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गोरखपुर: फूड और टेक्सटाइल का हब बनेगा गीडा, पूर्वांचल के साथ बिहार और नेपाल के बाजार पर नजर

By: RNI Hindi Desk 
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गोरखपुर: फूड और टेक्सटाइल का हब बनेगा गीडा, पूर्वांचल के साथ बिहार और नेपाल के बाजार पर नजर

कारोबारी सुगमता में यूपी की लंबी छलांग में सहयोगी बना गोरखपुर अब खाद्य प्रसंस्करण और टेक्सटाइल का हब बनने की ओर अग्रसर है। स्थानीय के साथ ही दूसरे राज्यों के उद्यमियों की भी नजर पूर्वांचल के साथ बिहार और नेपाल के बाजार पर है। इन बाजारों से बेहतर कनेक्टिविटी के चलते गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) में दो दर्जन इकाइयां फूड और टेक्सटाइल की लग रही हैं। इनमें 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश होना है। इन इकाइयों में एक हजार से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनेंगे।

गीडा प्रशासन ने बीते दिनों साक्षात्कार के बाद 68 उद्यमियों को भूखंड का आवंटन किया है। इनमें सर्वाधिक प्रस्ताव एग्रो एवं फूड प्रोडक्ट से जुड़े हैं। सिद्धार्थनगर के उस्का बाजार निवासी अनूप छापड़िया ने 10 करोड़ का निवेश प्रस्ताव दिया है। अनूप बताते हैं कि नमकीन और अन्य प्रोडक्ट बनाने की योजना है। गीडा से पूर्वांचल के साथ बिहार और नेपाल तक उत्पादों को आसानी से बाजार मिल सकता है। वहीं मुंबई के उत्कर्ष राजेन्द्र पाठक करीब 8 करोड़ रुपये का निवेश कर रहे हैं। उनकी योजना अदरक, लहसुन आदि का पेस्ट बनाने की है।
चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल कहते हैं कि सर्वाधिक प्रस्ताव फूड व एग्रो प्रोडक्ट और टेक्सटाइल के आए हैं। यह क्षेत्र टेक्सटाइल एवं फूड एवं एग्रो प्रोडक्ट के लिए काफी महत्वपूर्ण है। रेडीमेड गारमेंट के लिए भी कई इकाइयां मौके के इंतजार में हैं। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

फूड जोन विकसित करने पर विचार
80 ऐसे उद्यमी भूखंड नहीं मिलने से निराश हुए हैं, जो फूड या टेक्सटाइल से जुड़ा उद्योग लगाना चाहते थे। उद्यमियों के उत्साह को देखते हुए गीडा प्रबंधन भविष्य में ‘फूड जोन’ विकसित करने पर भी विचार कर रहा है। कृषि प्रधान इलाका होने से इन उत्पादों के लिए यह जमीन उर्वरा है।

ये कंपनियां लगा रही अपनी इकाई
गीडा में फूड से जुड़ी जिन प्रमुख फैक्ट्रियों का प्रस्ताव मिला है, उनमें एसीवीके एग्रो प्राइवेट लिमिटेड, हरिओम फीड, माधव गोविंद फूड प्रोडक्ट, जीके फूड एंड ब्रेवरेज, ग्लोबल फूड प्रोडक्ट, एसबीडी एग्रो, नयन डेयरी एंड फार्म प्रोडक्ट, आकृति इनोवेशन और औद्रा इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड प्रमुख हैं।

सोनौली बॉर्डर पर 2000 करोड़ का ट्रेड
नेपाल से व्यापार के लिए बीरगंज के बाद सोनौली दूसरा सबसे बड़ा नाका है। पिछले साल डायरेक्ट्रेट ऑफ फॉरेन ट्रेड के डिप्टी डायरेक्टर अमित कुमार ने पूर्वांचल के उद्यमियों के साथ गोरखपुर में नेपाल से कारोबारी रिश्ता बढ़ाने को लेकर मंथन किया था। चैंबर ऑफ इंडस्ट्री के पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल बताते हैं कि आकड़े के मुताबिक सोनौली बार्डर से भारत का नेपाल के साथ 2000 करोड़ का कारोबार होता है। इसमें गोरखपुर का हिस्सा 150 करोड़ का है। गीडा में जिस तरह फूड और टेक्सटाइल के उद्योग लग रहे हैं, उससे गोरखपुर का कारोबारी हिस्सा आसानी से 600 करोड़ का हो सकता है। अभी गीडा में बनी चप्पल, हार्डवेयर, सैनेटरी नैपकिन, गुटखा और रेडीमेड गॉरमेंट का निर्यात नेपाल को होता है।

ओडीओपी में टेक्सटाइल का प्रस्ताव
पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेस-वे के दोनों तरफ बनने वाले औद्योगिक गलियारे में 100 एकड़ में टेक्सटाइल पार्क प्रस्तावित है। इसके लिए गीडा ने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। साथ ही चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के प्रस्ताव के बाद गीडा प्रशासन ने ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना के दूसरे प्रोडक्ट के लिए टेक्सटाइल उद्योग का प्रस्ताव शासन को भेजा है। चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष विष्णु अजीत सरिया का कहना है कि पूर्वांचल पहले से ही बुनकरी और कपड़ा उद्योग को लेकर अहम रहा है। यहां तैयार यार्न और धागा पंजाब, कोलकाता से लेकर गुजरात तक जाता है।

बोले गीडा सीईओ
एग्रो व फूड प्रोडक्ट और टेक्सटाइल के कई प्रस्ताव आए हैं। ऐसे लोगों को ही भूखंड दिए गए हैं, जो जल्द से जल्द इकाई स्थापित कर लें, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित हों।

 

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