कोरोना वायरस संकट के बीच संसद के मॉनसून सत्र की तैयारियां अब शुरु हो गयी है। ये काफी पहले होना था लेकिन कोरोना के संकट के कारण इसे अब किया जा रहा है लेकिन इस बार सरकार ने कुछ अहम बदलाव कर दिए है।
आपको बता दे कि इस बार मानसून सत्र में प्रश्न काल नहीं होगा और उसी को लेकर विपक्ष सरकार के ऊपर भड़क गया है। उनका कहना है कि जब मानसून सत्र में प्रश्नकाल ही नहीं होगा तो ये कैसा सत्र है ?
2/2 Questioning the government is the oxygen of parliamentary democracy. This Govt seeks to reduce Parliament to a notice-board & uses its crushing majority as a rubber-stamp for whatever it wants to pass. The one mechanism to promote accountability has now been done away with.
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) September 2, 2020
इसी को लेकर कांग्रेस के नेता शशि थरुर ने तो ट्वीट भी किया है और लोगों के सामने अपनी बात रखी है। उन्होंने आज ट्वीट करते हुए लिखा कि मैंने चार महीने पहले कहा था कि मजबूत नेता महामारी को लोकतंत्र को खत्म करने के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं।
आगे उन्होंने लिखा कि संसद सत्र का नोटिफिकेशन ये बता रहा है कि इस बार प्रश्नकाल नहीं होगा. हमें सुरक्षित रखने के नाम पर ये कितना सही है?
कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने भी इस मसले पर ट्वीट किया और लिखा कि ऐसा कैसे हो सकता है? स्पीकर से अपील है कि वो इस फैसले को दोबारा देखें। प्रश्नकाल संसद की सबसे बड़ी ताकत है।
इसके अलावा बाकी पार्टियों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को जमकर घेरने की रणनीति बना ली है।