Home kolkata योगी सरकार ने राम मंदिर आंदोलन में बलिदान देने वाले कोठारी बंधुओं को दिया सम्मान, आयोध्या में सड़क होगी इनके नाम

योगी सरकार ने राम मंदिर आंदोलन में बलिदान देने वाले कोठारी बंधुओं को दिया सम्मान, आयोध्या में सड़क होगी इनके नाम

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रिपोर्ट: सत्यम दुबे

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राम मंदिर आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति देकर आंदोलन को और मजबूती प्रदान करने वाले कोठारी बंधुओं के नाम से अयोध्या में एक सड़क का नाम रखने का फैसला किया है। इस बात की घोषणा उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने की। सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय के बाद अयोध्य़ा में भव्य श्री राम मंदिर के निर्माण का रास्ता खुला था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधि-विधान से पूजा कर मंदिर निर्माण की पहली ईंट रखी थी। जिसके बाद श्री राम मंदिर निर्माण का कार्य जोरों से चल रहा है। आपको बता दें कि इसी दिन के लिए कोठारी बंधुओं ने अपना बलिदान दिया था। 30 अक्टूबर साल 1990 को अयोध्या की सरजमीं पर कोठारी बंधुओं की ह्त्या कर दी गई थी। कोठारी बंधू मूल रूप से पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे। दोनों भाइयों का नाम राम और शरद कोठारी था, कारसेवा के दौरान दोनों भगवा ध्वज के साथ विवादित ढाँचे के ऊपर चढ़े थे। तब उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी। उन्होने गोलियों से भुनवा दिया था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन को पश्चिम बंगाल से जोड़ते हुए कोठारी भाइयों के बलिदान को याद करने का आग्रह किया था। इस दौरान सीएम योगी ने कहा, अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के लिए कोठारी भाइयों ने अपना बलिदान दिया। उनका एक ‘स्मारक’ आज भी अयोध्या में है। अब उनके नाम सड़क भी बनेगी और राम मंदिर बनाने का उनका सपना पीएम नरेंद्र मोदी पूरा कर रहे हैं।

आइये जानते हैं क्या हुआ था…

22 अक्टूबर की रात को 22 साल के रामकुमार और 20 साल के शरद कोठारी ने 22 कोलकाता से ट्रेन पकड़ी अयोध्या के लिए, लेकिन बनारस में दोनो भाई आकर रुक गए। कार सेवा आंदोलन को देखते हुए तत्कालीन मुलायम सरकार ने गाड़ियॉं रद्द कर दी थी। लेकिन उन दोनो भाइयो के कार सेवा आंदोलन में हिस्सा लेना था लेना था। उन्होने टैक्सी से आजमगढ़ के फूलपुर कस्बे तक आए। यहॉं से सड़क रास्ता भी बंद था। 25 तारीख से दोनो भाइयो ने 200 किलोमीटर पैदल चलकर 30 अक्टूबर की सुबह अयोध्या पहुंचे।

इसके बाद 30 अक्टूबर को ही विवादित जगह पहुंचने वाले शरद पहले आदमी थे। विवादित इमारत के गुंबद पर चढ़कर उन्होंने पताका फहराई। इसके बाद दोनों भाई दिगंबर अखाड़े की तरफ से हनुमानगढ़ी की ओर बढ़ रहे थे। इसी दौरान सुरक्षाबलों ने फायरिंग शुरू कर दी, दोनों भाई एक घर में छुप गए, सुरक्षाबल के एक जवान ने शरद कोठारी को घर से बाहर निकालक्र सड़क पर गोली मार दी, छोटे भाई के साथ ऐसा होते देख रामकुमार भी कूद पड़े। इंस्पेक्टर की गोली रामकुमार के गले को भी पार कर गई। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी।

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