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अफगानी पत्रकारों ने खोली तालिबान की पोल, घर पर किया जा रहा हमला; रिपोर्ट बना रहे पत्रकार को पीटा

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद स्थानीय नागरिकों का जीना दुभर हो गया है, जिससे वे अब अपने मुल्क छोड़ना चाह रहे है। इसे लेकर वे विभिन्न देशों से मदद की गुहार लगा रहे है। आपको बता दें कि अफगानिस्तान (Afghanistan) पर कब्जा जमाने के बाद तालिबान (Taliban) ने जब अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की, तब उसने सभी को आजादी से काम करने देने का वादा किया और महिलाओं को भी काम करने की छूट देने की बात कही।

By: Amit ranjan 
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अफगानी पत्रकारों ने खोली तालिबान की पोल, घर पर किया जा रहा हमला; रिपोर्ट बना रहे पत्रकार को पीटा

नई दिल्ली : अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद स्थानीय नागरिकों का जीना दुभर हो गया है, जिससे वे अब अपने मुल्क छोड़ना चाह रहे है। इसे लेकर वे विभिन्न देशों से मदद की गुहार लगा रहे है। आपको बता दें कि अफगानिस्तान (Afghanistan) पर कब्जा जमाने के बाद तालिबान (Taliban) ने जब अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की, तब उसने सभी को आजादी से काम करने देने का वादा किया और महिलाओं को भी काम करने की छूट देने की बात कही।

हालांकि इसके कुछ ही दिन बाद अफगानिस्तान से कई ऐसे दृश्य सामने आने लगे, जिसने उसके तमाम वादे और दावों की धज्जियां उड़ा दी। अफगानिस्तान के अलग-अलग इलाकों में पत्रकारों (Journalists) को पीटा जा रहा है, किसी के घर पर हमला किया जा रहा है और किसी को सिर्फ काम से इसलिए वापस लौटा दिया जा रहा है क्योंकि वह महिला है। इससे आहत अफगानिस्तान के पत्रकारों ने तालिबानी शासन की पोल खोलकर रख दी है।

रिपोर्ट बना रहे पत्रकारों को पीटा

अफगानिस्तान के रेडियो टेलिविजन अफगानिस्तान (RTA) के साहर नासारी के मुताबिक, कुछ दिनों में तालिबान की कथनी और करनी में फर्क दिखने लगा है। तालिबानी लड़ाकों ने साहर के कैमरा तोड़ दिया, उसके साथी को मारा। ये सब काबुल में हुआ जब दोनों एक रिपोर्ट तैयार कर रहे थे।

जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में तालिबान द्वारा अलग-अलग हिस्सों में अफगानी पत्रकारों को निशाना बनाया गया है और उनके घर पर रेड डाली गई है। अफगानिस्तान की एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक, तालिबान ने उनकी करीब 18 महिला रिपोर्टर्स को घर से काम करने के लिए कहा है, जबतक नई सरकार के नियम तय नहीं हो जाते हैं।

महिला एंकर्स के लिए नई चुनौती

अफगानिस्तान की मशहूर न्यूज प्रेजेंटर शबनम दावरां को भी उनकी नौकरी से हटा दिया गया है, क्योंकि अब महिला एंकर्स के लिए काम करना मुश्किल है। बता दें कि तालिबान ने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि वह किसी को काम करने से नहीं रोकेगा, लेकिन मीडिया को इस्लामिक नियमों के मुताबिक ही काम करना होगा।

तालिबान द्वारा बीते दिनों ये भी कहा गया था कि महिलाएं उनकी सरकार में शामिल हो सकती हैं। लेकिन इस वादे से इतर अफगानिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में तालिबानियों द्वारा महिलाओं पर अत्याचार किया जा रहा है। तालिबान के इस अत्याचार के खिलाफ महिलाएं सड़कों पर भी उतरना शुरू हो गई हैं।

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