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उज्जैन में ‘वन मेला’ और ‘विक्रमोत्सव’: CM डॉ. मोहन ने संस्कृति और आजीविका सशक्तिकरण पर दिया जोर

मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश का लगभग एक-तिहाई भू-भाग वन क्षेत्र से आच्छादित है। प्रदेश के आदिवासी और वनवासी समुदायों की आजीविका मुख्य रूप से वनोपज और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है।

By: Abhinav Tiwari 
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उज्जैन में ‘वन मेला’ और ‘विक्रमोत्सव’: CM डॉ. मोहन ने संस्कृति और आजीविका सशक्तिकरण पर दिया जोर

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में आयोजित ‘वन मेला’ और ‘विक्रमोत्सव’ के अवसर पर राज्य की सांस्कृतिक धरोहर और आर्थिक प्रगति से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि आदिवासी समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण और प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम है।

वन मेले का उद्देश्य: वनांचल से विकास की नई दिशा

मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश का लगभग एक-तिहाई भू-भाग वन क्षेत्र से आच्छादित है। प्रदेश के आदिवासी और वनवासी समुदायों की आजीविका मुख्य रूप से वनोपज और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है। इसी को ध्यान में रखते हुए ‘वन मेला’ का आयोजन किया जा रहा है, ताकि वन उत्पादों-विशेषकर वन औषधियों, शहद, बाँस और लकड़ी से बने उत्पादों-को उचित बाजार उपलब्ध कराया जा सके।

उन्होंने कहा कि पहले यह मेला केवल भोपाल में आयोजित होता था, लेकिन अब इसे प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी आयोजित करने का निर्णय लिया गया है, जिससे स्थानीय समुदायों को सीधे लाभ मिल सके।

उज्जैन में चार दिवसीय आयोजन

उज्जैन के दशहरा मैदान में 12 से 16 फरवरी तक चार दिवसीय वन मेला आयोजित किया गया। महाशिवरात्रि और विक्रमोत्सव के पावन अवसर पर आयोजित इस मेले में विभिन्न प्रकार की वन औषधियाँ, शुद्ध शहद, बाँस से बने खिलौने और आकर्षक लकड़ी के फर्नीचर-जैसे सोफा सेट और डाइनिंग टेबल-प्रदर्शित किए गए। यह आयोजन स्थानीय उत्पादों को ब्रांडिंग और मार्केटिंग का मंच प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं की विशेष व्यवस्था

वन मेले में आयुर्वेद चिकित्सकों और वैद्यों की उपस्थिति भी सुनिश्चित की गई। यहां लोगों की नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच और उपचार की व्यवस्था की गई। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे इन प्राकृतिक और पारंपरिक औषधियों का लाभ उठाएं तथा आदिवासी भाइयों-बहनों की आजीविका को सशक्त बनाने में सहयोग करें।

विक्रमोत्सव: गौरवशाली इतिहास का स्मरण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विक्रमोत्सव के अवसर पर सम्राट विक्रमादित्य के 2000 वर्ष पुराने गौरवशाली इतिहास का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि विक्रमादित्य का शासनकाल न्याय, दानशीलता और वीरता के लिए प्रसिद्ध था। उन्होंने विक्रमादित्य के सुशासन की तुलना भगवान श्रीराम के आदर्श शासन से करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन हमारी सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। विक्रमोत्सव के माध्यम से उज्जैन की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक महत्ता को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।

जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति और जनता से अपील

वन मंत्री दिलीप अहिरवार सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में मुख्यमंत्री ने मेले का उद्घाटन किया। उन्होंने उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं और नागरिकों से आग्रह किया कि वे इन आयोजनों का आनंद लें, स्थानीय उत्पादों की खरीद करें और प्रदेश की सांस्कृतिक व आर्थिक प्रगति में सहभागी बनें।

उज्जैन में आयोजित ‘वन मेला’ और ‘विक्रमोत्सव’ केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की पहल हैं। एक ओर जहां ये आयोजन आदिवासी समुदायों को बाजार से जोड़ते हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत और सुशासन की परंपरा को पुनर्जीवित करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह संदेश स्पष्ट है कि मध्य प्रदेश अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

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