झाबुआ: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि झाबुआ जिले में प्राकृतिक खेती की अपार संभावनाएं हैं। प्राकृतिक खेती न केवल किसानों को स्वस्थ कृषि पद्धति अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है, बल्कि उनकी आय बढ़ाने का भी प्रभावी माध्यम बन रही है। मुख्यमंत्री शुक्रवार को थांदला में आयोजित प्रदेश स्तरीय “स्व-सहायता समूहों का क्षमतावर्धन एवं ऋण वितरण कार्यक्रम” में शामिल हुए, जहां उन्होंने प्राकृतिक खेती करने वाली कृषि सखियों और प्रगतिशील किसानों से संवाद किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में नए अवसर विकसित हुए हैं और प्रदेश सरकार कृषि कल्याण वर्ष के अंतर्गत किसानों के हित में विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी।
कृषि सखियों के कार्यों की सराहना
मुख्यमंत्री ने मेघनगर विकासखंड के ग्राम देवीगढ़ की कृषि सखी श्रीमती संगीता डामोर से संवाद किया। संगीता डामोर ने बताया कि उन्होंने प्राकृतिक खेती का पांच दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त किया है और वर्तमान में 125 किसानों को बीजामृत, जीवामृत और नीमास्त्र तैयार करने का प्रशिक्षण दे रही हैं।उन्होंने बताया कि लगभग एक हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद गेहूं का उत्पादन 35 क्विंटल से बढ़कर 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गया है, जिससे आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती लागत कम करने और किसानों की आमदनी बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन रही है।

मुख्यमंत्री ने कृषि सखियों से की सीधी चर्चा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं कृषि सखियों के बीच पहुंचे और उनके अनुभवों को जाना। उन्होंने प्राकृतिक खेती से हो रही अतिरिक्त आय की जानकारी ली तथा सभी महिलाओं को आगामी रक्षाबंधन की शुभकामनाएं भी दीं।
प्रगतिशील किसान विमल भाबोर बने मिसाल
मुख्यमंत्री ने झाबुआ विकासखंड के ग्राम खेड़ी निवासी प्रगतिशील किसान विमल भाबोर से भी संवाद किया। विमल भाबोर ने बताया कि वे 25 बीघा भूमि पर खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं और पिछले दो वर्षों से प्राकृतिक खेती अपना रहे हैं।उन्होंने बताया कि पहले खेती से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 50 हजार रुपये का लाभ मिलता था, जबकि प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उनकी वार्षिक आय बढ़कर 1 से 1.50 लाख रुपये हो गई है। इसके अलावा जैव संसाधन केंद्र, नर्सरी, प्राकृतिक सब्जियों, फलों और वर्मी कम्पोस्ट के माध्यम से भी उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत घटती है, मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और किसानों की आय में वृद्धि होती है। उन्होंने विमल भाबोर से अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री विजय शाह, महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया, संभागायुक्त भास्कर लक्षकार, कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट, एसपी देवेंद्र पाटीदार सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।