नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित प्रसिद्ध गीता प्रेस को वर्ष 2021 के लिए गांधी शांति पुरस्कार देने की घोषणा हुई है। इस घोषणा के बाद बीजेपी और कांग्रेस में वाक युद्ध छिड़ गया है। इस मामले को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार की आलोचना की। तो वहीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर कहा कि भारत की गौरवशाली प्राचीन सनातन संस्कृति और आधार ग्रंथों को अगर आज सुलभता से पढ़ा जा सकता है तो इसमें गीता प्रेस का अतुलनीय योगदान है। 100 वर्षों से अधिक समय से गीता प्रेस रामचरित मानस से लेकर श्रीमद्भगवद्गीता जैसे कई पवित्र ग्रंथों को नि:स्वार्थ भाव से जन-जन तक पहुंचाने का अद्भुत कार्य कर रही है। गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार 2021 मिलना उनके द्वारा किये जा रहे इन भागीरथ कार्यों का सम्मान है। गीता प्रेस को यह पुरस्कार अहिंसक और अन्य गांधीवादी तरीकों से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन की दिशा में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जायेगा।

इससे पहले कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने गीता प्रेस को पुरस्कार दिए जाने की आलोचना करते हुए विवादित ट्वीट किया। जिसमें उन्होंने गीता प्रेस को पुरस्कार देने की तुलना गोडसे को सम्मानित करने से की है। जयराम रमेश ने ट्वीट में लिखा कि 2021 के लिए गांधी शांति पुरस्कार गोरखपुर की गीता प्रेस को प्रदान किया गया है, जो इस साल अपनी शताब्दी मना रहा है। अक्षय मुकुल द्वारा इस संगठन की 2015 की एक बहुत ही बेहतरीन जीवनी है, जिसमें वह महात्मा के साथ इसके तूफानी संबंधों और उनके राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक एजेंडे पर उसके साथ चल रही लड़ाइयों का पता लगता है। यह फैसला वास्तव में एक उपहास है और सावरकर और गोडसे को पुरस्कार देने जैसा है। वहीं जयराम रमेश के इस ट्वीट से कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता सहमत नजर नहीं आए, उन्होंने इसे गैर जरूरी बताया।

इस मामले पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी ट्वीट किया है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में जीत के साथ, कांग्रेस ने अब खुले तौर पर भारत के सभ्यतागत मूल्यों और विरासत के खिलाफ युद्ध शुरू कर दिया है, चाहे वह धर्मांतरण विरोधी कानून को रद्द करना हो या गीता प्रेस की आलोचना हो। भारत के लोग इस आक्रामकता का विरोध करेंगे। वहीं बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गीता प्रेस ‘गांधी शांति पुरस्कार-2021’ से सम्मानित किए जाने पर बधाई व शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि भारत की गौरवशाली सनातन संस्कृति के संरक्षण व उत्कर्ष में पिछले 100 वर्षों का आपका योगदान प्रशंसनीय है। हमारे पवित्र ग्रंथों का वैश्विक प्रसार कर जो निःस्वार्थ सेवा आपने की है यह हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। बता दें कि गीता प्रेस की शुरुआत साल 1923 में हुई थी और यह प्रेस दुनिया के सबसे बड़े प्रकाशकों में से एक है।