मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में आशूरा के अवसर पर शिया मुस्लिम समाज ने शहीदे-ए-कर्बला हजरत इमाम हुसैन और हजरत अब्बास इब्ने अली की याद में पारंपरिक मातमी जुलूस निकाला। पूरे मार्ग पर “या हुसैन” और “या अब्बास” की सदाओं के बीच अकीदतमंदों ने मातम कर कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
जुलूस सिंधीपुरा स्थित इमाम बारगाह से शुरू होकर विभिन्न अशूरखानों और शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए निर्धारित स्थान पर संपन्न हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में शिया समाज के लोग, युवा और बच्चे शामिल हुए और धार्मिक परंपराओं का पालन किया।
मातमी जुलूस के दौरान वक्ताओं ने कर्बला की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ अपने परिवार सहित सर्वोच्च बलिदान देकर इंसानियत, न्याय और भाईचारे का संदेश दिया, जो आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
धार्मिक आयोजन के सफल संचालन में समाज के वरिष्ठजनों के साथ युवाओं ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। आयोजन समिति के सदस्यों ने जुलूस की व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित किया, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

आशूरा के अवसर पर प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। मातमी जुलूस के दौरान अकीदतमंदों ने देश में अमन, भाईचारे और इंसानियत की दुआ मांगी। यह आयोजन शहर की गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बनकर सामने आया।