भी कभी क्या क्या पल दिखा देता है ! 9/11 के हमले के बाद जिस तालिबान को अमेरिका खत्म करने की सोच रहा था और 2001 के बाद जिस अमेरिका ने अपनी पूरी ताकत और सेना अफगानिस्तान में झोंक दी थी वही अमेरिका आज तालिबान से शांति वार्ता कर रहा है।
वैसे इस पूरी वार्ता में दिलचस्पी तो भारत की भी है लेकिन अमेरिका के विदेश मंत्री का तालिबान के नेता के साथ एक ही मंच पर खड़े होकर फोटो खिंचवाना, यह अपने आप में बहुत कुछ कहता है।
शायद अमेरिका को अब इस बात का यकीन होने लगा है कि वो तालिबान को खत्म नहीं कर सकता है और यही कारण है कि कतर की राजधानी दोहा में अफगानिस्तान और तालिबान के बीच वार्ता चल रही है।
आपको बता दे कि इस वार्ता के उद्घाटन समारोह में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी ऑनलाइन हिस्सा लिया है और भारत भी कहीं ना कहीं इस एरिया में शांति देखना चाहता है और उसका कारण है तालिबान।
दरअसल सब इस बात को जानते है की अगर अफगानिस्तान में तालिबान मजबूत हुआ तो वो हमारे लिए ठीक नहीं होगा क्यूंकि वो पाकिस्तान के करीब दिखाई देता है। विदेश मंत्री में यह भी कहा कि भारत भी अफ़ग़ानिस्तान-तालिबान शांति वार्ता में ख़ासी दिलचस्पी रखता है और चाहता है कि दोनों के बीच बातचीत सफल साबित हो।
इसके अलावा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने वार्ता का स्वागत करते हुए कहा था कि हमारे एकजुट प्रयासों से वो दिन आ गया जिसका अफ़ग़ानिस्तान के लोगों को सालों से इंतज़ार था।