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युवा सबसे ज्यादा शिकार क्यों? भारत में 60% मानसिक रोगी 35 साल से कम उम्र के

विशेषज्ञों के मुताबिक, 25 वर्ष की आयु तक एंग्जायटी, ध्यान की समस्या (ADHD), खाने से जुड़े विकार जैसी समस्याओं के अधिकांश मामले सामने आ चुके होते हैं। वहीं, डिप्रेशन के केस भी अब पहले की तुलना में कहीं कम उम्र में देखने को मिल रहे हैं।

By: Abhinav Tiwari 
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युवा सबसे ज्यादा शिकार क्यों? भारत में 60% मानसिक रोगी 35 साल से कम उम्र के

भारत में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक गंभीर तस्वीर सामने आ रही है। इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी के आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब 60 फीसदी मानसिक बीमारियां 35 वर्ष से कम उम्र के लोगों में पाई जा रही हैं। यह संकेत करता है कि मानसिक स्वास्थ्य की समस्या अब केवल वयस्कों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बच्चे, किशोर और युवा तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं।

कम उम्र में ही शुरू हो रही हैं मानसिक बीमारियां

इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी से जुड़े आंकड़ों के आधार पर की गई एक स्टडी, जो मॉलिक्यूलर साइकियाट्री पत्रिका में प्रकाशित हुई, बताती है कि मानसिक विकार बहुत कम उम्र में ही शुरू हो जाते हैं। स्टडी के अनुसार-

  • 34.6% मानसिक विकार 14 वर्ष की आयु से पहले

  • 48.4% विकार 18 वर्ष की आयु से पहले

  • 62.5% विकार 25 वर्ष की आयु तक शुरू हो जाते हैं

इन आंकड़ों से साफ है कि अधिकांश मामलों में मानसिक बीमारी वयस्कता से पहले ही शुरुआत कर देती है और धीरे-धीरे व्यक्ति की सेहत, पढ़ाई और करियर को प्रभावित करती है।

25 साल तक सामने आ जाते हैं कई बड़े मानसिक विकार

विशेषज्ञों के मुताबिक, 25 वर्ष की आयु तक एंग्जायटी, ध्यान की समस्या (ADHD), खाने से जुड़े विकार जैसी समस्याओं के अधिकांश मामले सामने आ चुके होते हैं। वहीं, डिप्रेशन के केस भी अब पहले की तुलना में कहीं कम उम्र में देखने को मिल रहे हैं। इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी ने चेतावनी दी है कि यदि कम उम्र में शुरू होने वाले मानसिक विकारों का समय पर इलाज न हो, तो ये जीवनभर की गंभीर समस्या बन सकते हैं।

पढ़ाई और करियर की उम्र में बिगड़ रही मानसिक सेहत

जब यह सामने आता है कि 60 प्रतिशत मानसिक बीमारियां 35 साल से कम उम्र के लोगों को हो रही हैं, तो चिंता और बढ़ जाती है। यही वह उम्र होती है जब युवा- पढ़ाई कर रहे होते हैं, करियर की नींव रख रहे होते हैं, समाज और परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहे होते हैं| कई अध्ययनों से संकेत मिलता है कि 2011 से 2021 के बीच 18 से 25 वर्ष की उम्र के युवाओं में बार-बार होने वाले मानसिक तनाव के मामलों में 101.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

कम उम्र में मेंटल हेल्थ क्यों खराब हो रही है?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में युवाओं की मानसिक सेहत बिगड़ने के पीछे कई कारण हैं-

1. समय पर इलाज और जागरूकता की कमी

डॉ. देसाई के मुताबिक, युवावस्था में शुरू होने वाले मानसिक विकार यदि जल्दी पहचाने न जाएं और इलाज न मिले, तो ये लंबे समय तक बने रहते हैं। इसका असर सिर्फ व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है।

2. तेज सामाजिक बदलाव

आज का युवा तेजी से बदलते समाज में जी रहा है। पढ़ाई, करियर और रिश्तों को लेकर अनिश्चितता मानसिक दबाव बढ़ा रही है।

3. डिजिटल तुलना और सोशल मीडिया

सोशल मीडिया पर दूसरों से लगातार तुलना, दिखावटी सफलता और लाइफस्टाइल युवाओं में हीन भावना और तनाव पैदा कर रही है।

4. अकेलापन

डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ने के बावजूद युवाओं में अकेलापन बढ़ा है, जो मानसिक बीमारियों का बड़ा कारण बन रहा है।

मेंटल हेल्थ को बेहतर कैसे रखें?

मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए विशेषज्ञ कुछ आसान लेकिन प्रभावी उपाय सुझाते हैं-

  • रोज एक ही समय पर सोना और जागना

  • रोजाना एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल करना

  • नियमित रूप से योग और ध्यान करना

  • सोशल मीडिया का सीमित उपयोग

  • समस्या महसूस होते ही काउंसलिंग या विशेषज्ञ से सलाह लेना

भारत में युवाओं के बीच मानसिक बीमारियों का बढ़ना एक गंभीर सामाजिक चुनौती बन चुका है। अगर समय रहते जागरूकता, सही इलाज और सकारात्मक जीवनशैली को नहीं अपनाया गया, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और विकराल हो सकती है। मानसिक स्वास्थ्य को उतनी ही प्राथमिकता देना जरूरी है, जितनी शारीरिक स्वास्थ्य को दी जाती है।

यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेने से पहले योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें। प्रस्तुत जानकारी की सत्यता, प्रभाव या परिणामों की RNI कोई पुष्टि या जिम्मेदारी नहीं लेता।

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