सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा अयोध्या में मस्जिद व अन्य निर्माणों के लिए गठित इण्डो इस्लामिक कल्चरल फाउण्डेशन ट्रस्ट की पहली बैठक इस महीने के अन्त में या अगले महीने के प्रारम्भ में हो सकती है। लखनऊ में बर्लिंगटन स्क्वायर में ट्रस्ट के लिए किराए पर लिया गया कार्यालय भी तब तक पूरी तरह से तैयार हो जाएगा।
ट्रस्ट के सचिव एवं प्रवक्ता अतहर हुसैन ने ‘ हिन्दुस्तान’ को बताया कि बैठक में ही तय हो जाएगा कि अयोध्या में सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई भूमि पर बनने वाली मस्जिद कैसी होगी। वहां कैसा अस्पताल होगा और कैसी लाइब्रेरी बनेगी। साथ में और क्या-क्या बनेगा इसकी पूरी रूपरेखा उसमें तय हो जाएगी।
श्री हुसैन ने कहा कि पिछले वर्ष नवम्बर में ही पता चला था कि सरकार अयोध्या में मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन देगी। उसके बाद सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा वीडियो कान्फ्रेन्सिंग के जरिए गठित 9 सदस्यीय ट्रस्ट का कोविड-19 के कारण अब तक एक भी आमने-सामने बैठकर बैठक नहीं हो सकी है। कारण यह सभी सदस्य अलग-अलग जगहों से हैं। कोविड महामारी में कुछ का घरों से बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं। फिर भी सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए रूबरू बैठक की कोशिश की जा रही है। लखनऊ में कार्यालय बनने से इसमें आसानी होगी।
ट्रस्ट के सचिव सह प्रवक्ता ने शनिवार को कहा था कि अयोध्या जिले के धन्नीपुर गांव में सुन्नी वक्फ बोर्ड को मिली 5 एकड़ भूमि पर मस्जिद के साथ ही अस्पताल, लाइब्रेरी, कम्यूनिटी किचेन, म्यूजियम और रिसर्च सेन्टर बनाए जाने की योजना है। यह सारा निर्माण आम जन की सुविधा के लिए होगा।
मस्जिद को छोड़ बाकि सभी जनसुविधाओं के निर्माण के शिलान्यास के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बुलाने की बात कही थी और कहा था कि मुख्यमंत्री केवल शिरकत ही नहीं करेंगे बल्कि निर्माण में सहयोग भी करेंगे। अतहर ने यह भी कहा कि इस्लाम में मस्जिदों के शिलान्यास जैसा कोई कार्यक्रम नहीं होता है।