1. हिन्दी समाचार
  2. देश
  3. एआई के लिए क्या है पीएम मोदी का MANAV दृष्टिकोण?… नैतिकता, जवाबदेही और राष्ट्रीय संप्रभुता पर जोर, भारत की भूमिका स्पष्ट

एआई के लिए क्या है पीएम मोदी का MANAV दृष्टिकोण?… नैतिकता, जवाबदेही और राष्ट्रीय संप्रभुता पर जोर, भारत की भूमिका स्पष्ट

AI Impact Summit में पीएम नरेंद्र मोदी ने MANAV विजन पेश किया। उन्होंने कहा कि एआई का विकास नैतिक, जवाबदेह, समावेशी और राष्ट्रीय संप्रभुता के अनुरूप होना चाहिए।

By: Abhinav Tiwari 
Updated:
एआई के लिए क्या है पीएम मोदी का MANAV दृष्टिकोण?… नैतिकता, जवाबदेही और राष्ट्रीय संप्रभुता पर जोर, भारत की भूमिका स्पष्ट

नरेंद्र मोदी ने AI Impact Summit में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य को लेकर भारत का स्पष्ट और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री ने इस मंच से ‘M.A.N.A.V.’ विजन को सामने रखते हुए कहा कि एआई का विकास केवल तकनीकी प्रगति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह नैतिक, जवाबदेह, समावेशी और मानवता के हित में होना चाहिए।

क्या है M.A.N.A.V. विजन?

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि MANAV केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एआई के लिए भारत का मार्गदर्शक सिद्धांत है। इसके प्रत्येक अक्षर का अपना विशेष अर्थ है-

  • M (Moral and Ethical Systems): नैतिक और नीतिपरक प्रणालियां

  • A (Accountable Governance): जवाबदेह शासन व्यवस्था

  • N (National Sovereignty): राष्ट्रीय संप्रभुता की सुरक्षा

  • A (Accessible and Inclusive): सुलभ और समावेशी तकनीक

  • V (Valid and Legitimate): वैध और विश्वसनीय प्रणालियां

प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई को इस ढांचे में विकसित करना जरूरी है, ताकि तकनीक मानव मूल्यों के अनुरूप आगे बढ़े।

मानवता के हित में एआई विकास पर जोर

पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि एआई का उद्देश्य मानवता की सेवा होना चाहिए, न कि मानव को केवल डेटा पॉइंट या कच्चा संसाधन बना देना। उन्होंने कहा कि तकनीक का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे, इसके लिए पारदर्शिता, भरोसा और जिम्मेदारी को एआई विकास का आधार बनाना होगा।

एआई का लोकतंत्रीकरण जरूरी

प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई का लोकतंत्रीकरण समय की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि एआई को खुली छूट मिलनी चाहिए, लेकिन इसकी बागडोर मानवता के हाथ में रहनी चाहिए। विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण (Global South) के संदर्भ में उन्होंने कहा कि एआई को समावेशन और सशक्तिकरण का माध्यम बनना चाहिए, ताकि विकास का लाभ सभी देशों और समाजों तक समान रूप से पहुंचे।

एआई को वैश्विक साझा हित बनाने की अपील

पीएम मोदी ने कहा कि एआई से वास्तविक लाभ तभी संभव है, जब इसे साझा किया जाए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि एआई को प्रतिस्पर्धा का हथियार नहीं, बल्कि वैश्विक साझा हित (Global Public Good) के रूप में विकसित किया जाए।

“सभी का कल्याण और खुशी” ही एआई का मानदंड

प्रधानमंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक ऐसी शक्ति है, जिससे तेजी से सकारात्मक बदलाव लाए जा सकते हैं, लेकिन अगर इसका गलत दिशा में उपयोग हुआ तो यह नुकसान भी पहुंचा सकती है। उन्होंने दो टूक कहा- “सभी का कल्याण और खुशी ही एआई के लिए हमारा मानदंड है।” प्रधानमंत्री के इस संदेश के साथ भारत ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि तकनीक का भविष्य मानव मूल्यों, नैतिकता और वैश्विक जिम्मेदारी से जुड़ा होना चाहिए।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...