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शर्मनाक : कोविड जांच के लिए लाइन में लगे-लगे ही गर्भवती महिला ने दिया ह्वीलचेयर पर बच्चे को जन्म, अस्पताल ने मांगा था टेस्ट रिपोर्ट…

By: Amit ranjan 
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शर्मनाक : कोविड जांच के लिए लाइन में लगे-लगे ही गर्भवती महिला ने दिया ह्वीलचेयर पर बच्चे को जन्म, अस्पताल ने मांगा था टेस्ट रिपोर्ट…

नई दिल्ली : कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। एक तरफ जहां रोजाना हजारों लोगों की सांसे थम रहीं हैं। वहीं दूसरी तरफ सरकारी सिस्टम की लापरवाही भी रूकने का नाम नहीं ले रही है। एक ऐसी ही शर्मनाक तस्वीर सामने आई है छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला अस्पताल से, जो दिखाती है कि कैसे इस महामारी के भयानक दौर में इंसानियत मर गई है। यहां प्रसव पीड़ा से तड़प रही प्रसूता को एडमिट करने से पहले स्वास्थ्य कर्मचारियों ने उसे कोरोना टेस्ट कराने को कहा गया। जिसका नतीजा यह हुआ कि कोविड जांच के लिए लाइन में लगी गर्भवती ने लाइन में ही बच्चे को जन्म दे दिया।

दरअसल, यह अमानवीय तस्वीर कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर की है। सोमवार को नकटीखार गांव की रहने वाली गर्भवती महिला गनेशिया बाई मंझवार (27) प्रसव पीड़ा होने के बाद पति देवानंद मंझवार साथ पहुंची हुई थी। जिसके बाद वहां पर तैनात नर्स और कर्मचारियों ने महिला को भर्ती करने की बजाय पहले कोरोना जांच कराने को कहा। पति मिन्नतें करता रहा, लेकिन उसकी एक नहीं सुनी गई।

पति काफी देर तक जांच केंद्र के बाहर गर्भवति महिला को व्हीलचेयर पर बैठाकर लाइन में खड़ा रहा। जहां पत्नी दर्द से तड़पती रही, लेकिन वह सरकारी सिस्टम के आगे बेबस नजर आया। आलम यह हुआ कि महिला ने अपनी बारी का इंतजार करते-करते ही बच्चे को जन्म दे दिया। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का नतीजा यह रहा कि इस परिस्थिति में भी महिला को परेशानियों का सामना करना पड़ा।

पति देवानंद ने बताया कि व्हीलचेयर पर डिलीवरी होने के बाद कतार में खड़े सभी लोग हैरान हो गए। सभी लोग अस्पताल के खिलाफ गुस्सा करने लगे। फिर कहीं जाकर पत्नी को आनन-फानन में इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया  गया।

बाद में कोरोना जांच की गई, दोनों की रिपोर्ट निगेटिव आई है, मां और बच्चे दोनों स्वास्थ्य हैं। आपको बता दें कि महिला को शादी के चार साल बाद पहले बच्चे का जन्म हुआ है। वहीं इस मामले पर सिविल सर्जन डॉ.अरुण तिवारी ने कहा कि पहले भी गर्भवती महिला पॉजिटिव मिल चुकी हैं, इसलिए कोरोना की जांच जरूरी है।

वहीं पति देवनंद ने बताया कि किसी तरह मैं पत्नी को प्रसव के लिए जिला अस्पताल लाया था। जिसके बाद यहां की नर्स और डॉक्टरों ने कोरोना जांच कराने का बोल दिया। कोरोना जांच केंद्र सुबह बंद होने के कारण दूसरे निजी अस्पताल लेकर गया। लेकिन वहां भी लंबी लाइन थी। दर्द से कराह रही पत्नी को लेकर घंटों भटकना पड़ा। आखिरकार लाइन में ही पत्नी ने बच्चे को जन्म दिया। अगर जिला अस्पताल में ही जांच हो जाती तो मुझे भटकना नहीं पड़ता।

अब सवाल यह है कि जब कोई मरीज किसी असहनीय दर्द और पीड़ा से कराह रहा है, या वह बहुत गंभीर है, तो क्या ऐसी स्थिति में अस्पताल प्रशासन उससे उस स्थिति में कोरोना का टेस्ट कराने को कहेगी। अगर हां, तो इस दौरान उस मरीज के साथ कुछ अनहोनी हो जाती है तो उसका जिम्मेवार कौन होगा, सरकार, प्रशासन या अस्पताल प्रशासन।

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