Home उत्तराखंड उत्तराखंड हाई कोर्ट का बयान, कहा- सुनिश्चित करें कि हरिद्वार कुंभ कोविड-19 प्रसार का माध्यम न बन जाए

उत्तराखंड हाई कोर्ट का बयान, कहा- सुनिश्चित करें कि हरिद्वार कुंभ कोविड-19 प्रसार का माध्यम न बन जाए

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रिपोर्ट: नंदनी तोदी
देहरादून: हरिद्वार में होने वाले महाकुम्भ की तैयारी जोरो शोरो से चल रही है। इसी बीच कोरोना के बढ़ते मामले को लेकर भी चिंता जताई गई है, जिसे लेकर हाई कोर्ट ने सख्त निर्देश दिए हैं। दरअसल, नैनीताल हाई कोर्ट ने कल मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का फैसला पलटकात कहा कि कुम्भ आने से पहले आरटीपीसीआर रिपोर्ट लाना अनिवार्य है। मीडिया रिपोर्ट्स मुताबिक ये फैसला इसीलिए लिया गया है, क्योंकि प्रदेश में कोरोना के मामले रफ़्तार पकड़ चुके हैं।

इसी बीच चीफ जस्टिस राघवेंद्र सिंह चौहान और जस्टिस आलोक कुमार वर्मा की पीठ ने राज्य सरकार को कुम्भ पर निगरानी रखने का निर्देश दिया और ये भी सुनिश्चित करने के लिए कहा कि महाकुंभ मेला कोविड-19 महामारी के प्रसार का माध्यम न बन जाए। अदालत ने कहा कि कुंभ मेला क्षेत्र से लगे तीन जिलों (ऋषिकेश कुंभ इलाका, टिहरी गढ़वाल और पौढ़ी गढ़वाल) में उपलब्ध कराई जा रहीं सुविधाओं को बढ़ाने की बेहद आवश्यकता है।

चीफ जस्टिस राघवेंद्र सिंह चौहान और जस्टिस आलोक कुमार वर्मा की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि देश के कुछ हिस्सों में खतरे की घंटी बज रही है कि महामारी फिर से सिर उठा रही है। कुछ दक्षिणी और उत्तरी राज्यों ने आंशिक लॉकडाउन शुरू कर दिया है।

आदेश में कहा गया कि, “यह एक स्पष्ट संकेत है कि हम फिर से उस चरण में प्रवेश कर रहे हैं, जहां देश कोविड-19 महामारी का सामना करेगा। इसलिए राज्य सरकार से सतर्कता बरतने और यह सुनिश्चित करने की उम्मीद की जाती है कि महाकुंभ मेला कोविड-19 महामारी के प्रसार के माध्यम में नहीं बदल जाए।

हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि आगंतुकों की थर्मल स्क्रीनिंग के लिए प्रत्येक घाट के प्रवेश स्थल पर लोगों की प्रतिनियुक्ति की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि वे मास्क पहने हों। घाटों के पास या मेला क्षेत्र में रणनीतिक स्थानों पर डॉक्टरों और नर्सों को समायोजित करने के लिए पर्याप्त संख्या में कैंप स्थापित किए जाएं।

इतना ही नहीं ये भी कहा गया है कि तीर्थयात्रियों को टीका लगाने की सुविधाएं बनाई जानी चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ नागरिकों को मेला देखने के लिए टीका लगाया जा सके।

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